वर्ल्ड कप / पहली बार चार देश के खिलाड़ी ट्रेकर डिवाइस पहनेंगे, ताकि रियल टाइम फिटनेस डेटा मिले

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  • टूर्नामेंट में आईसीसी 360 डिग्री रिप्ले के लिए 32 कैमरे लगाएगा
  • वर्कलोड मेजरमेंट और बल्लेबाजी सुधारने के लिए टेक्नीक का प्रयोग

May 21, 2019, 08:16 AM IST

खेल डेस्क. नई टेक्नोलॉजी आने के बाद क्रिकेट वर्ल्ड कप ने पहले की तुलना में काफी तरक्की कर ली है। इसमें टेक्नोलॉजी की शुरुआत 1992 वर्ल्ड कप से होती है, जब थर्ड अंपायर आया। 2008 में डीआरएस आने के बाद कई फैसलों को बदला जा सका। 2015 वर्ल्ड कप में पहली बार आया एलईडी स्टंप। इससे अंपायर को रनआउट और स्टंपिंग के फैसले देने में मदद मिली। यह टेक्नोलॉजी तो पिछले वर्ल्ड कप की हुईं।

 

इस बार खिलाड़ी अपनी जर्सी के अंदर यह ट्रैकर डिवाइस (वेस्ट) पहनेंगे। इसकी मदद से मैदान पर खिलाड़ियों के मूवमेंट को मॉनीटर करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह उनका वर्कलोड ट्रैक करेगी। इसकी मदद से फिजियो और ट्रेनर यह जान सकेंगे कि किस खिलाड़ी को आराम की जरूरत है और कौन इंजर्ड हुआ है। मैनचेस्टर यूनाइटेड, बार्सिलोना जैसे फुटबॉल क्लब इसका इस्तेमाल करते हैं।

 

ट्रैकर डिवाइस पर श्रीलंका के बोर्ड ने 52 लाख रुपए खर्चे
भारतीय खिलाड़ियों के सामने दिसंबर में इस डिवाइस का डेमो भी दिया गया। इसमें बताया गया था कि यह रिजल्ट का आकलन कैसे करती है। बीसीसीआई ने ब्रिटेन की कंपनी स्टेटस्पोर्ट्स से डील की है। वहीं, श्रीलंका के क्रिकेट बोर्ड ने पिछले साल मार्च में इस डिवाइस का इस्तेमाल अपने खिलाड़ियों के लिए करना शुरू किया था। श्रीलंका के बोर्ड ने इस पर 52 लाख रुपए से ज्यादा खर्च किए।

 

स्पिनर से निपटने के लिए 18 मैदान पर स्पिन बॉलिंग मशीन
मेजबान इंग्लैंड ने वर्ल्ड कप में भारत के युजवेंद्र चहल और अफगानिस्तान के राशिद खान से निपटने के लिए स्पिन बॉलिंग मशीन (मेरलिन मशीन) की मदद ली है। उसने अपनी सभी 18 काउंटी टीमों के मैदान पर स्पिन बॉलिंग मशीन लगवा दी थीं। ताकि उसके बल्लेबाज रिस्ट स्पिनर के खिलाफ महारत हासिल कर सकें। पहले ये मशीनें प्रमुख मैदानों पर ही होती थीं।

 

पहली बार स्पाइडरकैम का इस्तेमाल होगा
पहली बार कवरेज के लिए स्पाइडरकैम का इस्तेमाल होगा। हर मैच के कवरेज के लिए 32 कैमरे लगाए हैं। आठ अल्ट्रा-मोशन हॉक-आई कैमरे के अलावा फ्रंट और रिवर्स व्यूस्टंप कैमरे का भी इस्तेमाल होगा। आईसीसी पहली बार सभी 10 वॉर्मअप मैच का भी लाइव टेलीकास्ट करेगा। पहली बार 360 डिग्री रिप्ले भी दिखाएंगे। सभी वैन्यू के विजुअल्स के लिए ड्रोन कैमरा और बगी कैमरा का प्रयोग होगा।

 

इंग्लैंड में प्रैक्टिस के लिए स्पिन बॉलिंग मशीन लगी थी
इस बार कई देशों के अलावा आईसीसी भी टेक्नोलॉजी के मामले में एक कदम आगे बढ़ गया है। भारत, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और इंग्लैंड खिलाड़ियों की मदद के लिए वर्कलोड मेजरमेंट की टेक्नीक लेकर आए हैं। जबकि मेजबान इंग्लैंड की तैयारी तो एक साल पहले तब शुरू हो गई थी, जब उसने अपनी सभी काउंटी टीमों के मैदान पर प्रैक्टिस के लिए स्पिन बॉलिंग मशीन लगा दी थी।

 

पहली बार सभी 10 वॉर्मअप मैचों का लाइव कवरेज
वहीं, क्रिकेट की सबसे बड़ी संस्था ने सबसे बड़ा बदलाव मैच कवरेज को लेकर किया है। आईसीसी मैच के कवरेज के लिए 32 कैमरे का इस्तेमाल करेगा। ताकि 360 डिग्री रिप्ले दिखा सके। आईसीसी पहली बार वर्ल्ड कप के सभी 10 वॉर्मअप मैचों का लाइव कवरेज भी करेगा।

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