अयाज मेमन की कलम से / पृथ्वी शॉ मामले को बीसीसीआई ने अच्छे तरीके से नहीं लिया



BCCI didn't handle Prithvi Shaw's doping matter properly says Ayaz Memon
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BCCI didn't handle Prithvi Shaw's doping matter properly says Ayaz Memon

  • बीसीसीआई हमेशा ओलिम्पिक में शामिल न होने की वजह से नाडा के अंतर्गत आने से बच जाता था
  • पृथ्वी शॉ के केस के बाद पहली बार खेल मंत्रालय को बीसीसीआई को भी नाडा के अंतर्गत लाने का मौका मिला

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2019, 09:06 AM IST

नई दिल्ली. पृथ्वी शॉ के डोपिंग मामले को बेहतर तरीके से नहीं देखने के बाद बीसीसीआई को नेशनल डोपिंग एजेंसी (नाडा) के अंतर्गत आना पड़ा। इस साल जून में खेल मंत्री किरण रिजिजू ने कहा था कि बोर्ड जिस एजेंसी से डोप कराता है, वह मान्य नहीं है। उन्होंने वाडा को इसकी जानकारी दी। बीसीसीआई ने भी नाडा के नियम मानने की बात कही। 

 

पृथ्वी शॉ डोप मामले को चार महीने तक दबाया गया। इस कारण उन पर आठ महीने का बैन लगाया गया। लेकिन शॉ पर बैन सिर्फ 4 महीने का लगा। इसका भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा। भारतीय टीम के क्रिकेटरों का डोप टेस्ट स्वीडन की एक कंपनी करती थी और यह सीधे बीसीसीआई के अंडर में थी। इससे बीसीसीआई के पास खिलाड़ियों को डोप में पकड़ने जाने के बाद सजा देने का अधिकार था। लेकिन अब नाडा सभी खिलाड़ियों की जांच करेगा। 

 

बीसीसीआई कभी नहीं मानता था खेल मंत्रालय की बात
खेल मंत्रालय द्वारा दक्षिण अफ्रीका की महिला और पुरुष टीम का वीजा रिजेक्ट किए जाने के बाद बोर्ड पर नाडा के अंतर्गत आने का दबाव बढ़ गया। पिछले काफी दशक से क्रिकेट के पदाधिकारी खेल मंत्रालय की बातों को नहीं मान रहे थे और डोप फ्री माहौल की बात कह रहे थे। इसके अलावा वे खुद को स्वायत्त संस्था मान रहे थे। देश के सभी संघ खेल मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं। क्रिकेट ओलिम्पिक में भी शामिल नहीं है और वह इंडियन ओलिम्पिक एसोसिएशन से भी बाहर है। इस कारण वह इससे बचता रहा। 

 

ओलिम्पिक गेम न होने का था बहाना

बीसीसीआई में पिछले तीन दशकों में काफी पैसा आया। इस कारण उसे काफी मजबूती मिली। उसने वाडा को भी अपने स्टार खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी के रेंडम टेस्ट के लिए मना कर दिया था। इससे खिलाड़ियों को सुरक्षा को खतरा बताया गया था। रोजर फेडरर, माइकल फेल्प्स, उसैन बोल्ट भी डोप के लिए आ जाते थे। क्रिकेट ओलिम्पिक खेल नहीं था। इस कारण वह इससे बच जाता था। 

 

लेकिन खेलों में बढ़ती डोपिंग के कारण यह मामला बढ़ गया। इससे बीसीसीआई भी बाहर नहीं था। शॉ के केस ने खेल मंत्रालय को और मजबूती दी। नाडा को आने वाले समय में अच्छा करना होगा। उसके लैब और विशेषज्ञ क्वालिटी के नहीं हैं। इसे हमेशा बीसीसीआई ने मुद्दा बनाया। खेल मंत्रालय को इसे जल्द से जल्द सुधारना होगा। नहीं तो इसका कोई मतलब नहीं रहेगा। 

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