9 साल में भारत का सबसे खराब वर्ल्ड कप:2012 के बाद पहली बार सेमीफाइनल में नहीं पहुंचे, मिलकर भी कुछ नहीं कर पाए धोनी-कोहली और शास्त्री

6 महीने पहले

न्यूजीलैंड की अफगानिस्तान के खिलाफ जीत के साथ ही टीम इंडिया के सेमीफाइनल में क्वालिफाई करने का सपना सिर्फ एक सपना बनकर ही रह गया। इस मैच में कीवी टीम हारती तो ही भारत टॉप-4 में आगे बढ़ सकता था, लेकिन ऐसा देखने को नहीं मिला। NZ ने न सिर्फ मैच जीता बल्कि सेमीफाइनल का टिकट भी कटा लिया।

सुपर-12 में शुरू सुपर-12 में खत्म
पिछले कुछ सालों में टीम इंडिया के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए टीम को खिताबी जीत के लिए फेवरेट माना जा रहा था, लेकिन टीम का सफर सुपर-12 में शुरू होकर सुपर-12 तक ही सीमित रह गया। पहले ही मैच में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान ने भारत को 10 विकेट से मात दी। इस हार के गम से पूरा देश उबर भी नहीं पाया था कि अगले ही मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को 8 विकेट से हरा दिया।

लगातार दो मैचों में मिली हार के साथ ही भारतीय टीम के ऊपर सेमीफाइनल से बाहर होने का खतरा मंडराने लगा था। विराट एंड कंपनी ने अफगानिस्तान और स्कॉटलैंड को हराकर आशा की एक किरण को जलाए रखा, लेकिन बात अब सिर्फ अपनी जीत की नहीं थी। टीम को NZ बनाम AFG मैच के नतीजे पर निर्भर रहना पड़ा। अब न्यूजीलैंड की जीत के बाद भारत की उम्मीदों को दीया भुज गया।

2012 के बाद आया पहला मौका
साल 2012 के बाद ये पहला मौका रहा जब भारतीय टीम टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी। टी-20 वर्ल्ड कप के अभी तक के इतिहास में ये चौथा मौका रहा जब भारत सेमीफाइनल में नहीं पहुंच सका। इस टूर्नामेंट से पहले 2009, 2010 और 2012 में भी टीम और फैंस के हाथों मायूसी लगी थी।

2009 में भी डिफेंड नहीं कर सके थे खिताब
साल 2009 में इंग्लैंड की सरजमीं पर टी-20 WC खेला गया था और भारतीय टीम डिफेंडिंग चैंपियन के तौर पर टूर्नामेंट में उतरी थी। वर्ल्ड कप में भारत को ग्रुप-ए में बांग्लादेश और आयरलैंड के साथ रखा गया था और भारत दोनों मैच जीतने में सफल रहा। BAN को टीम ने 25 रनों से हराया और IRE के खिलाफ 8 विकेट से जीत दर्ज की। इसके बाद सुपर-8 के मैचों में टीम के हाथों निराशा के अलावा कुछ नहीं लगा। धोनी की कप्तानी वाली टीम को सुपर-8 के तीनों मैचों में हार का मुंह देखने पड़ा। वेस्टइंडीज ने भारत को 7 विकेट, मेजबान इंग्लैंड ने 3 रन और साउथ अफ्रीका ने 12 रनों से हराया।

2010 में किया रिपीट टेलिकास्ट
2010 का टी-20 WC वेस्टइंडीज में खेला गया था और टीम IPL-3 के तुरंत बाद टूर्नामेंट में हिस्सा लेनी पहुंची थी। टीम के सभी खिलाड़ी बेहतरीन फॉर्म में थे और टीम को टूर्नामेंट जीतने के लिए फेवरेट माना जा रहा था। धोनी की कप्तानी वाली टीम को ग्रुप सी में रखा गया और टीम में पहले मैच में अफगानिस्तान को 7 और साउथ अफ्रीका को 14 रनों से हराकर सुपर-8 में क्वालिफाई किया। हालांकि सुपर-8 में टीम जीत के सफर को कायम नहीं रख सकी और 2009 की तरह फिर से तीनों मैच हार गई। भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया ने 49 रन, वेस्टइंडीज ने 14 रन और श्रीलंका ने 5 विकेट से हराया।

2012 में काफी करीब से गंवाया मौका
2012 में धोनी एंड कंपनी को टी-20 WC खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन टीम फिर टॉप-4 में जगह नहीं बना सकी। ग्रुप-ए के मैचों में भारत ने अफगानिस्तान को 23 और इंग्लैंड को 90 रनों से हराया। इसके बाद सुपर 8 के पहले मैच में कंगारू टीम ने भारत को 9 विकेट से पटखनी दी, लेकिन टीम इंडिया ने जोरदार वापसी करते हुए पाकिस्तान को 8 विकेट से हराया। भारत ने आखिरी मैच में साउथ अफ्रीका को भी 1 रन से मात दी, लेकिन खराब रन रेट के चलते सेमीफाइनल में जगह पक्की नहीं कर सकी।

धोनी-शास्त्री और कोहली की जोड़ी फ्लॉप
वर्ल्ड कप से पहले BCCI ने बहुत ही उम्मीदों के साथ एमएस धोनी को टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में शामिल किया था। फैंस भी बड़ी आस लगाए बैठे थे कि धोनी-शास्त्री और कोहली की जोड़ी इस बार वर्ल्ड कप लेकर घर लौटेगी। मगर नतीजा हमारे सामने हैं। टूर्नामेंट जीतना तो दूर टीम अंतिम 4 में भी नहीं पहुंच सकी। कोहली की कप्तानी में भारत एक बार फिर से ICC की ट्रॉफी जीतने से वंचित रहा और शास्त्री भी अपने आखिरी इवेंट से खाली हाथ लौटे।

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