पंजाबी क्रिकेटर आयरलैंड का स्टार क्रिकेटर:वहां स्पिनर्स कम थे, सिमी बल्लेबाजी छोड़ गेंदबाजी करने लगे

स्पोर्ट्स डेस्क3 महीने पहलेलेखक: राजकिशोर

पंजाब का एक क्रिकेटर आयरलैंड में जाकर वहां की नेशनल टीम का हीरो बन जाता है। बात टी-20 वर्ल्ड कप खेल रही आयरिश टीम के ऑफ स्पिनर सिमी सिंह की हो रही है। ज्यादातर इंडियन क्रिकेटर्स की तरह सिमी सिंह ने सचिन तेंदुलकर को देखकर ही क्रिकेट खेलना शुरू किया। हां... अब आयरलैंड के लिए खेलते हैं, लेकिन जब भारत के खिलाफ मुकाबला होता है तो उनकी फीलिंग स्पेशल होती है। कहते हैं- खेलने के लिए एक्स्ट्रा मोटिवेशन भी मिलता है।

भास्कर ने सिमी सिंह से बातचीत की। इंडिया से आयरलैंड जाने की वजह, वहां की टीम में चुने जाने की कहानी जानी।

आगे पढ़िए सिमी की क्रिकेट स्टोरी और उससे पहले आप हमारे पोल में हिस्सा ले सकते हैं...

सबसे पहले जान लीजिए सिमी की बात क्यों हो रही है...

सिमी वनडे इंटरनेशनल में 8 नंबर पर आकर 100 बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज हैं।
सिमी वनडे इंटरनेशनल में 8 नंबर पर आकर 100 बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज हैं।

सिमी सिंह ऑस्ट्रेलिया में चल रहे वर्ल्ड कप में 3 विकेट ले चुके हैं। जिस आयरिश टीम का वो हिस्सा हैं, उसने 2 बार की वर्ल्ड चैंपियन वेस्टइंडीज को हराकर उसे सुपर-12 तक नहीं पहुंचने दिया। एक और रिकॉर्ड उनके नाम है। नंबर 8 पर बैटिंग कर सेंचुरी लगाने वाले वे दुनिया के पहले क्रिकेटर हैं।

जब पंजाब में थे, तब पढ़ाई में अव्वल थे। समर वेकेशन्स में क्रिकेट का शौक हुआ। पंजाब की तरफ से अंडर 15 और अंडर 17 खेला। जब अंडर 19 में मौका नहीं मिला तो दो टारगेट लेकर आयरलैंड चले गए। आयरलैंड की नेशनल टीम के एस्टैबिलिश्ड प्लेयर हैं।

भास्कर के सवालों पर सिमी सिंह के जवाब...

क्रिकेट से लगाव कैसे पैदा हुआ? कहां से शुरुआत हुई?

क्रिकेट से जुड़ाव मोहाली (पंजाब) में हुआ। मेरा घर स्टेडियम के पास था। समर वेकेशन्स में शौकिया तौर पर एकेडमी में खेलना शुरू किया। इसके बाद इंटरेस्ट बढ़ने लगा। पंजाब की तरफ से बुच्ची बाबू और जेपी अत्रे मेमोरियल टूर्नामेंट खेला। अंडर-15 और अंडर-17 में सिलेक्शन हो गया।

पंजाब या इंडिया की बजाय आयरलैंड जाने का फैसला क्यों किया?

पंजाब से अंडर-19 में मुझे मौका नहीं मिल सका। मुझे क्रिकेट ही खेलना था, लेकिन आयरलैंड जाने का मेरे पास कोई दूसरा तरीका नहीं था। लिहाजा, स्टूडेंट वीजा लेकर आयरलैंड पहुंचा। मैंने सोच लिया था कि प्रदर्शन के दम पर वहां की टीम में जगह बनाउंगा।

आयरलैंड कैसे पहुंचे और वहां तक पहुंचने का सफर कैसा रहा?

मेरा एक दोस्त जो भारत में मेरे साथ खेलता था, वो आयरलैंड गया था। एक दिन हमारी फोन पर बात हुई। उसने ही सजेस्ट किया कि मैं आयरलैंड आकर किस्मत आजमाऊं। मैंने भी सोचा कि एक बार कोशिश करने में कोई हर्ज नहीं है। यहां क्लब क्रिकेट का सिस्टम मुझे अच्छा लगा। आयरलैंड की टीम 2007 का ODI वर्ल्ड कप खेली थी। ये देखकर मन और पक्का हो गया कि अब यहीं से क्रिकेट खेलना है।

मैं स्टूडेंट वीजा पर 2006 में आयरलैंड गया। वहां क्लब क्रिकेट से शुरुआत की। एक क्लब के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। करीब 10 साल क्लब क्रिकेट खेला। फिर 2017 में न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे डेब्यू किया। क्लब और फिर आयरिश A टीम के लिए अच्छा परफॉर्मेंस ही वो वजह थी, जिसके चलते मैं नेशनल टीम में जगह बना सका।

शुरुआत आपने बैटिंग से की, लेकिन सिलेक्शन बतौर बॉलर हुआ?

