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अक्षर पटेल का EXCLUSIVE इंटरव्यू:स्टार स्पिनर किसी मॉडल से शादी नहीं करेंगे, कहा- ऐसी जीवनसाथी चाहता हूं जो मेरे घर में खुश रहे और जिससे मेरे घरवाले भी खुश रहें

अहमदाबाद2 महीने पहलेलेखक: शीला भट्‌ट/बिक्रम प्रताप सिंह

सफलता कितनी भी बड़ी क्यों न मिले, पैर जमीन पर टिके रहना जरूरी है। वर्तमान में जिओ और मेहनत करो, भविष्य की चिंता मत करो। जीवनसाथी ऐसी हो जो घर के माहौल से एडजस्ट कर सके और जिसके साथ घरवाले भी खुश रहें। जीवन को लेकर ऐसा फलसफा किसी दार्शनिक, संत या समाजसेवी का नहीं, भारतीय क्रिकेट टीम की नई सनसनी लेफ्ट आर्म स्पिनर अक्षर पटेल का है।

इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 3 मैचों में 27 विकेट लेकर भारत को वर्ल्ड चैम्पियनशिप के फाइनल में पहुंचाने वाले अक्षर ने क्रिकेट और जीवन से जुड़े तमाम मुद्दों पर भास्कर से विशेष बातचीत की। इसमें उन्होंने अपने करियर के टर्निंग पॉइंट्स, भविष्य की योजनाएं, IPL सहित कई मुद्दों पर अपने विचार खुल कर रखे। पेश है इंटरव्यू के मुख्य अंश...

पहले पठान ब्रदर्स आए, फिर पंड्या ब्रदर्स आए और अब आप आते ही छा गए। ये बताएं गुजरात में कुछ खास हो रहा है क्या, बहुत टैलेंट आ रहे हैं राज्य से?
जो खिलाड़ी ऊंचे स्तर की क्रिकेट में आ जाते हैं वे कोशिश करते हैं कि अपने खेल से यंगस्टर्स को इन्सपायर करें। पंड्या ब्रदर्स आए, उससे पहले जडेजा, उनादकट, पुजारा जैसे खिलाड़ी आए। मैं भी आया। हम यही कोशिश करते हैं कि जो यंगस्टर्स हैं उनको एक स्टेप ऊपर लेकर जाएं। इसके लिए हम जब भी खेलते हैं बेस्ट देने की कोशिश करते हैं, क्योंकि हमें मालूम है कि युवा खिलाड़ी हमें फॉलो करते हैं। मेरे ख्याल से अभी यही हो रहा है।

आप मानते हैं कि IPL के लिए पहली बार मुंबई इंडियंस की टीम में सिलेक्ट होना आपके करियर का टर्निंग पॉइंट रहा था?

मेरा मानना है कि मेरे करियर में दो टर्निंग पॉइंट रहे। पहला टर्निंग पॉइंट गुजरात की स्टेट टीम में मेरा सिलेक्शन होना रहा और दूसरा टर्निंग पॉइंट मुंबई इंडियंस टीम का हिस्सा बनना रहा। रणजी टीम में सिलेक्ट होने के पहले साल मैं अंडर-19 जोनल क्रिकेट में चला गया था। दूसरे साल मुझे एक भी मैच में मौका दिए बिना अंडर-25 में भेज दिया गया था।

तभी सूरत में रणजी मुकाबले में गुजरात का सामना दिल्ली से था। दिल्ली की फुल स्ट्रेंथ टीम आई थी और उसमें वीरू पाजी (वीरेंद्र सहवाग), गौतम गंभीर, मिथुन मन्साह जैसे बैट्समैन थे। गुजरात के मैनेजमेंट को महसूस हुआ पिच से स्पिनर्स को मदद मिल सकती है और फिर मुझे रातों-रात अहमदाबाद से सूरत बुलाया गया। उस मैच में मैंने दिल्ली की पहली पारी में 6 विकेट लिए। मैच ड्रॉ रहा लेकिन पहली पारी में बढ़त के आधार पर गुजरात को ज्यादा पॉइंट मिले। इस मैच से मेरा करियर बदल गया।

