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इंग्लैंड की रोटेशन पॉलिसी समझ से परे:गावस्कर ने कहा- इंग्लिश टीम अपनी पुरानी पॉलिसी छोड़ चुकी, लेकिन वही अपनाकर अब भारत-पाकिस्तान मजबूत हो रहे

अहमदाबादएक महीने पहले
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सुनील गावस्कर ने 6 मार्च को इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू के 50 साल पूरे किए। इस मौके पर BCCI के सचिव जय शाह ने उन्हें अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में कैप सौंपी। - Dainik Bhaskar
सुनील गावस्कर ने 6 मार्च को इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू के 50 साल पूरे किए। इस मौके पर BCCI के सचिव जय शाह ने उन्हें अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में कैप सौंपी।

भारतीय टीम के खिलाफ 3-1 से टेस्ट सीरीज हारने के बाद इंग्लैंड की रोटेशन पॉलिसी की जमकर आलोचना हो रही है। इसी बीच पूर्व भारतीय लीजेंड सुनील गावस्कर ने भी इस पॉलिसी को समझ से परे बताया। उन्होंने कहा कि इंग्लिश टीम अपनी पुरानी पॉलिसी छोड़ चुकी है, जिसमें काउंटी खेलने वाले अनुभवी प्लेयर ही सिलेक्ट होते थे। अब यह पॉलिसी भारत और पाकिस्तान जैसे देश अपनाकर मजबूत हो रहे हैं।

सीरीज हारने के साथ ही इंग्लैंड वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप से भी बाहर हो गई। उसने बीच में ही फॉर्म में चल रहे जोस बटलर और मोइन अली को घर वापस भेज दिया था। जॉनी बेयरस्टो को शुरुआत में सीरीज में चुना ही नहीं गया था। इस पूरी रोटेशन पॉलिसी के चलते इंग्लैंड टीम पहला टेस्ट 227 रन से जीतने के बावजूद सीरीज नहीं जीत सकी।

पहले 5-6 साल काउंटी खेलने के बाद मौका मिलता था
गावस्कर ने इंडिया टुडे से कहा, ‘यदि आप सीरीज पर नजर डालेंगे तो जो रूट और बेन स्टोक्स ही एक दो पारी में कमाल दिखा सके हैं। इनके अलावा किसी भी खिलाड़ी में कॉन्फिडेंस नजर नहीं आया। पहले के जमाने में इंग्लैंड में खिलाड़ियों का सिलेक्शन काउंटी में 5-6 साल खेलने और 10-15 शतक लगाने के बाद होता था। अब यह प्रोसेस भारत और पाकिस्तान जैसे देशों ने अपना ली है। इन देशों में पहले 17 से 20 साल के खिलाड़ी भी डेब्यू कर लेते थे।’

भारत के खिलाफ चौथे टेस्ट में रन लेते इंग्लिश कप्तान जो रूट और युवा प्लेयर ओली पोप।
भारत के खिलाफ चौथे टेस्ट में रन लेते इंग्लिश कप्तान जो रूट और युवा प्लेयर ओली पोप।

गावस्कर ने कहा, ‘इंग्लिश प्लेयर डैन लॉरेंस, ओली पोप और डॉम सिबली युवा जरूर हैं, लेकिन अनुभवी नहीं। उनके पास वह टेक्निक नहीं थी, जो कांउटी क्रिकेट खेलने के बाद आती है। जो रूट अकेले ही खेलते रहे और वे आखिर कब तक लड़ेंगे। जब बॉल घूमने लगी तो वे भी स्ट्रगल करते नजर आए। उन्हें भी पता नहीं चला कि टर्निंग ट्रेक पर बॉल को कैसे खेला जाए।’

बायो-बबल में रहना आसान नहीं, लेकिन खिलाड़ी
उन्होंने कहा, ‘इंग्लैंड की यह रोटेशन पॉलिसी और वर्कलोड मैनेजमेंट समझ से परे है। मैं मानता हूं कि बायो-बबल में रहना आसान नहीं है। मैं भी सितंबर से इसी तरह रह रहा हूं। लेकिन जब आप देश के लिए खेल रहे होते हैं, तो आपको हर हालात में खेलना आना चाहिए। यदि आप इन सबके लिए तैयार नहीं रहेंगे तो आप अपना बेस्ट नहीं दे पाएंगे।’

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