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पान बेचने वाले ने भारत को दिलाया पहला मेडल:संकेत सरगर ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता सिल्वर, 9 सालों से कर रहे वेटलिफ्टिंग

बर्मिंघम4 महीने पहले
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पिता के साथ पान बेचने वाले संकेत सरगर ने कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए पहला मेडल जीत लिया है। वेटलिफ्टिंग के 55 किलो वेट कैटेगरी में उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। संकेत के पिता महादेव सरगर महाराष्ट्र में सांगली के मेन मार्केट में पान और चाय की दुकान चलाते हैं। संकेत भी पापा के कामों में हाथ बंटाते हैं।

सांगली जिला वेटलिफ्टिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील नाईक ने भास्कर को बताया कि संकेत 2013 से वेटलिफ्टिंग कर रहे हैं। वह जिला कोच मयूर के पास ट्रेनिंग कर रहे हैं। संकेत के पापा सांगली सिटी में मेन चौक पर चाय और पान का ठेला लगाते हैं। संकेत दो भाई और एक बहन हैं। उनकी छोटी बहन भी खेलो इंडिया गेम्स में महाराष्ट्र के लिए गोल्ड जीत चुकी है।

2017 से ही शुरू कर दी कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी
सुनील नाईक ने बताया कि संकेत ने 2017 से ही कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी शुरू कर दी थी। इस दौरान सुनील कोच मयूर के पास रोजाना सात घंटे अभ्यास करते थे। इसके बाद उनका सेलेक्शन नेशनल कैंप के लिए हो गया। फिर उन्होंने मुख्य कोच विजय शर्मा के मार्गदर्शन में तैयारी की। पिछले साल वर्ल्ड चैंपियन में भी संकेत देश के लिए सिल्वर मेडल जीत चुके हैं।

संकेत का परिवार सांगली में मौजूद दुकान में चाय और स्नैक्स भी बेचता है।
संकेत का परिवार सांगली में मौजूद दुकान में चाय और स्नैक्स भी बेचता है।

चोट से परिवार और कोच परेशान
बर्मिंघम में संकेत से गोल्ड मेडल की उम्मीद थी। कोच मयूर ने बताया कि उन्हें गोल्ड की आस थी। जब वे 248 किलो मीटर वेट उठा कर टॉप पर चल रहे थे, तो गोल्ड की उम्मीद पूरी होती नजर आ रही थी, पर फाइनल वेट उठाने के दौरान उनके हाथ में इंजरी हो गई। कोच ने दैनिक भास्कर से बताया कि हम भगवान से यही प्रार्थना करते हैं कि उन्हें गंभीर चोट न हो। पिता माहदेव सरगर ने भी कहा कि हमारी चिंता बेटे की चोट को लेकर है। बेटे ने मेडल जीतकर हमारा सिर ऊंचा कर दिया है।

संकेत ने स्नैच के पहले ही प्रयास में 107 किग्रा का वजन उठाया। उन्होंनें दूसरे प्रयास में 111 किग्रा और तीसरे प्रयास में 113 किग्रा का वजन उठाया। क्लीन एंड जर्क के पहले प्रयास में संकेत ने 135 KG का वजन उठाया, लेकिन उनका दूसरा और तीसरा प्रयास विफल रहा। वे 248 KG के साथ दूसरे स्थान पर रहे। मलेशियाई वेटलिफ्टर ने कुल 249 KG वेट उठाया और सिर्फ 1 KG के अंतर से संकेत से आगे निकल गए।

कॉमनवेल्थ गेम्स, 2018 में भी 55 किलोग्राम भारवर्ग की वेटलिफ्टिंग में इस बार की ही तरह कार्बन कॉपी नतीजे रहे थे। उस बार भी मलेशिया ने गोल्ड, भारत ने सिल्वर और श्रीलंका ने ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा किया था। संकेत ने NIS पटियाला में रहकर वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग की है।

जिला प्रशासन की ओर से संकेत सरगर के माता-पिता को सम्मानित किया गया।
जिला प्रशासन की ओर से संकेत सरगर के माता-पिता को सम्मानित किया गया।

55 किलोग्राम भार वर्ग में नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हैं संकेत
संकेत के कोच विजय शर्मा हैं। संकेत ने 2013 में वेटलिफ्टिंग शुरू की। संकेत के पिता किसान हैं। परिवार में वेटलिफ्टिंग को लेकर सकारात्मक माहौल है। संकेत की छोटी बहन काजल भी वेटलिफ्टर हैं। 21 वर्षीय संकेत कोल्हापुर के शिवाजी विश्वविद्यालय में इतिहास के छात्र हैं।

पहले भी चैंपियन रह चुके संकेत
संकेत खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2020 और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2020 के चैंपियन थे। इसके साथ ही अब वह 55 किग्रा वर्ग में नेशनल रिकॉर्ड (स्नैच 108 किग्रा, क्लीन एंड जर्क 139 किग्रा और टोटल 244 किग्रा) होल्डर हैं। संकेत पहले सिंगापुर इंटरनेशनल 2022 में भी गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।

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