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अर्शदीप को मां ने बनाया यॉर्कर किंग:खुद साइकिल पर बैठाकर 13 KM ले जाती थीं, प्रैक्टिस खत्म होने तक वहीं बैठी रहतीं

4 महीने पहलेलेखक: राजकिशोर

भारत और साउथ अफ्रीका के बीच 9 जून से टी-20 सीरीज का आगाज होने वाला है। इस सीरीज के लिए पंजाब के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह का भी चयन हुआ है। अर्शदीप टीम में एकमात्र बाएं हाथ के पेसर हैं। नवंबर में टी-20 वर्ल्ड कप होने वाला है। ऐसे में उनके करियर और अब तक के उनके सफर को लेकर दैनिक भास्कर ने उनसे विशेष बातचीत की है। पढ़िए इंटरव्यू का प्रमुख अंश...

सवाल- आपको भारतीय टीम में चयन के लिए बहुत-बहुत बधाई, आपने क्रिकेट की शुरुआत कैसे की और आप क्रिकेट के अलावा और खेलों में क्यों नहीं गए?
जवाब- जब मैं छोटा था तो हमारे आसपास क्रिकेट का ही माहौल था। मेरा भी इस खेल के प्रति रुझान हुआ। जब घर वालों ने देखा तो उन्होंने मुझे एकेडमी में भेजा और वहीं से मेरी जर्नी की शुरुआत हुई।

सवाल- आपके पापा CISF में थे और जैसा आपके कोच ने बताया कि उनका एक शहर से दूसरे शहर ट्रांसफर होता रहता था। ऐसे में आप भी उनके साथ शहर बदलते थे या फिर आपने सारी ट्रेनिंग पंजाब में ही रहकर की?
जवाब- मेरी मां का इसमें सबसे ज्यादा सपोर्ट मिला। वो मुझे साइकिल पर बैठा के प्रैक्टिस के लिए ले जाया करती थीं। सुबह उठकर वो पहले सभी के लिए खाना बनातीं फिर चंडीगढ़ से 13 किलोमीटर दूर मुझे ले जातींbजब तक मैं प्रैक्टिस करता वो वहीं बैठी रहती थीं और शाम में मुझे लेकर वापस जाती थीं। 4 साल तक वो लगातार ऐसा करती रहीं।

सवाल- जैसा कि आपने बताया कि आपके पापा CISF में और उन्हें समय नहीं मिलता था, तो वो सब कैसे मैनेज करते थे?
जवाब- मेरे पापा ने मुझे हर समय सपोर्ट किया है। वह हर समय मेरे पास तो नहीं रह पाते थे, लेकिन उनको जितना भी समय मिलता वो सिर्फ मेरे गेम पर ध्यान देते। अंडर-19 तक मेरा कुछ नहीं हो पाया था तो पापा चाहते थे कि इसको कनाडा भेज दें। मैंने उनसे एक साल मांगा और उन्होंने मुझे मौका दिया फिर सब आपके सामने है।

अर्शदीप सिंह अपने परिवार के लोगों के साथ।
अर्शदीप सिंह अपने परिवार के लोगों के साथ।

सवाल- साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में आप खुद को किस रोल में देख रहे हैं?
जवाब- साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में अगर मुझे मौका मिलता है तो मैं अपना 100% दूंगा। अपना सब कुछ लगा दूंगा। मैं यहां तक पहुंचा हूं। इसका सारा श्रेय भगवान, मेरे कोच और माता-पिता को जाता है।

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