KL के कमाल का राज:टी-20 में 263 तक पहुंच जाता है स्ट्राइक रेट, टेस्ट में 33% गेंदें छोड़ देते हैं; किस्मत ने खोला कप्तानी का रास्ता

7 महीने पहले

वांडरर्स टेस्ट में कोहली की जगह कप्तानी कर रहे केएल राहुल ने पहली पारी में अर्धशतक लगा दिया है। इससे पहले 5 टेस्ट में वे 2 शतक और एक अर्धशतकीय पारी खेल चुके हैं। एक वक्त ऐसा भी था, जब राहुल बुरे फॉर्म से जूझ रहे थे। करीब 2 साल तक वे टेस्ट टीम से बाहर भी रहे, लेकिन ऐसा क्या हुआ जो वे वापस लौटे और कप्तानी के मुकाम तक पहुंच गए।

पिछले एक साल के करियर पर नजर डालें तो राहुल ने अपनी बल्लेबाजी और टेम्परामेंट में कुछ बदलाव किए हैं। कुछ साथ किस्मत का भी मिला और परफॉर्मेंस का भी। आइए जानते हैं कि KL के कमाल का राज क्या है...

सबसे पहले 2 साल का बुरा दौर
30 अगस्त 2019... ये वह तारीख थी, जो केएल राहुल के अब तक के बुरे दौर की आखिरी तारीख कही जा सकती है। इससे पहले राहुल टेस्ट मैच में फ्लॉप चल रहे थे। 7 टेस्ट मैचों में एक भी फिफ्टी नहीं थी। दोनों पारियों की बात करें तो 7 बार 10 से नीचे के स्कोर पर आउट हो गए और इनमें भी 2 बार शून्य पर। वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई इन पारियों के बाद केएल राहुल करीब 2 साल टेस्ट टीम में वापसी नहीं कर पाए।

अब बात शानदार गुजरे पिछले साल की
2021 में केएल राहुल ने 5 टेस्ट मैच में 2 शतक और एक अर्धशतक लगाया। वनडे की बात करें तो पिछले साल खेले 3 मैचों में एक सेंचुरी और एक फिफ्टी लगाई है। पिछले साल टी-20 इंटरनेशनल में उन्होंने 4 अर्धशतक लगाए हैं यानी तीनों फॉर्मेट में जबरदस्त परफॉर्म किया है।

क्या बल्लेबाजी में कुछ बदलाव किया है?
पिछले कई इंटरव्यू में बार-बार केएल राहुल से यही सवाल किया गया है कि क्या उन्होंने अपने बल्लेबाजी स्टाइल में कोई बदलाव किया है। हर बार उनका जवाब यही रहा है कि कोई खास बदलाव नहीं किया है। कुछ जगहों पर छोटे-मोटे इम्प्रूवमेंट की जरूरत थी, जो कि उन्होंने किए। राहुल का मानना है कि जब आप स्कोर करते हैं तो सब कुछ सही रहता है और जब स्कोर नहीं करते हैं तो टेक्नीक और माइंडसेट जैसी चीजें सामने आने लगती हैं। राहुल ने कहा कि फर्क केवल सोच का होता है। आपकी स्किल्स नहीं बदलती हैं, लेकिन वक्त के साथ आप गेम को बेहतर तरीके से पढ़ना सीख जाते हैं।

टेस्ट से वनडे और फिर टी-20 में ट्रांसफॉर्मेशन कैसे?
आंकड़ों पर नजर डालें तो वनडे में पिछले साल राहुल ने 144 तक के स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं। टी-20 में बल्लेबाजी के दौरान उनका स्ट्राइक रेट 263 तक भी पहुंचा। वहीं, टेस्ट में उन्होंने गजब का ट्रांसफॉर्मेशन दिखाया। 2015 से 2017 के बीच राहुल तेज गेंदबाजों की 22.6% गेंदें छोड़ देते थे, जबकि 2021 में उन्होंने 33% तेज गेंदों को छुआ ही नहीं। यहां उनका स्ट्राइक रेट भी 31 के आसपास रहा है। यह दिखाता है कि उन्होंने हर फॉर्मेट में खुद को किस तरह से ढाला।

एक फॉर्मेट से दूसरे फॉर्मेट में आसानी से ढलने के बारे में केएल राहुल ने खुद कहा था, 'मैं हर सीरीज और हर मैच के साथ सीख रहा हूं और बढ़ रहा हूं। मैं हर फॉर्मेट में बेहतर तरीके से ट्रांसफॉर्म कर सकता हूं, लेकिन यह मेरे लिए बहुत बड़ा चैलेंज है।'

IPL ने राहुल को चमका दिया
किंग्स 11 पंजाब से खेलने वाले केएल राहुल को इस फ्रेंचाइजी ने 2020 में कप्तानी सौंपी। तब से केएल राहुल टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर्स में शामिल रहे हैं। 2020 में वे 670 रन के साथ पहले पायदान पर थे। उन्होंने एक शतक और 5 अर्धशतक जड़े थे। 2021 में वे तीसरे पायदान पर रहे और टीम की ओर से टॉप स्कोरर रहे। दोनों सीजन में उनकी टीम छठे पायदान पर रही, पर केएल राहुल की बल्लेबाजी और कप्तानी की हर जगह तारीफ हुई। यही वो दो सीजन थे, जिसमें राहुल की बल्लेबाजी देखकर उन्हें मिस्टर 360 का खिताब दिया जाने लगा, यानी ग्राउंड के हर हिस्से में स्कोर करने वाला।

कप्तानी का किस्मत कनेक्शन
टी-20 में राहुल की परफॉर्मेंस देखते हुए BCCI ने टी-20 वर्ल्ड कप के बाद उन्हें टीम इंडिया का उप-कप्तान बना दिया। इंग्लैंड दौरे से पहले उन्हें वाइस कैप्टन बना दिया गया। तब कोहली ने भी उनकी पैरवी करते हुए कहा था कि राहुल को सभी फॉर्मेट में एक कप्तान के तौर पर डेवलप किया जाए। इंग्लैंड के खिलाफ वन-डे और टी-20 सीरीज जून 2022 में होनी है।

इंग्लैंड के खिलाफ राहुल टेस्ट टीम में शामिल नहीं थे, लेकिन ओपनर शुभमन गिल चोटिल हो गए। उनकी जगह पृथ्वी शॉ को भेजने की मांग उठी, पर उन्हें नहीं भेजा गया। राहुल को किस्मत का साथ मिला और वे बतौर ओपनर टीम में शामिल कर लिए गए। इस मौके को राहुल ने पूरी तरह भुनाया। नॉटिंघम में 84 रन और लॉर्ड्स में 129 रन की पारी खेली। नतीजा यह हुआ कि उन्हें साउथ अफ्रीका दौरे में शामिल किया गया।

यहां विराट कैप्टन थे और रोहित शर्मा वाइस कैप्टन। यहां भी रोहित के चोटिल होने के बाद राहुल को वाइस कैप्टन बना दिया गया। दूसरे टेस्ट से पहले कोहली की पीठ में खिंचाव आ गया और राहुल कप्तान बना दिए गए। किस्मत से मिले इस मौके को भी राहुल ने भुनाया और पहली पारी में फिफ्टी लगा दी।