IPL में भाइयों की दो जोड़ी मालामाल:कभी मैगी खाकर गुजारा करने वाले पंड्या बंधुओं को मिले 23.25 करोड़ रु., चाहर भाइयों की झोली में 19.25 करोड़ रु.

नई दिल्ली6 महीने पहले

IPL 2022 दो परिवारों के लिए बड़ी खुशियां लेकर आया है। दो भाइयों की जोड़ी ने मिलकर 42.5 करोड़ कमा लिए। चेन्नई सुपर किंग्स ने ऑलराउंडर दीपक चाहर को 14 करोड़ में अपनी टीम से जोड़ा। वहीं, उनके भाई राहुल चाहर को पंजाब किंग्स ने 5.25 करोड़ में खरीदा। चाहर ब्रदर्स को चेन्नई और पंजाब की फ्रेंचाइजी 19.25 करोड़ रुपए देंगी।

वहीं, हार्दिक पंड्या के बड़े भाई क्रुणाल पंड्या को लखनऊ सुपर जायंट्स ने 8.25 करोड़ रुपए में खरीदा। हार्दिक पंड्या को पहले ही अहमदाबाद की टीम 15 करोड़ रुपए में अपनी टीम का कप्तान बना चुकी है।

कभी पैसे की कमी के कारण सिर्फ मैगी खाते थे पंड्या ब्रदर्स
हार्दिक और क्रुणाल पिछले कुछ सालों से भारतीय क्रिकेट के साथ-सथ IPL में भी खूब नाम कमा रहे हैं, लेकिन अगर उनके बीते दिनों की बात करें तो उन्होंने अपनी जिंदगी में काफी बुरा वक्त भी देखा है। हार्दिक के पिता फाइनेंसिंग का काम करते थे, लेकिन इससे ज्यादा कमाई नहीं हो पाती थी। 2010 में उन्हें हार्ट अटैक आया, खराब होती सेहत के कारण वे नौकरी नहीं कर पाए। इस वजह से घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई।

पिता की तबीयत खराब हुई तो हार्दिक और क्रुणाल 400-500 रुपए कमाने के लिए पास के गांव में क्रिकेट खेलने जाते थे। इतना ही नहीं हार्दिक-क्रुणाल ने वो दिन भी देखे हैं जब उन्हें अच्छा खाना भी नसीब नहीं होता था। हार्दिक ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि उस बुरे वक्त में वो केवल मैगी खाते थे, क्योंकि उनके पास ज्यादा पैसे नहीं होते थे।

चाहर परिवार ने ठान लिया कि बेटों को क्रिकेटर ही बनाएंगे

चाहर बंधुओं के क्रिकेटर बनने की कहानी बहुत ही रोचक है। एयरफोर्स से रिटायर्ड पिता लोकेंद्र चाहर दोनों के कोच हैं। इनका रिश्ता भी बेहद उलझा हुआ और खास है। दीपक और राहुल चचेरे भाई होने के साथ-साथ मौसेरे भाई भी हैं। दीपक चाहर के अंकल और उनकी मौसी ने आपस में शादी की है। इसके चलते उनकी मौसी ही उनकी आंटी भी बन गईं।

आगरा के नारौल गांव के रहने वाले लोकेंद्र सिंह चाहर दीपक चाहर के पिता हैं। वो एयरफोर्स से रिटायर्ड हैं। जब वे 2004 में श्रीगंगानगर में तैनात थे तो वो बेटे दीपक को गली में क्रिकेट खेलते देखते थे। उन्होंने देखा कि दीपक दूसरे लड़कों से अच्छा खेलता है। गेंदबाजी अच्छी है। बस वहीं से उन्होंने बेटे को क्रिकेटर बनाने की ठान ली। इसके बाद वो दीपक को एक क्रिकेट एकेडमी में ले गए। 20 दिन दीपक ने वहां पर ट्रेनिंग ली।

उन्हें लगा कि एकेडमी में जो मेहनत वो कर रहा है। उससे वो इंडिया टीम नहीं पहुंच पाएगा। ऐसे में उन्होंने खुद ही दीपक को ट्रेंड करने की ठानी। लोकेंद्र खुद क्रिकेट खेलना चाहते थे, लेकिन घर से सपोर्ट नहीं मिला था। ऐसे में उन्होंने बेटे और भतीजे को क्रिकेटर बनाने का सोचा।

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