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कोटला स्टेडियम में जेटली की प्रतिमा का विरोध:बेदी बोले- गूगल बता देगा कि चापलूसों से घिरे जेटली के वक्त DDCA में करप्शन हुआ

नई दिल्ली5 महीने पहले

दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में अरुण जेटली की प्रतिमा लगाए जाने से नाराज पूर्व स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (DDCA) छोड़ दी है। बेदी का कहना है कि जेटली चापलूसों से घिरे रहते थे। वे काबिल नेता जरूर थे, लेकिन एक गूगल सर्च से पता चल जाएगा कि जेटली के वक्त DDCA में कितना करप्शन हुआ। नाकामियों को भुलाया जाता है, इस तरह प्रतिमा लगाकर नाकामियों का जश्न नहीं मनाया जाता।

भारत के लिए 67 टेस्ट में 266 विकेट ले चुके पूर्व क्रिकेटर बेदी ने जेटली के बेटे और मौजूदा DDCA अध्यक्ष रोहन जेटली को चिट्‌ठी लिखकर ये बातें कही हैं। उन्होंने कोटला स्टेडियम में अपने नाम का स्टैंड हटाने की भी मांग की है।

बेदी ने यह खत तब लिखा है, जब 28 दिसंबर को अरुण जेटली के जन्मदिन के मौके पर 6 फीट ऊंची प्रतिमा कोटला स्टेडियम में लगाई जानी है। 700 किलोग्राम वजनी इस प्रतिमा को अहमदाबाद में बनाया गया है और इसे एयरलिफ्ट कर दिल्ली लाया जाएगा।

जेटली 14 साल DDCA प्रेसिडेंट रहे

भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रहे जेटली 1999 से 2013 तक DDCA के अध्यक्ष रहे। उनके बाद रजत शर्मा DDCA प्रेसिडेंट बने। उन्होंने इस्तीफा दिया तो जेटली के बेटे रोहन को बिना विरोध अध्यक्ष चुना गया था।

बेदी बोले- स्टेडियम का नाम बदला तो लगा कि कुछ अच्छा होगा
जेटली का पिछले साल 24 अगस्त को निधन हो गया था। इसके बाद 12 सितंबर 2019 को फिरोज शाह कोटला स्टेडियम का नाम बदलकर अरुण जेटली स्टेडियम कर दिया गया था। इस बारे में बेदी ने रोहन जेटली को लिखी चिट्‌ठी में कहा, 'जब जल्दबाजी में कोटला स्टेडियम का नाम बदलकर अरुण जेटली स्टेडियम किया गया, तब उम्मीद थी कि कुछ अच्छा होगा, लेकिन मैं गलत था। अब सुन रहा हूं कि वहां उनकी एक प्रतिमा लगाई जाएगी। मैं इससे बिल्कुल राजी नहीं हूं।'

बेदी ने जेटली के बेटे को चिट्ठी में लिखीं 8 तीखी बातें

1. बेदी ने लिखा, 'अरुण जेटली तब DDCA के रोजमर्रा के काम के लिए हाथ से लोगों को चुनते थे, तब भी इस पर मेरा विरोध किसी से छिपा हुआ नहीं था।'
2. उन्होंने कहा, 'याद है एक बार मैं जेटली की मीटिंग से उठकर बाहर आ गया था, तब जेटली एक गुंडे टाइप व्यक्ति को बाहर नहीं कर पा रहे थे, जो बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहा था। मैं बेहद जिद्दी, पुराने ख्यालात का और देश पर फख्र महसूस करने वाला भारतीय हूं, जिसे जेटली के वक्त चापलूसों के दरबार में शामिल कर लिया था।'
3. वे बोले, 'मैं इस लड़ाई को अगली पीढ़ी तक नहीं ले जाना चाहता हूं। लेकिन, मुझे सिखाया गया है कि अगर मैं कोई फैसला लेता हूं तो मुझे उसके साथ खड़े रहना चाहिए। ये परिवारवाद की खामियां भी हैं। आपको उन फैसलों के लिए आरोप सहने पड़ रहे हैं, जिनका हिस्सा आप नहीं रहे और आप अपनी गैरमौजूदगी का हवाला भी नहीं दे सकते।'
4. बेदी ने लिखा, 'मैं देख रहा हूं कि आपकी लीडरशिप में भी DDCA के दरबारी चलन में चापलूसी शामिल है। जब जल्दबाजी में फिरोजशाह कोटला का नाम बदल कर जेटलीजी के नाम पर रखा गया था, तब मुझे लगा था कि कोटला में कुछ अच्छा बदलाव होगा, लेकिन मैं कितना गलत था। अब जेटलीजी की प्रतिमा लगेगी। मैं इस बात से खुश नहीं हूं।'
5. पूर्व क्रिकेटर ने कहा, 'मैं सब्र रखने वाला सहनशील व्यक्ति हूं। मुझे इस पर गर्व है। लेकिन DDCA में जो कुछ चल रहा है, उससे मैं डरा हुआ हूं। मजबूरी में यह कदम उठा रहा हूं। आपसे गुजारिश है कि स्टेडियम में मेरे नाम से जो स्टैंड है, उसे हटा दिया जाए। मेरी मेंबरशिप भी फौरन खत्म करें।'

6. उन्होंने कहा, 'मैंने यह फैसला सोच-समझकर लिया है। मुझे ऐसा नहीं लगता कि मेरे सम्मान को ठेस पहुंचाई जा रही है, लेकिन सम्मान के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उन सभी का शुक्रिया जिन्होंने मुझे और मेरे खेल को सम्मान दिया। अब मैं यह सम्मान वापस कर रहा हूं। मैं यह बताना चाहता हूं कि रिटायरमेंट के 40 साल बाद भी मैंने अपनी वैल्यूज कायम रखी हैं।'
7. बेदी ने लिखा, 'महज एक गूगल सर्च से पता चल जाएगा कि अरुण जेटली के वक्त DDCA भ्रष्टाचार से घिरा हुआ था। आप (अरुण जेटली के बेटे) भी एक वकील होने के नाते ये जानते होंगे कि पैसे के गलत इस्तेमाल के केस अभी भी अदालतों में पेंडिंग हैं। मुझे बताया गया है कि अरुण जेटलीजी एक काबिल राजनीतिज्ञ थे। ऐसे में उनको याद करने की जगह संसद है, न कि स्टेडियम।
8. उन्होंने कहा, 'हो सकता है कि वे एक अच्छे क्रिकेट फैन हों, पर क्रिकेट को चलाने का उनका तरीका संदेहपूर्ण है और इसमें काफी कुछ किए जाने की जरूरत है।'

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