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ट्रक ड्राइवर के बेटे ने जीता ब्रॉन्ज:शादी के बाद 1 साल पत्नी से दूर रहकर की तैयारी, वजन कम था फिर भी जिद से बने वेटलिफ्टर

बर्मिंघम4 महीने पहलेलेखक: राजकिशोर
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कहते हैं कि अभाव कई बार कुछ बड़ा करने की प्रेरणा देता है। इस कथन को सच कर दिखाया है ट्रक ड्राइवर के बेटे गुरुराजा पुजारी ने। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को दूसरा मेडल दिलाया है। वेटलिफ्टर गुरुराजा ने मेंस 61 KG कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता। गोल्ड मलेशिया के अजनील मोहम्मद ने और सिल्वर पापुआ न्यू गिनी के मोरिया बारू ने जीता है।

जीत के बाद गुरुराजा ने भास्कर से कहा, 'कॉमनवेल्थ की तैयारी के लिए मैं शादी के तुरंत बाद पटियाला चला गया। एक साल हो चुका है, अब तक पत्नी से नहीं मिला हूं। अब उन्हें तोहफे में मेडल दूंगा।'

उन्होंने आगे कहा कि उनकी खेलों में रुचि थी। वे कुश्ती करना चाहते थे। दो साल तक कुश्ती की भी, लेकिन फिर कोच की सलाह पर वेटलिफ्टिंग शुरू की। यहां भी चुनौती यह थी कि उनका वजन काफी कम था। ऐसे में उन्हें लगा कि शायद वे वेटलिफ्टिंग नहीं कर पाएंगे, लेकिन कोच की प्रेरणा पर उन्होंने ठान लिया कि उन्हें वेटलिफ्टर ही बनना है और देश के लिए मेडल जीतना है।

नहीं होते थे डाइट और सप्लीमेंट्स के लिए पैसे गुरुराजा का जन्म 15 अगस्त 1992 को कर्नाटक के उडीपी जिले के कुंडापुरा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम महाबाला पुजारी है जो एक ट्रक ड्राइवर हैं। गुरुराजा पांच भाइयों में सबसे छोटे हैं। पी गुरुराजा का बचपन काफी अभावों में बीता, लेकिन इस वजह से खेल के प्रति उनका लगाव कभी कम नहीं हुआ। पिता ने कर्ज लिया, ताकि गुरुराजा की ट्रेनिंग में बाधा न आए।

गुरुराजा ने 2010 में वेटलिफ्टिंग करियर शुरू किया था। उन्हें शुरू में कई परेशानियां आईं। वेटलिफ्टिंग जैसे खेल में डाइट और सप्लीमेंट्स की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इसके लिए उनके पास पैसे नहीं होते थे, लेकिन उनके पिता ने उन्हें हिम्मत नहीं हारने दी और बेटे को आगे बढ़ने का हौसला देते रहे। उनके परिवार में आठ लोग हैं।

गुरुराजा पुजारी ने 2017 में हुए गोल्डकोस्ट कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में 56 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीता था।
गुरुराजा पुजारी ने 2017 में हुए गोल्डकोस्ट कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में 56 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीता था।

सुशील कुमार से काफी प्रभावित थे
गुरुराजा पुजारी की प्रारंभिक पढ़ाई कर्नाटक से ही हुई है। हाई स्कूल के उन्होंने कर्नाटक के उजीरे में मौजूद एसडीएम कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। भारतीय वेटलिफ्टर शुरुआत में पहलवान सुशील कुमार से बहुत प्रभावित थे। उनसे प्रेरणा लेकर ही उन्होंने रेसलिंग से अपने करियर की शुरुआत की थी लेकिन बाद में कोच राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें वेटलिफ्टिंग करने की सलाह दी। जिसके बाद गुरुराजा पुजारी के रूप में भारत को एक बेहतरीन वेटलिफ्टर मिला।

गुरुराजा पुजारी की उपलब्धियां
2016 में गुरुराजा पुजारी ने साउथ एशियन गेम्स में 56 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। 2018 में हुए गोल्डकोस्ट कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में 56 किलोग्राम भार वर्ग में सिल्वर पदक जीता।2018 में हुए कामनवेल्थ गेम्स में गुरुराजा ने भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता। 2021 के कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में 61 किलोग्राम भार वर्ग में गुरुराजा पुजारी ने रजत पदक जीता था।