जी, मैंने बल्लेबाजी से ही शुरुआत की थी। जब मैं आयरलैंड आया तो पता चला यहां 4-5 महीने ही क्रिकेट का सीजन होता है। इसके बाद काफी वक्त बचता था। मेरा घर भी क्लब के पास ही था। अकेले बैटिंग प्रैक्टिस मुश्किल होती है। बॉलिंग पर भी फोकस करने लगा। इसमें इतना निखार आया कि खूब विकेट मिलने लगे।

यहां स्पिनर्स की कमी है इसलिए मैंने स्पिनर बनने का ही फैसला किया। बॉलिंग तो मैं भारत में भी करता था, लेकिन इतनी नहीं कि स्पेशलिस्ट बॉलर ही बन जाऊं।

किस भारतीय क्रिकेटर को आदर्श मानते हैं? बॉलिंग में किसे फॉलो करते हैं?

सचिन…वो तो सबके आइडियल हैं। क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर को देख कर ही क्रिकेट की शुरुआत की। उनकी 1999 वर्ल्ड कप की परफॉरमेंस मेरे लिए इंस्पिरेशन बन गई। मुझे पाकिस्तानी के ऑफ-स्पिनर सकलैन मुश्ताक बहुत पसंद थे। मैं भी ऑफ-स्पिन करता था। शुरुआत में मैं उनके एक्शन को कॉपी करने की कोशिश करता था। धीरे-धीरे मैंने अपना बॉलिंग एक्शन डेवलप किया।

अब अफगानिस्तान के राशिद खान से मेरी बातचीत होती रहती है। उनसे मिले टिप्स से अपनी बॉलिंग ज्यादा इम्प्रूव कर पाता हूं। अब तो मैं ऑफ और लेग स्पिन दोनों कर लेता हूं।

जब इंडिया के खिलाफ मैच खेलते हैं तो कैसा फील होता है?

इंडिया के अगेंस्ट खेलता हूं तो स्पेशल फीलिंग होती है, क्योंकि इंडिया में मेरा जन्म हुआ है। इंडिया के साथ मेरा मैच स्पेशल होता है। एक्स्ट्रा मोटिवेशन होता है। आप अगर इंडिया के खिलाफ मैच में अच्छा करते हैं तो आपको खास पहचान मिलती है। इंडिया के खिलाफ मैच हमेशा मेरे लिए बड़ा होता है।

इंडिया से नहीं खेल पाने की कसक अभी भी है?

मेरा शुरू से ही यही लक्ष्य था कि इंटरनेशनल खेलना है। मैं लकी हूं कि मुझे इंटरनेशनल खेलने का मौका मिला। बहुत से प्लेयर्स को यह मौका नहीं मिल पाता है। मैंने भारत में मौका नहीं मिलने पर दूसरा रास्ता चुना। यहां मुझे इंटरनेशनल खेलने का मौका मिला है। अब खुश हूं।

सिमी सिंह पंजाब के रहने वाले हैं।
सिमी सिंह पंजाब के रहने वाले हैं।

टी-20 वर्ल्ड कप में भारत को कहां देख रहे हैं?

इंडियन टीम हमेशा अच्छी होती है। कोई भी टूर्नामेंट खेलती है तो वह सबकी फेवरेट होती है। हां, पिछले कुछ ICC टूर्नामेंट उसके लिए अच्छे नहीं रहे। ऐसे में उस पर प्रेशर होगा। सुपर-12 में देखा जाए तो इंडिया का ग्रुप कुछ आसान है। ऐसे में मेरा मानना है कि इंडिया सेमीफाइनल तक तो जरूर जाएगी। मुझे नहीं लगता है कि ग्रुप स्टेज में भारतीय टीम को कोई परेशानी आएगी।

वेस्टइंडीज को हराया जो कि 2 बार की वर्ल्ड चैंपियन है, ड्रेसिंग रूम में क्या चल रहा था?

वेस्टइंडीज के साथ मुकाबला काफी प्रेशर वाला था, क्योंकि ये क्वालिफाइंग मैच था। इससे पहले हम एक मैच जिम्बाब्वे से हार चुके थे। ऐसे में क्वालिफाई करने के लिए ये मैच जीतना जरूरी था। मैच से पहले तैयारी और प्लानिंग की। अच्छी बॉलिंग से वेस्टइंडीज को कम टोटल पर रोक दिया। बाद में इसे चेज कर लिया।

आप क्रिकेटर हैं, फैमिली का बैकग्राउंड क्या है?

घर में मम्मी-पापा के अलावा सिर्फ मैं हूं। फैमिली का एजुकेशनल बैकग्राउंड है। परिवार में कई लोग टीचर और इंजीनियर हैं। स्पोर्ट्स से किसी का ताल्लुक नहीं है। जब मैं क्रिकेट से जुड़ा तो शुरुआत थोड़ी चैलेंजिंग रही, क्योंकि फैमिली मानती थी कि मुझे क्रिकेट के बजाय एकेडेमिक्स पर फोकस करना चाहिए। बाद में फैमिली ने सपोर्ट किया और नतीजा सबके सामने है। परिवार मेरे साथ आयरलैंड में नहीं है। मम्मी-पापा अब भी मोहाली में ही हैं।

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