श्रीसंत ने कहा- पुलिस की यातना से बचने के लिए कबूल की थी स्पॉट फिक्सिंग की बात

4 वर्ष पहले
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  • श्रीसंत ने कहा, दलालों ने उन्हें स्पॉट फिक्सिंग में घसीटने की कोशिश की, लेकिन वे इसमें फंसे नहीं
  • पूर्व क्रिकेटर की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील ने बुकी से मल्लायम में हुई बातचीत का अनुवाद पेश किया

नई दिल्ली. पूर्व भारतीय क्रिकेटर शांताकुमारन श्रीसंत ने स्पॉट फिक्सिंग मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सफाई पेश की। सुनवाई के दौरान श्रीसंत ने कहा कि उन्होंने दिल्ली स्पेशल सेल (पुलिस) की यातना से बचने के लिए 2013 में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में कथित स्पॉट फिक्सिंग की बात कबूल की थी। लाइफटाइम का बैन झेल रहे एस श्रीसंत को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। शीर्ष न्यायालय ने मामले की सुनवाई 20 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई से मांगा जवाब
श्रीसंत ने जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच को बताया कि दलालों ने उन्हें स्पॉट फिक्सिंग में घसीटने की कोशिश की थी, लेकिन वे इसमें फंसे नहीं थे। श्रीसंत की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने उनकी इस बात को साबित करने के लिए श्रीसंत और बुकी (सटोरिए) के बीच मल्लायम में हुई बातचीत का अनुवाद कोर्ट को बताया।

 

खुर्शीद ने कहा कि श्रीसंत पर तौलिया के जरिए स्पॉट फिक्सिंग करने का आरोप है, लेकिन मैदान पर हर खिलाड़ी तौलिया रखता है। अदालत ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से श्रीसंत की इस बात पर और पूर्व खिलाड़ी द्वारा दिए गए दस्तावेजों पर जबाव देने को कहा है। कोर्ट ने सवाल किया कि स्पॉट फिक्सिंग के बारे में संपर्क किए जाने पर उन्होंने बीसीसीआई को तुरंत यह बात क्यों नहीं बताई थी? जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने कहा कि इस पूरे मामले में श्रीसंत का आचरण अच्छा नहीं था।

 

2015 में निचली अदालत से बरी हुए थे श्रीसंत
निचली अदालत ने 2015 में श्रीसंत को कथित स्पॉट फिक्सिंग में आपराधिक मामले से बरी कर दिया था। हालांकि, बाद में केरल हाई कोर्ट ने श्रीसंत पर लगाए गए लाइफटाइम बैन को बहाल कर दिया। श्रीसंत ने हाई कोर्ट के उसी फैसले को चुनौती दी है। श्रीसंत ने अपनी अर्जी में निचली अदालत के फैसला का हवाला देते हुए कहा है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से उन पर लगाया गया जीवन भर का प्रतिबंध बहुत कठोर है। ऐसा भी कोई सबूत नहीं है कि जिससे यह साबित हो पाए कि वे किसी अवैध गतिविध में लिप्त थे।