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कश्मीर विलो की बल्लों की डिमांड बढ़ी:सिंगापुर-कश्मीर की लकड़ी से बने बल्लों से एशिया कप-टी20 वर्ल्ड कप में लगेंगे चौके-छक्के

2 महीने पहले
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श्रीलंका में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीमित ओवरों की सीरीज के दौरान मेजबान देश के क्रिकेटर्स कश्मीर विलो से बने बल्ले से खेल रहे हैं। पिछले साल अक्टूबर में हुए टी20 वर्ल्ड कप में ओमान के बल्लेबाजों ने पहली बार यहां के बैट का इस्तेमाल किया था। उसके बार से इंटरनेशनल बाजार में कश्मीर विलो क्रिकेट बैट की मांग बढ़ रही है।

ओमान और श्रीलंका के अलावा अब अफगानिस्तान, बांग्लादेश, यूएई, बहरीन और पाकिस्तान के क्रिकेटर्स भी यहां के बैट का इस्तेमाल कर रहे हैं। Gr8 स्पोर्ट्स के मालिक फौजुल कबीर बताते हैं, ‘अब टेस्ट में भी हमारे बैट का इस्तेमाल होगा। एशिया कप और टी20 वर्ल्ड कप में भी कश्मीर विलो से बने बैट से क्रिकेटर्स चौके-छक्के लगाते नजर आएंगे।’

हर साल 100 करोड़ के 35 लाख बैट निर्यात होते हैं
कश्मीर में बनने वाले बल्लों की कीमत 300 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक होती है। सबसे सस्ते बल्लों में कश्मीरी लकड़ी के ही हैंडल लगते है।
फौजुल कबीर ने बताया, ‘कश्मीर इंग्लैंड के बाद क्रिकेट बैट बनाने का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है, लेकिन निर्यात की जाने वाली लगभग 90% सामग्री अनब्रांडेड और अधूरे बल्ले के आकार में होती है। कश्मीर हर साल लगभग 100 करोड़ रु. के 35 लाख बैट का निर्यात करता है।’
कोविड के बाद खेल गतिविधियां शुरू होने से बैट निर्माताओं को राज्यों के अलावा देश के बाहर से भी रिकॉर्ड संख्या में ऑर्डर मिल रहे हैं। यहां बल्ले का कारोबार प्री-कोविड लेवल पर पहुंच गया है।

अनंतनाग के एक बैट निर्माता ने कहा, ‘पहले बैट पूरी तरह से कश्मीर विलो की लकड़ी से बनते थे। अब बल्ले का हैंडल सिंगापुर से आने वाली लकड़ी से बनाते हैं, जिसमें पर्याप्त लचीलापन होता है। मुख्य हिस्सा कश्मीरी विलो से बनता है। रबर दक्षिण भारत से आती है।’