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ग्रेट मैराथन रनर मो. फराह का खुलासा:मेरा असली नाम हुसैन अब्दी कहिन है, बचपन में मुझे सर्वेंट के तौर पर सोमालिया से ब्रिटेन लाया गया

एजेंसी5 महीने पहले
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दुनिया के महान मैराथन रनर और पूर्व ओलिंपिक चैंपियन मोहम्मद फराह ने अपने जीवन के बारे में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। 39 साल के पूर्व मैराथन रनर ने कहा- 'मैं वो नहीं हूं, आप जिस नाम से मुझे जानते हैं। इतना ही नहीं, मैं ब्रिटेन का मूल रहवासी भी नहीं हूं। मेरा असली नाम हुसैन अब्दी कहिन (Hussein Abdi Kahin) है और मैं सोमालीलैंड में जन्मा हूं।'

उन्होंने आगे कहा- '8 साल की उम्र में मुझे एक चाइल्ड सर्वेंट के तौर पर किसी और बच्चे के नाम पर ब्रिटेन लाया गया था।' फराह ने यह खुलासे BBC की डॉक्यूमेंट्री द रियल मोहम्मद फराह पर किए हैं। इससे पहले वे बताते रहे थे कि वे अपने पैरेंट्स के साथ रिफ्यूजी के तौर पर UK आए थे।

4 साल का था जब पिता मार दिए गए
ओलिंपिक गेम्स में ब्रिटेन को एथलेटिक्स का पहला गोल्ड मेडल दिलाने वाले इस दिग्गज धावक ने बताया कि जब मैं 4 साल का था तब मेरे पिता सोमालिया की गृह-युद्ध में मार दिए गए थे। मेरी मां और दो भाई सोमालीलैंड में रहते हैं, जिसे अब तक अंतरराष्ट्रीय मान्यता तक नहीं मिली है।

जब खाना मांगता था तो धमकाती थी
फराह ने चौंकाने वाले खुलासे करते हुए कहा है कि मुझे एक महिला ब्रिटेन लाई थी। उसने मुझसे यह कहा था कि वह मुझे रिश्तेदारों के साथ रहने ले जा रही है। उसने मुझे मेरा नाम मोहम्मद फराह बताया था। उसके पास फेक डॉक्यूमेंट थे, जिसमें मोहम्मद फराह लिखा था और सामने फोटो भी था।

आगे बताते हुए फराह ने कहा कि जब हम UK पहुंचे, तो उस महिला ने मुझसे मेरे रिश्तेदारों की कॉन्टेक्ट डिटेल वाला कागज लिया और फाड़ के फेंक दिया। उसने मुझे घर में काम करने और बच्चों की देखभाल करने के लिए मजबूर किया। जब मैं खाना मांगता था तो कहती थी कि अगर तुम अपने परिवार को दोबारा देखना चाहते हो तो शांत रहो। तब मैं खुद को बाथरूम में बंद कर लेता था और रोता रहता था।

सच बोलने के लिए बच्चों ने मोटिवेट किया
फराह ने कहा कि मुझे मेरे बच्चों ने सच बोलने के लिए मोटिवेट किया। उन्होंने बताया कि मैंने इस राज को इतने साल से छुपा रखा है। यह मुश्किल था क्योंकि आप इसका सामना नहीं करना चाहते हैं। अक्सर मेरे बच्चे पूछते थे कि पापा यह कैसे हुआ, तो मेरे पास जवाब नहीं होता था। जबकि मेरे पास असल में जवाब था। यही वजह है कि मैं आज अपनी असली स्टोरी बता रहा हूं, क्योंकि मैं नॉर्मल महसूस करना चाहता हूं।

एथलेटिक्स ने संभलने में मदद की
फराज के फिजिकल एजुकेशन टीचर एलन वॉटकिंसन उन्हें ट्रैक तक ले गए और उनकी प्रतिभा को पहचान दिलाई। फराह के बारे में वॉटकिंसन कहते हैं कि उसे एक ही भाषा समझ आती थी और वो थी ट्रैक की भाषा। फराह ने कहा कि एथलेटिक्स ने उन्हें हालात का सामना करने में मदद की। वॉटकिंसन ने फराह की ब्रिटिश सिटिजनशिप के लिए अप्लाई किया था। उन्हें 2000 में ब्रिटेन की सिटिजनशिप दी गई थी।

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