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IPL के 5 वन सीजन वंडर:चोट, पारिवारिक कलह, ड्रग्स के कारण पटरी से उतरा इनका करियर; बाद में कई मौके मिले फिर भी रहे फेल

नई दिल्ली2 महीने पहले

IPL दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग है। इसमें अच्छा प्रदर्शन खिलाड़ियों को न सिर्फ अमीर बनाता है बल्कि इंटरनेशनल क्रिकेट में रुतबा भी दिलाता है। रविचंद्रन अश्विन, रवींद्र जडेजा, जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या जैसे कई सितारे रहे जिन्होंने IPL में शानदार खेल की बदौलत टीम इंडिया में जगह पक्की की। दूसरी ओर कई ऐसे भी खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने IPL के एक सीजन में अच्छा खेल दिखाया, लेकिन इसके बाद फेल होते चले गए। चोट, पारिवारिक झगड़े, आत्मविश्वास में कमी और ड्रग्स विवाद सहित कई कारण रहे जिन्होंने इन युवा खिलाड़ियों के करियर को पूरी तरह खिलने नहीं दिया। ऐसे ही 5 सितारों पर नजर...

स्वप्निल असनोदकर, राजस्थान रॉयल्स-2008
राजस्थान रॉयल्स की टीम IPL के पहले सीजन में चैम्पियन बनी थी। गोवा के 24 साल के बल्लेबाज स्वप्निल असनोदकर को ग्रीम स्मिथ के साथ ओपनिंग का जिम्मा दिया गया था। उनकी भूमिका थी कि वे आते ही आक्रामक शॉट लगाएं और अपनी टीम को तेज शुरुआत दें। असनोदकर ने टीम मैनेजमेंट को निराश भी नहीं किया और 9 मैचों में 311 रन बना दिए। उनका स्ट्राइक रेट 133.47 का रहा। असनोदकर को अगले सीजन में भी मौका मिला, लेकिन वे पहले सीजन वाला प्रदर्शन नहीं दोहरा सके। साउथ अफ्रीका में हुए 2009 सीजन में वे 8 मैचों में 98 रन ही बना सके। इससे उनका आत्मविश्वास काफी कमजोर हुआ। 2010 में वे सिर्फ दो मैच खेल सके और 2011 में उन्हें सिर्फ 1 मैच खेलने का मौका मिला।

पॉल वल्थाटी, किंग्स इलेवन पंजाब-2011

पॉल चंद्रशेखर वल्थाटी 2009 से 2013 तक पांच सीजन में IPL का हिस्सा रहे। 2009 और 2010 में वे राजस्थान की टीम का हिस्सा थे और 2011 से 2013 तक वे किंग्स इलेवन पंजाब में थे, लेकिन वल्थाटी सिर्फ 2011 में ही चमक बिखेर पाए। इस सीजन में वल्थाटी ने 14 मैचों में एक शतक और दो अर्धशतक की मदद से 463 रन बनाए। उस सीजन में उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ 63 गेंदों में शतक जमाया था। उसके डेक्कन चार्जर्स के खिलाफ हुए अगले मैच में वल्थाटी ने 47 गेंदों पर 75 रनों की पारी खेली थी।

इस मैच में उन्होंने 29 रन देकर चार विकेट लिए थे, लेकिन इसके अगले सीजन में वे पूरी तरह फ्लॉप रहे और 6 मैचों में सिर्फ 30 रन बना सके। 2013 में उन्हें एक मैच खेलने का मौका ही मिला। वे इसमें सिर्फ 6 रन ही बना सके और दोबारा कभी IPL का मैच नहीं खेल सके। कलाई की चोट को वल्थाटी के करियर में सबसे बड़ी बाधा माना गया। वे इससे पूरी तरह नहीं उबर सके।

सौरभ तिवारी, मुंबई इंडियंस

झारखंड के सौरभ तिवारी ने IPL में 69 मैच खेले और 1379 रन बनाए हैं, लेकिन इसमें अगर 2010 सीजन को हटा दें तो उनके नाम कुछ खास नहीं बचता। तिवारी ने 2010 में मुंबई इंडियंस के लिए 16 मैचों में 419 रन बनाए थे, लेकिन इसके बाद वे किसी भी सीजन में 200 रन नहीं बना सके। 2020 में उन्होंने 7 मैचों में सिर्फ 42 रन बनाए। 2010 की सफलता के बाद सौरभ तिवारी पर स्टारडम न संभाल पाने के आरोप लगे। साथ ही वे काफी ओवरवेट भी हो गए थे

मनप्रीत गोनी, चेन्नई सुपरकिंग्स

​​​​​​2008 में IPL के पहले सीजन की शुरुआत में मनप्रीत गोनी को पहचान इसलिए मिली कि उनका उपनाम गोनी सुनने में टीम के कप्तान धोनी जैसा लगता था। लेकिन, सीजन खत्म होने तक उनकी शोहरत एक फाइटर मीडियम फास्ट बॉलर की हो चुकी थी। गोनी ने 2008 में 16 मैचों में 17 विकेट लिए। वे उस सीजन में उपविजेता चेन्नई की ओर से टॉप विकेट टेकर थे। गोनी ने इसके बाद 28 मैच और खेले और 21 विकेट ही ले पाए। इसके बाद वे 6 सीजन और खेले लेकिन, किसी में भी 7 से ज्यादा विकेट नहीं ले पाए। गोनी लगातार पारिवारिक उलझनों में फंसे रहे। 2013 में मनप्रीत गोनी की मां ने उन पर हत्या की धमकी देने का आरोप लगाया। इसके बाद उनका करियर ढलान पर आ गया।

राहुल शर्मा, पुणे वॉरियर्स इंडिया

2011 में पुणे वॉरियर्स की टीम फ्लॉप रही थी और 10 टीमों में से नौवें स्थान पर रही थी। लेकिन, टीम के लेग स्पिनर राहुल शर्मा ने जोरदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने 14 मैचों में 16 विकेट लिए थे। लेकिन, राहुल इसके बाद किसी में 10 विकेट भी नहीं ले पाए। 2012 में उनका नाम मुंबई में हुई एक रेव पार्टी में भी सामने आया था। राहुल को बेल्स पाल्सी नाम की बीमारी भी झेलनी पड़ी। यह चेहरे के नर्व से जुड़ी बीमारी है। इस बीमारी में चेहरे की मांसपेशियों पर नियंत्रण कम हो जाता है। राहुल ने फील्ड के बाहर कई मुश्किलों का सामना किया और इन्हें उनके करियर को पटरी से उतारने के पीछे की बड़ी वजह माना जाता है। उन्होंने इन सबसे उबरने की बहुत कोशिश की है। इस बार उनकी वापसी की उम्मीद थी, लेकिन किसी भी टीम ने उन पर बोली नहीं लगाई।

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