इसके बाद 2013 IPL के लिए मुंबई इंडियंस टीम में शामिल होना करियर का दूसरा टर्निंट पॉइंट था। 2014 में जब मैं पंजाब की टीम हिस्सा बना तब भी मैंने कहा था कि मुंबई के लिए सिलेक्ट होने मेरे लिए बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट था। वहां मुझे रिकी पोंटिंग, सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले, हरभजन सिंह जैसे दिग्गज खिलाड़ियों का साथ मिला। इनसे मैंने बहुत कुछ सीखा और यह विश्वास जगा कि मैं भी मेहनत करूं तो आगे जा सकता हूं।

सचिन, पोंटिंग जैसे खिलाड़ियों से पहली बार मिलने का अनुभव कैसा रहा?

मुंबई इंडियंस ने मुझे और जसप्रीत बुमराह दोनों को 2013 में एक साथ टीम में शामिल किया था। हम दोनों तो शुरुआती दो-तीन दिन यही देखते रहे कि सचिन और पोंटिंग जैसे हमारे हीरो करते क्या हैं। उनको देखकर पता चला कि इंटरनेशनल लेवल क्रिकेट और क्रिकेटर कैसा होता है। हमने महसूस किया कि इनकी तरह अगर हम भी मेहनत करें तो और अच्छा परफॉर्म करेंगे। ये लोग क्या करते हैं, क्या सोचते हैं, इनका क्या माइंडसेट होता है, ये सब हमने उस साल सीखा। उस साल हम (मुंबई इंडियंस) चैम्पियन भी बने थे। साथ ही हमारी टीम ने चैम्पियंस लीग भी जीती थी। उस साल मुंबई इंडियंस के साथ पूरा अनुभव मेरे लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उसके बाद से मैं अलग ही क्रिकेटर नजर आया हूं।

नडियाड जैसे छोटे शहर से आपका करियर शुरू हुआ। पारिवारिक बैकग्राउंड भी काफी सामान्य रहा है। अब आप एक बड़े स्टार हैं। कैसे संभाल रहे हैं यह स्टारडम?
मॉम-डैड और उनसे मिली सीख इस मामले में मेरे काम आती हैं। डैड ने मुझे सिखाया है कि कहीं भी पहुंच जाओ ये मत भूलो कि कहां से आए हो और कैसे आए हो। इसलिए जब दोस्त बोलते हैं कि तुम स्टार बन गए हो या खुद भी दिमाग में कोई बात आती है कि ये ले लूं, वो ले लूं तो फिर डैड की बात याद कर अपने पैर जमीन पर रखता हूं। मैं मॉम-डैड को थैंक्स कहना चाहूंगा कि उन्होंने मुझे जो सिखाया और जो संस्कार दिए उनकी बदौलत मैं कभी नहीं भूलता कि मैं कौन हूं।

क्या छोटे शहर से आने के कारण शुरुआत में एडजस्ट करने में दिक्कत होती है?
डिपेंड करता है कि आपका माइंडसेट कितना मजबूत है। छोटे शहर से आने के कारण कई बार कम्युनिकेशन की दिक्कत होती है। जैसे कोई गुजरात से जाता है तो शुरुआत में न तो सही से हिंदी बोल पाता है और न सही से इंग्लिश बोल पाता है। इसलिए कई बार बात करने में हिचक होती है। मन में सवाल आते हैं कि मैं बात करूं या न करूं? क्या बोलूं, क्या पूछूं? ये लोग क्या सोचेंगे? ये लोग बड़ी सिटी में रह चुके हैं, मेरे बारे में क्या सोचेंगे? लेकिन, जब आपके आस-पास का बंदा भी अच्छा होता है तो वह आपको कम्फर्टेबल फील करवा देता है। उसको पता चल जाता है कि नया बंदा थोड़ा झिझक रहा है, या इसको लैंग्वेज की दिक्कत है।

