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झाड़ू लगाने वाले के बेटे ने जीता गोल्ड:जेरेमी बांस की गठरी से करते थे वेटलिफ्टिंग की प्रैक्टिस, पिता बॉक्सिंग के नेशनल प्लेयर रह चुके

बर्मिंघम4 महीने पहलेलेखक: राजकिशोर
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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को दूसरा गोल्ड मिला है। मीराबाई चानू के बाद जेरेमी लालरिनुंगा ने वेटलिफ्टिंग की 67 KG कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता है। 19 वर्षीय जेरेमी मिजोरम की राजधानी आइजोल के रहने वाले हैं। उन्होंने NIS पटियाला से ट्रेनिंग ली है। वेटलिफ्टर जेरेमी ने मुकाबले के दौरान चोटिल होने के बावजूद हार नहीं मानी और ​​​​​​सुनहरी कामयाबी हासिल की।

जेरेमी के कोच यू जोइता ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में बताया कि 9 साल की उम्र में उन्होंने जेरेमी लालरिनुंगा को पहली दफा देखा था। जोइता उनसे खासे प्रभावित हुए। उनको लगा कि इस लड़के में कुछ खास है और यह आने वाले वक्त में कुछ बहुत बड़ा कर सकता है। इसके बाद जेरेमी को लेकर कोच पुणे आ गए। शुरुआती दौर में जेरेमी ने कोच के साथ उनके घर पर रहकर ही ट्रेनिंग की। कोच ने बताया कि जेरेमी बचपन से ही काफी फुर्तीले थे। इसके अलावा उनका शरीर भी काफी लचीला था।

जेरेमी लालरिनुंगा अपने कोच के साथ।
जेरेमी लालरिनुंगा अपने कोच के साथ।

पिता ने झाड़ू उठाकर निभाई परिवार की जिम्मेदारी
कोच यू जोइता कहते हैं कि छोटी-छोटी बातों में भी जेरेमी तेजी दिखाते थे। वह किसी भी मामले में जोश की बजाय होश से काम लेते थे। जेरेमी शारीरिक कसरत ही नहीं बल्कि मानसिक कसरत करने में भी माहिर थे। जेरेमी बचपन में बांस की गठरी से अभ्यास करते थे। वो 5 भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं। चारों भाइयों ने हमेशा जेरेमी को खेल में पूरा समर्थन दिया। जेरेमी के पिता लालरिनुंगा स्टेट और नेशनल लेवल पर बॉक्सिंग में मेडल जीत चुके हैं। हालात बेहतर न होने के कारण लालरिनुंगा को PWD के सड़क निर्माण में झाडू मारने की नौकरी करने पड़ी।

जेरेमी अपने माता-पित के साथ।
जेरेमी अपने माता-पित के साथ।

जेरेमी के माता पिता को हिंदी-अंग्रेजी बोलनी नहीं आती। कल हुए मुकाबले में जेरेमी ने स्नैच में 140 और क्लीन एंड जर्क में 160 KG वेट उठाया। इस तरह उन्होंने कुल 300 KG वेट उठाया और गोल्ड मेडल अपने नाम किया। समोआ के वाइवापा आइओने (293 KG) ने सिल्वर जीता।

ये तस्वीर जेरेमी के बचपन की है। (दाएं से पहले)
ये तस्वीर जेरेमी के बचपन की है। (दाएं से पहले)

स्नैच के पहले और दूसरे प्रयास में जेरेमी का शानदार प्रदर्शन
जेरेमी ने स्नैच के अपने पहले प्रयास में 136 KG का वेट उठाया और गोल्ड मेडल पोजीशन पर आ गए। दूसरे प्रयास में उन्होंने 140 KG वेट उठाकर गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए अपनी पोजीशन और मजबूत कर ली। जेरेमी ने तीसरी कोशिश 143 KG वेट पर की, लेकिन इसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली।

जेरेमी ने 2011 में 9 साल की उम्र में वेटलिफ्टिंग करनी शुरू की थी।
जेरेमी ने 2011 में 9 साल की उम्र में वेटलिफ्टिंग करनी शुरू की थी।

चोट के बावजूद क्लीन एंड जर्क इवेंट में उतरे
भारतीय वेटलिफ्टर ने क्लीन एंड जर्क के अपने पहले अटेम्प्ट में 154 और दूसरे अटेम्प्ट में 160 KG वेट उठाया। तीसरी कोशिश में उन्होंने 164 KG का वेट ट्राय किया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने गोल्ड जीत लिया। क्लीन एंड जर्क के अपने पहले प्रयास के दौरान जेरेमी चोटिल हो गए। इसके बावजूद वे दो बार और लिफ्ट करने आए।

जेरेमी लालरिनुंगा 2018 यूथ ओलिंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट हैं। साथ ही उन्होंने 2021 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में भी गोल्ड जीता था। जेरेमी के कोच का नाम विजय शर्मा है। जेरेमी ने 9 साल की उम्र में वर्ष 2011 में वेटलिफ्टिंग करनी शुरू की थी। जेरेमी के पिता PWD कर्मचारी हैं। जेरेमी कुल 5 भाई-बहन हैं। वर्ष 2012 में जेरेमी का आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में चयन हुआ था। उन्होंने वर्ष 2016 में नेशनल कैंप जॉइन किया था।

प्रैक्टिस से ज्यादा वेट मेन मुकाबलों में उठाते रहे हैं जेरेमी
जेरेमी की मां हाउसवाइफ हैं। कोच ने दैनिक भास्कर को बताया कि मुकाबले के दौरान जेरेमी लालरिनुंगा को कॉमनवेल्थ गेम्स, 2022 के दौरान लगी चोट पर अधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। करियर की शुरुआत से ही वजन उठाने के दौरान जेरेमी के मसल्स में खिंचाव आ जाता है। हालांकि, कल खिंचाव अधिक नजर आया, लेकिन मसाज और एक्सरसाइज से वह जल्दी ठीक हो जाएंगे।

दरअसल किस्सा ये है कि जेरेमी शुरुआत से ही प्रैक्टिस सेशन में उठाए गए वजन से ज्यादा वेट मुख्य इवेंट में उठाते रहे हैं। जेरेमी चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा वजन उठाकर देश के लिए मेडल पक्का किया जाए।

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