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IPL ऑक्शन vs EPL:भारत की सबसे बड़ी लीग में नीलामी के जरिए आते हैं टैलेंटेड खिलाड़ी; इंग्लैंड की सबसे बड़ी लीग ट्रांसफर सिस्टम से चलती है

18 दिन पहले
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इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग है। दूसरी ओर इंग्लिश प्रीमियर लीग (EPL) दुनिया की सबसे मशहूर फुटबॉल लीग में से एक है। दोनों ही लीग में दुनियाभर के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। हालांकि, इन दोनों स्पोर्ट्स लीग का खिलाड़ी चुनने का सिस्टम एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है।

IPL में बोली के जरिए होती है खरीद-बिक्री
टैलेंटेड क्रिकेटर्स को अपने साथ जोड़ने के लिए IPL नीलामी सिस्टम पर डिपेंड है। एक टीम के पास कुल 85 करोड़ रुपए का पर्स होता है। यानी 85 करोड़ रुपए या इसके अंदर उसके सभी खिलाड़ियों की कुल सैलरी होगी। इसके अलावा दो सीजन के बीच और मिड सीजन में ट्रांसफर विंडो के जरिए भी दो टीमें खिलाड़ी खरीद या बेच सकती हैं।

दो सीजन के बीच होने वाले ट्रांसफर में दो टीमें खिलाड़ियों की अदला-बदली भी कर सकती हैं या फिर कैश डील के जरिए एक टीम दूसरी टीम के खिलाड़ी को खरीद सकती है। जैसे इस बार चेन्नई ने कैश डील के जरिए रॉबिन उथप्पा को राजस्थान से खरीदा। वहीं, 2018 में हैदराबाद ने शिखर धवन के बदले दिल्ली के अभिषेक शर्मा, विजय शंकर और शहबाज नदीम को ट्रेड किया था।

EPL समेत तमाम बड़ी फुटबॉल लीग में ट्रांसफर का चलन
EPL सहित यूरोप और दुनिया की ज्यादातर बड़ी फुटबॉल लीग में टीमें खिलाड़ियों को ट्रांसफर विंडो में अपने साथ जोड़ती हैं। साल में दो बार ऐसी विंडो ओपन होती है। एक विंडो मिड सीजन यानी सीजन के बीच में और एक विंडो ऑफ सीजन यानी दो सीजन के बीच में ओपन होती है। अगर कोई खिलाड़ी पहले से किसी क्लब के साथ अनुबंध में है तो कोई दूसरी टीम उस क्लब को ट्रांसफर फीस चुकाकर उस खिलाड़ी को अपने साथ जोड़ सकती है। अगर कोई खिलाड़ी कहीं अनुबंध में नहीं है तो क्लब सीधे उससे कॉन्ट्रैक्ट कर सकता है।

फुटबॉल में पर्स लिमिट नहीं, फेयर प्ले पॉलिसी
IPL में एक टीम ज्यादा से ज्यादा 85 करोड़ रुपए सैलरी पर खर्च कर सकती है। EPL या अन्य किसी भी बड़ी फुटबॉल लीग में कोई पर्स लिमिट नहीं है। हालांकि, उन्हें फाइनेंशियल फेयर प्ले पॉलिसी का पालन करना होता है। यूरोपीय देश UEFA की पॉलिसी पर अमल करते हैं। इसके मुताबिक कोई टीम खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ने पर उतनी ही रकम खर्च कर सकती है, जितनी वह कमाई करती है। सफलता पाने के लिए कमाई से ज्यादा खर्च करने पर रोक है।

IPL के खिलाड़ी दूसरी लीग भी खेलते हैं, फुटबॉल में इसकी छूट नहीं
IPL नीलामी में खरीदे गए खिलाड़ी टूर्नामेंट खत्म होने के बाद दुनिया की अन्य क्रिकेट लीग में खेलने के लिए आजाद होते हैं। इसलिए कई ऐसे सितारे हैं, जो सिर्फ क्लब क्रिकेट खेलने पर जोर देते हैं। ये IPL के अलावा बिग बैश लीग, कैरेबियन प्रीमियर लीग, पाकिस्तान प्रीमियर लीग सहित कई अन्य लीग में भी खेल लेते हैं।

फुटबॉल में ऐसा नहीं होता। एक तो फुटबॉल के ज्यादातर लीग टूर्नामेंट 8 से 9 महीने तक चलती है। किसी लीग से जुड़े खिलाड़ियों को सिर्फ अपनी राष्ट्रीय टीम के मैचों में ही खेलने की छूट होती है। इसके लिए भी क्लब की इजाजत लेनी होती है। हालांकि, IPL में खेलने वाले भारतीय खिलाड़ी दुनिया की किसी अन्य लीग में नहीं खेलते हैं। BCCI ने इस पर रोक लगा रखी है। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि IPL की लोकप्रियता दुनिया की बाकी क्रिकेट लीग से ज्यादा है।

फुटबॉल में टैलेंटेड खिलाड़ियों को कम उम्र से तैयार करते हैं क्लब
प्रोफेशनल फुटबॉल के इकोसिस्टम की एक बड़ी खूबसूरती यह है कि क्लब स्टार खिलाड़ियों से कॉन्ट्रैक्ट करने के अलावा कम उम्र में टैलेंट की पहचान कर उन्हें भविष्य के स्टार के रूप में भी तैयार करते हैं। बार्सिलोना के स्टार लियोनेल मेसी इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। बार्सिलोना ने 13 साल की उम्र में ही मेसी को अपने साथ जोड़ लिया था। उन्हें अपनी एकेडमी में ट्रेंड किया और जूनियर टीम का हिस्सा बनाया। आगे चलकर मेसी बार्सिलोना के सबसे बड़े स्टार बने।

IPL vs EPL खिलाड़ियों की कमाई का हिसाब-किताब

  • 680 करोड़ रुपए अधिकतम सैलरी दे सकती हैं IPL की 8 टीमें मिलकर एक सीजन में। 2020 में 195 खिलाड़ी शामिल थे।
  • 15,386 करोड़ रुपए की सैलरी दी है EPL की 20 टीमों ने मिलकर 2020-21 में 518 खिलाड़ियों को।
  • 3.48 करोड़ रुपए औसत सैलरी है IPL में खिलाड़ियों की 2 महीने के लिए।
  • 29.70 करोड़ रुपए औसत सैलरी है EPL सितारों की 12 महीने के लिए।

सैलरी एडजस्ट करने के मामले में ज्यादा पीछे नहीं IPL
अगर दो महीने के हिसाब से EPL की सैलरी को एडजस्ट किया जाए तो प्रति खिलाड़ी औसत सैलरी 4.95 करोड़ रुपए की हो जाती है। यानी IPL की औसत सैलरी से 1.47 करोड़ रुपए ज्यादा। इसके उलट IPL की सैलरी को 12 महीने के हिसाब से एडजस्ट करें तो यह प्रति खिलाड़ी औसतन 20.88 करोड़ रुपए होती है। यानी EPL की औसत सैलरी से 8.82 करोड़ रुपए कम।

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