मुंबई इंडियंस में जब मैं शामिल हुआ था तो मुझे काफी एक्सपोजर मिला। तब अनिल भाई कोच थे। वो आते थे, बात करते थे। भज्जू पा (हरभजन सिंह) मस्ती-मजाक करते थे। वो लोग हमें खोल रहे थे (ओपन अप होने का मौका दे रहे थे)। मुझे लगता है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आपके सीनियर प्लेयर आपके साथ किस तरह का व्यवहार करते हैं।

आपकी सबसे ज्यादा मदद किसने की?
मैं और जसप्रीत एक साथ गए थे अंडर-19 में। हम दोनों एक-दूसरे की काफी ज्यादा मदद कर रहे थे। अकेले बंदे के साथ दिक्कत हो सकती थी, लेकिन हमारे और जसप्रीत के साथ सिलेक्ट होने से राह आसान हो गई। हमारी ट्यूनिंग काफी अच्छी थी। इनके अलावा जैसा कि मैंने कहा, भज्जू पा, अनिल कुंबले, रिकी पोंटिंग ये सब आकर मिलते थे, इससे काफी मदद मिली।

आप व्हाइट बॉल क्रिकेट में पहले से स्टार हैं। IPL में आप कई साल से खेल रहे हैं, लेकिन पूरी दुनिया ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में जाना कि अक्षर पटेल की असली क्षमता क्या है? अपने करियर में इस सीरीज का कितना योगदान मानते हैं?

इस सीरीज की यादें मेरे करियर की सबसे अच्छी यादों में हैं और मेरे लिए हमेशा नंबर-1 पर रहेगी। जब भी आप क्रिकेट खेलना शुरू करते हैं तो आपका लक्ष्य होता है कि मुझे इंडिया के लिए खेलना है। इंडिया का टेस्ट कैप मिलना बहुत ही बड़ी बात है। वनडे और टी-20 तो आप खेलते ही रहते हो, लेकिन पांच दिन का जो गेम है वह असली चुनौती है। बीच में सुनने में आया था कि टेस्ट क्रिकेट का भविष्य बहुत अच्छा नहीं है, लेकिन वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की वजह से एक्साइटमेंट बढ़ी। जाहिर तौर पर इंडिया के लिए टेस्ट खेलना सपना पूरा होने जैसा है।

जब मैंने खेलना शुरू किया था तो कई लोगों ने कहा था कि तुम फ्लैट बॉल डालते हो, फ्लाइट नहीं करते। तुम टेस्ट में अच्छा नहीं कोरोगे। जब मैं NCA (बेंगलुरु) में जाता था तब भी सब मुझे बॉल फ्लाइट करने को बोलते थे, लेकिन मैंने हमेशा अपनी योग्यता और अपने स्किल को बैक किया।

मेरा मानना था जिस स्टाइल ने मुझे अब तक सफलता दिलाई है वह आगे भी दिलाएगी। मैंने तय कर लिया कि जिसको जो बोलना है बोले, मैं अपने स्किल्स के साथ जाऊंगा। बाद में वेरिएशन के रूप में मैंने स्लो गेंदें भी फेंकनी शुरू की। तेज गेंद डालना मेरा स्ट्रेंथ है और मेरा मानना है कि अगर आप अपने स्ट्रेंथ के हिसाब से मेहनत करोगे तो रिजल्ट मिलेगा। मुझे खुशी है कि इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज ने मुझे वह रिजल्ट दिया।

भविष्य में पिच और कंडीशन के हिसाब से थोड़ा-बहुत बदलाव कर सकता हूं। मुझे यह भी पता है कि हर सीरीज में एक जैसा परफॉर्मेंस नहीं होगा, लेकिन फिर भी मैं अपनी स्टाइल और अपने स्ट्रेंथ के साथ ही रहूंगा।

