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भास्कर इंटरव्यू- अनीषा बानो:स्कूल से आने के बाद घर का काम करती, फिर बकरी चराने जाती थी; आराम के समय मैं क्रिकेट की प्रैक्टिस करती थी

नई दिल्ली13 दिन पहले

कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो आप वह हर चीज हासिल कर सकते हैं, जो आप चाहते हैं। ये साबित कर दिखाया है राजस्थान महिला अंडर-19 टीम की खिलाड़ी अनीषा बानो ने। राजस्थान के छोटे से गांव कानासर की अनीषा का चयन पिछले दिनों चैलेंजर क्रिकेट ट्रॉफी के लिए हुआ।

अनीषा का शुरुआती दौर काफी मुश्किल भरा रहा है। वो सुबह स्कूल जातीं। वहां से आने के बाद घर का पूरा काम करती थीं। इसके बाद बकरी भी चराने जाती थीं। इसके बाद जो आराम करने के लिए समय मिलता था, उसमें क्रिकेट की प्रैक्टिस करतीं। आइए जानते हैं कि अनीषा अपने सपनों के लिए कैसे उड़ान भर रही हैं...

सवालः आपने क्रिकेट ही क्यों चुना। इसकी शुरुआत कैसे हुई?
जवाबः 2013 में फैसला किया था कि क्रिकेटर बनूंगी। इसके बाद से मैंने प्रैक्टिस शुरू कर दी। हर दिन की दिनचर्या तय कर ली। सुबह 7 बजे स्कूल जाती थी। वहां से आने के बाद घर का पूरा काम करती थी। इसके बाद एक से दो घंटे बकरी चराने के लिए जाती थी। वहां से आने के बाद जो समय आराम करने के लिए होता था, उस दौरान क्रिकेट की प्रैक्टिस करती थी।

सवालः आप गांव में किसके साथ प्रैक्टिस करती थीं? क्या कभी कोई दिक्कत नहीं आई?
जवाबः मैं भाइयों के साथ क्रिकेट की प्रैक्टिस करती। उन्होंने कभी मना नहीं किया, बल्कि वे मुझे क्रिकेट की हर बात समझाते थे। पहले मैं स्पिन गेंद डालती थी, लेकिन मैंने झूलन गोस्वामी और जसप्रीत बुमराह को बॉल डालते हुए देखा। उसके बाद से मैं भी मीडियम पेसर बन गई। यह मैंने सोशल मीडिया से सीखा। मैच के दौरान अगर कोई कैच छूट जाता था तो भाई लोग समझाते थे और कहते थे कि अगली बार कैच अच्छे से पकड़ना।

सवालः गांव में आप कहां प्रैक्टिस करती थीं?
जवाबः मैंने खाली खेतों में क्रिकेट की प्रैक्टिस की। शुरुआती दिनों में बल्ला खरीदने को पैसे नहीं होते थे। सब मिलकर पैसे जोड़ते थे, तब नया बल्ला मिलता था। रविवार को 5 से 6 घंटे प्रैक्टिस करते थे। 30 गज के घेरे वाले ग्राउंड में फिफ्टी भी लगाई है।

सवालः क्या आपका ऐसे लोगों से भी सामना हुआ जो आपको खेलने से रोकते थे?
जवाबः जब मैं खेलने जाती थी तो गांव के लोग कहते थे कि तू लड़की है, क्यों खेलने जा रही हो। शर्म नहीं आती। मम्मी-पापा को भी बोला। यहां तक कहा कि लड़कों के साथ खेलती हो। बस मैं सही समय का इंतजार कर रही थी कि समय आएगा तो उन लोगों को जवाब दूंगी। एक बार गलती हाेने पर भइया ने बाहर कर दिया था। इसको लेकर मैं बहुत अपसेट हो गई थी। फिर कोच ने मुझे समझाया।

सवालः अब आपका अगला टारगेट क्या है?
जवाबः जयपुर आई तो मुझे कुछ नहीं पता था। ट्रायल में करीब 600 लड़कियां आई थीं। इसमें मैंने भी ट्रायल दिया। ट्रायल में दो से तीन ओवर डाले। उसमें विकेट भी मिला। कैंप में शामिल होने के बाद बहुत कुछ सीखने को मिला। मैं अभी अंडर-19 राजस्थान टीम से खेलकर आई हूं। छोटा-छोटा टारगेट रखती हूं और उसको पूरा कर आगे बढ़ती हूं। अब मुझे इंडियन टीम की ओर से खेलना है।

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