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प्रधानमंत्री मोदी ने मिल्खा से की बातचीत:PM ने फ्लाइंग सिख के जल्द ठीक होने की कामना की; लगातार गिरते ऑक्सीजन लेवल के चलते कल ICU में भर्ती कराया गया था

चंडीगढ़2 महीने पहले
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पूर्व भारतीय स्प्रिंटर मिल्खा सिंह ने 1956 के मेलबर्न ओलिंपिक में भाग लिया। इसके लिए उन्हें भारत सरकार ने 2001 में पद्मश्री से सम्मानित किया था। - Dainik Bhaskar
पूर्व भारतीय स्प्रिंटर मिल्खा सिंह ने 1956 के मेलबर्न ओलिंपिक में भाग लिया। इसके लिए उन्हें भारत सरकार ने 2001 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कोरोना संक्रमित पूर्व भारतीय लीजेंड स्प्रिंटर मिल्खा सिंह से बातचीत की और उनसे स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। PM ने कहा कि मिल्खा टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने वाले एथलीटों को आशीर्वाद देने और प्रेरित करने के लिए जल्द ही वापस आएंगे।

91 साल के पूर्व स्प्रिंटर मिल्खा की गुरुवार को फिर से तबीयत खराब हो गई थी। उनका ऑक्सीजन लेवल लगातार गिरता जा रहा था। इस कारण मिल्खा को गुरुवार रात ही चंडीगढ़ के PGIMER के कोविड अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। यह जानकारी चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के प्रवक्ता प्रोफेसर अशोक कुमार ने दी।

पिछले हफ्ते कोरोना पॉजिटिव आए थे मिल्खा और निर्मला
मिल्खा सिंह और 82 वर्षीय पत्नी उनकी पत्नी निर्मल कौर पिछले हफ्ते ही कोरोना पॉजिटिव हुए थे। इसके बाद दोनों को मोहाली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार के लोगों के आग्रह पर उनकी वहां से छुट्टी करवा ली गई थी और कुछ दिनों पहले ही वे घर लौटे थे। तब से उनका घर पर ही इलाज चल रहा था। अब हालत खराब होने पर उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

निर्मला का भी मोहाली के अस्पताल में इलाज चल रहा
मिल्खा की पत्नी निर्मल कौर भारतीय वॉलीबाल टीम की पूर्व कप्तान रही हैं। उनका इलाज अभी भी मोहाली में ही चल रहा है। निर्मला की हालत में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है, वे भी ICU में ही एडमिट हैं। वहीं, मिल्खा और निर्मला के बेटे गोल्फर जीव मिल्खा सिंह दुबई में रहते हैं। वे भी घर लौट आए हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता जल्द घर लौटेंगे।

पाकिस्तान में हुआ था जन्म
20 नवंबर 1929 को गोविंदपुरा (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है) के एक सिख परिवार में मिल्खा सिंह का जन्म हुआ था। खेल और देश से बहुत लगाव था, इस वजह से विभाजन के बाद भारत भाग आए और भारतीय सेना में शामिल हो गए। कुछ वक्त सेना में रहे लेकिन खेल की तरफ झुकाव होने की वजह से उन्होंने क्रॉस कंट्री दौड़ में हिस्सा लिया। इसमें 400 से ज्यादा सैनिकों ने दौड़ लगाई। मिल्खा 6वें नंबर पर आए।

भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया
1956 में मेलबर्न में आयोजित ओलिंपिक खेल में भाग लिया। कुछ खास नहीं कर पाए, लेकिन आगे की स्पर्धाओं के रास्ते खोल दिए। 1958 में कटक में आयोजित नेशनल गेम्स में 200 और 400 मीटर में कई रिकॉर्ड बनाए। इसी साल टोक्यो में आयोजित एशियाई खेलों में 200 मीटर, 400 मीटर की स्पर्धाओं और राष्ट्रमंडल में 400 मीटर की रेस में स्वर्ण पदक जीते। उनकी सफलता को देखते हुए, भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया।

इस तरह मिला फ्लाइंग सिख नाम

मिल्खा सिंह पाकिस्तान में आयोजित एक दौड़ के लिए गए। इसमें उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। उनके प्रदर्शन को देखकर पाकिस्तान के जनरल अयूब खान ने उन्हें 'द फ्लाइंग सिख' नाम दिया। 1960 को रोम में आयोजित समर ओलिंपिक में मिल्खा सिंह से काफी उम्मीदें थीं। 400 मीटर की रेस में वह 200 मीटर तक सबसे आगे थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने अपनी गति धीमी कर दी। इससे वह रेस में पिछड़ गए और चौथे नंबर पर रहे। 1964 में उन्होंने एशियाई खेल में 400 मीटर और 4x400 रिले में गोल्ड मेडल जीते।

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