आप, रवींद्र जडेजा और क्रुणाल पंड्या तीनों ही लेफ्ट आर्म स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर हैं। आम तौर टीम में इस रोल के लिए एक ही जगह बनती है। खास बात है कि आप तीनों ही गुजरात के हैं। इसे किस रूप में लेते हैं?
हमारे बीच आपस में हेल्दी कॉम्पीटिशन है। ये दोनों मेरे काफी अच्छे दोस्त भी रहे हैं। पंड्या ब्रदर्स तो मेरे लिए भाई के जैसे ही हैं। मैं उनके काफी क्लोज हूं। हम तीनों को अगर आप साथ में देखेंगे तो कहेंगे कि हम भाई ही हैं। जडेजा और क्रुणाल भी जबरदस्त क्रिकेटर्स हैं। जब हेल्दी कॉम्पीटिशन हो तो आप एक पल के लिए भी कुछ भी हल्के में नहीं ले सकते हैं। आपको पता होता है कि आपने अगर थोड़ा भी हल्का लिया तो आपकी जगह कोई और ले सकता है। इसलिए मैं इस कॉम्पीटिशन को पॉजिटिव तरीके से लेता हूं। जब भी प्रैक्टिस करता हूं तो यह पता होता है कि मैं ढिलाई बरतना अफोर्ड नहीं कर सकता हूं। इसलिए मैं और ज्यादा मेहनत करता हूं और कुछ नया करने और सीखने की लगातार कोशिश करता हूं।

अक्षर आपकी बेहतरीन बॉलिंग दुनिया ने देखी, लेकिन आप बैटिंग में भी शानदार रहे हैं। आप पहले कहते रहे हैं आप एक बैट्समैन हैं जो बॉलिंग कर सकता है। अब आप क्या मानते हैं?
हालात ने मुझे बॉलर हू कैन बैट (ऐसा बॉलर जो बैटिंग कर सकता है) बना दिया है, लेकिन अभी भी मैं अपने आप को बैट्समैन मानता हूं। जब भी मुझे किसी एक को चुनने को कहा जाता है तो मैं बैटिंग ही चुनता हूं। कोच भी अगर पूछते हैं कि पहले तुम्हें क्या करना है, तो मैं पहले बैटिंग बोलता हूं और उसके बाद बॉलिंग।

बचपन में आप क्या ज्यादा पसंद करते थे, बैटिंग या बॉलिंग?
अंडर-19 तक मैं बैट्समैन ही था। एनसीए में बैट्समैन ज्यादा थे तो मुझे ऑलराउंडर के तौर पर बॉलर (स्पिनर) के ग्रुप में डाल दिया था। मैंने नानावटी सर से कहा भी था कि मैं स्पिनर ग्रुप में क्या करूंगा? मुझे स्पिन नहीं डालनी मैं बैटिंग करूंगा। सर ने कहा कि स्पिनर ग्रुप में भी बैटिंग मिलेगी। टेंशन मत लो। तब से 30 दिन मैंने इतनी बॉलिंग कर दी कि उसके बाद मेरा ज्यादा फोकस बॉलिंग पर हो गया। इसके बाद बैटिंग ऑर्डर में मेरी जगह नीचे जाती चली गई। 3 से 4 फिर 5, 6, 7 नंबर पर मैं बैटिंग करने लगा।

अक्षर आपने टेस्ट सीरीज में बेहतरीन बॉलिंग की, लेकिन इसके बाद टी-20 सीरीज में आपको एक मैच ही मिला। वनडे टीम में आप शामिल नहीं किए गए। इस पर आपका क्या कहना है?
पहला टी-20 मैं खेला, लेकिन इंग्लैंड की टीम में लेफ्ट हैंडर ज्यादा थे इसलिए मैं टीम कॉम्बिनेशन में फिट नहीं हो रहा था। साथ ही यूजी (युजवेंद्र चहल) अच्छी गेंद डाल रहे थे। इसलिए आखिरी चार मैच मैं नहीं खेला। इसके अलावा टेस्ट सीरीज के दौरान से ही मुझे बाएं घुटने में कुछ समस्या हो रही थी। इसलिए वनडे सीरीज से बाहर रहना मेरे लिए ठीक था।

भारत को टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में पहुंचाने के पीछे आपका बहुत बड़ा रोल था। क्या आप इंग्लैंड में होने वाले फाइनल मुकाबले में खुद को खेलते हुए देखते हैं?
इसके लिए कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। अभी से मैं अगर उसके बारे में सोचूंगा तो इसका मतलब यही होगा कि मैं प्रजेंट में नहीं जी रहा हूं। इससे IPL में भी मेरा परफॉर्मेंस प्रभावित होगा। मैं हमेशा मैच दर मैच चीजों को लेता हूं। जब भी आप बहुत आगे का सोचते हो तो अच्छा नहीं कर पाते हो। आगे का सोचने से आप रिजल्ट पे फोकस करते हो, प्रोसेस पर ध्यान नहीं देते हो। इसलिए मैं सिर्फ प्रोसेस पर ध्यान देता हूं और प्रजेंट में जीने की कोशिश करता हूं।

बहुत से युवा भविष्य में स्टार क्रिकेटर बनना चाहते हैं। IPL खेलना चाहते हैं। पैसे कमाना चाहते हैं। कुछ कामयाब होते हैं, कई फेल हो जाते हैं। इन युवाओं के लिए आपकी क्या सलाह है?
सही माइंडसेट का होना बहुत जरूरी है। कोई यह सोच कर खेलेगा कि मुझे IPL खेलना है या पैसे कमाना है तो सक्सेस नहीं मिलेगी। अपने पैशन के लिए खेलना चाहिए। खेलने में मजा आए इसके लिए खेलना चाहिए। इंडिया को रिप्रजेंट करना है यह सोचना चाहिए। फिर आपको चीजें मिलती जाएंगी। फिर आप अपनी स्टेट टीम में भी आओगे, IPL में भी आओगे। देश के लिए खेलने और देश के लिए कुछ करने का जज्बा है तो आप बहुत कुछ हासिल कर सकते हो, लेकिन आप सोचोगे कि मुझे IPL खेलना है इसलिए रणजी ट्रॉफी खेलने का मौका मिल गया तो बहुत है सही नहीं होगा। मैं कई यंग लोगों को बात करते हुए सुनता हूं कि यार मुझे IPL में चांस मिल जाए। मुझे उधर चांस मिल जाए। मेरे विचार से यह सोच बिल्कुल सही नहीं है।

आपने ऑलरेडी बड़ा मुकाम हासिल कर लिया, फ्यूचर में और क्या हासिल करना चाहते हैं?
देश के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना मेरा सपना था जो पूरा हो गया। मुझे नहीं लगता कि देश को रिप्रजेंट करने से ज्यादा बड़ी और कोई खुशी हो सकती है या इससे बड़ा और कोई मुकाम हो सकता है। अभी मेरे मन की स्थिति पूछिए तो मैं यही कहूंगा कि तीनों फॉर्मेट में मुझे शानदार प्रदर्शन करना है। देश के लिए मुझे ऐसे ही मैच जीतते रहना है। इसके अलावा जब समय मिलता तो मुझे मॉम-डैड के साथ वक्त बिताना है। उनको खुश रखना मेरा मकसद है। उनको दुख न पहुंचे वो हमेशा खुश रहें यही लक्ष्य है। इसलिए जब भी समय मिलता है उनसे बात कर लेता हूं। मेरे आस-पास के लोग मेरे से खुश हैं यही मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।

कहा जाता है कि क्रिकेट में पॉलिटिक्स भी बहुत है। इस पर आपका क्या कहना है?
मेरा मानना है कि अगर आपके पास टैलेंट है और आप मेहनत करते हैं तो पॉलिटिक्स आपको नहीं रोक सकती। हर टीम चाहती है कि वह जीते और उसके पास अच्छे खिलाड़ी हों। कुछ लोग मन को दिलासा देने के लिए कहते हैं कि पॉलिटिक्स के कारण उनको मौका नहीं मिला। लेकिन ऐसा नहीं है। अगर आप परफॉर्मेंस देते रहोगे तो बताओ कौन सी टीम आपको सिलेक्ट नहीं करेगी। जो चीज आपके हाथ में है उस पर फोकस करें तो ज्यादा अच्छा है।

नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आपने बेहतरीन खेल दिखाया। यह दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है। इस स्टेडियम के बारे में आपका क्या कहना है? यहां की पिच पर हुई कंट्रोवर्सी पर आपकी क्या राय है?
मैं अपने आपको खुशकिस्मत मानता हूं कि यह स्टेडियम मेरे राज्य में है और मैं यहां रेगुलर खेलता हूं। साथ ही टेस्ट में भी मैंने और हमारी टीम इंडिया ने यहां जोरदार खेल दिखाया। इस स्टेडियम में हर तरह की फैसिलिटी है। एक क्रिकेटर को जो भी चाहिए वह सब इस स्टेडियम में मौजूद है। जिम की सुविधा से लेकर आइस बाथ तक, एक क्रिकेटर यहां सबकुछ कर सकता है। गुजराती होने के कारण मैं और भी लकी हूं क्योंकि डोमेस्टिक क्रिकेट के लिए भी हम इसी स्टेडियम का इस्तेमाल करते हैं।

जहां तक पिच का सवाल है तो मुझे नहीं लगता है कि इस पर कोई कंट्रोवर्सी होनी चाहिए। 30 में से 21 विकेट अगर सीधी गेंद पर गिरें तो पिच को दोष देना उचित नहीं होगा। वैसे भी हम जब बाहर जाते हैं और हमें सीमिंग या घास वाली विकेट मिलती है तो हम कभी शिकायत नहीं करते हैं। जब हम साउथ अफ्रीका गए थे तो जोहानिसबर्ग की पिच अनइवेन थी। पिच में क्रैक्स थे। मैं भी तब टीम के साथ था। कप्तान विराट कोहली ने तब कहा था कि पिच दोनों टीमों के लिए एक जैसी है। इसलिए हमें पिच पर नहीं खेल पर फोकस करना चाहिए।

आप कहते हैं मैं लकी हूं, तो क्या इस लकी मैन को लाइफ पार्टनर मिल गई है?
नहीं, अभी इस लकीमैन को लाइफ पार्टनर नहीं मिली है। यह हो जाए तो मैं और भी लकी हो जाऊंगा।

अब तो आप इतने फेमस हो, सेलिब्रिटी स्टार हो। क्यों नहीं मिली? या ढूंढी नहीं?

अक्षर पटेल के माता-पिता अपने आवास पर।
अक्षर पटेल के माता-पिता अपने आवास पर।

वैसे अगर मैं सोचूंगा तो मिल ही जाएगी। मैं चाहता हूं कि जो लड़की मेरे जीवन में आए उससे मेरे मॉम-डैड भी खुश रहें और वह भी मेरे घरवालों से खुश रहे। अगर मैं मॉडल से शादी कर लूं तो शायद वह मेरे घर के माहौल से एडजस्ट न कर पाए। आने के लिए रिश्ते मुझे यूएस से भी आ रहे हैं, लेकिन मेरा मानना है कि रिश्ता ऐसा होना चाहिए जो सबके लिए सही हो। घर वालों के लिए भी और लड़की के लिए भी। मैं बाहर रहूं और पता चले कि घर में लड़ाई हो रही है तो फिर मेरा माइंड सेट स्टेबल नहीं होगा। फिर मेरी मॉम भी मुझे बोलेगी और मेरी वाइफ भी मुझसे नाराज रहेगी।

अक्षर कहा जाता है कि क्रिकेट फिजिकल गेम होने के साथ-साथ मेंटली भी काफी चैलेंजिंग होता है। इसे कैसे देखते हैं।
हां, एक क्रिकेटर को मानसिक रूप से मजबूत होना चाहिए। किस सिचुएशन में क्या डिसीजन लेते हो यह काफी मायने रखता है।

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