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ओलिंपिक इवेंट- जूडो:1964 से 1988 तक सिर्फ पुरुष खिलाड़ी हिस्सा लेते थे, 1992 में महिलाओं को भी मौका मिला; सुशीला इकलौती भारतीय खिलाड़ी

टोक्यो4 महीने पहले
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जूडो का गेम सबसे पहले 1964 टोक्यो ओलिंपिक में शामिल किया गया था। 57 साल बाद एक बार फिर यह गेम अपने ओरिजिन पर पहुंच गया है। 1968 में इस खेल को ओलिंपिक से बाहर कर दिया गया। पर 1972 में इसकी वापसी हुई। तब से लेकर अब तक यह हर ओलिंपिक का हिस्सा रहा है।

1988 ओलिंपिक तक सिर्फ पुरुष खिलाड़ी ही जूडो में हिस्सा लेते थे। महिला खिलाड़ियों को पहली बार 1992 ओलिंपिक में हिस्सा लेने का मौका मिला। इस साल भारत की इकलौती खिलाड़ी सुशीला देवी ने जूडो में कोटा हासिल किया है। जूडो के खिलाड़ियों को जुडोका कहते हैं।

'जुजित्सू' से हुई है जूडो की शुरुआत
जूडो जापानी शब्द ''जुजित्सू'' से आया है। जुजित्सू एक हाथ से लड़ने की एक तकनीक को कहते हैं। इसे पुराने समुराई वॉरियर्स इस्तेमाल करते थे। इसमें सामने वाले खिलाड़ी को जमीन पर गिराकर उसे सब्मिशन करने के लिए मजबूर करना होता है।

इस खेल की शुरुआत 1880 में हुई थी। डॉक्टर जिगोरो कानो ने 1882 में स्कूल में इसकी शुरुआत कराई थी और इसको लेकर कई नियम बनाए थे। यह खेल बॉक्सिंग और रेसलिंग जितना ही मुश्किल है। इसमें शारीरिक तौर पर मजबूती की जरूरत होती है।

क्वालीफिकेशन प्रोसेस
जूडो में मेन्स, विमेंस और मिक्स्ड इवेंट मिलाकर कुल 15 इवेंट होते हैं। इस बार 325 जगह के लिए खिलाड़ियों ने क्वालीफाई किया है। पुरुषों में 7 वेट कैटेगरी के लिए 18 हाईएस्ट रैंक वाले एथलीट को डायरेक्ट क्वालीफिकेशन मिली है।

विमेंस भी क्वालीफाई का यही नियम रहा। इसके अलावा IJF वर्ल्ड रैंकिंग लिस्ट के मुताबिक कॉन्टिनेंटल रिप्रेजेंटेशन के रूप में 100 एथलीट को डायरेक्ट एंट्री मिली। मेजबान देश यानी जापान को 14 कोटा दिया गया। इसमें मेन्स और विमेंस का 1-1 कोटा शामिल है।

जूडो का रिंग
जूडो के रिंग को सियाइओ कहा जाता है। यह स्क्वॉयर शेप का प्लेटफॉर्म होता है जो जमीन से थोड़ा ऊपर होता है। इसकी चौड़ाई 8 मीटर और लंबाई 10 मीटर होती है। इसके साथ ही रिंग के बाहर 7 सेंटी मीटर का डेंजर का सर्किल भी होता है। इसे लाल रंग से दिखाया जाता है।

जूडो की ड्रेस
जूडो के यूनिफॉर्म का नाम जुडोगी है। जुडोगी एक कुर्ते जैसा ड्रेस है। इसके साथ ही इसमें पजामा होता है। यूनिफॉर्म के ऊपर बेल्ट लगाया जाता है। बेल्ट एथलीट के ट्रेनिंग लेवल को बताता है।

जूडो में गेम बेल्ट
जूडो खेल में बेल्ट के अनुसार खिलाड़ी का ग्रेड निधारित होता है। वह किस स्तर और कितना मास्टर है यह उसके बेल्ट के रंग से पता चलता है। शुरुआत में सभी को व्हाइट बेल्ट दी जाती है। इसके बाद हर एग्जाम के साथ ब्लू बेल्ट, यलो बेल्ट, ग्रीन बेल्ट, ब्राउन बेल्ट और ब्लैक बेल्ट दी जाती है। यह सभी क्यू ग्रेड की बेल्ट हैं।

कैसे खेला जाता है जूडो?
जूडो खेलने के लिए दोनो खिलाड़ी रिंग में आते हैं। रिंग के अंदर बने लाइन के पास आकर झुककर एक दूसरे का अभिवादन करते हैं। इसके बाद जज और रैफरी को भी सम्मान देते हैं। रेफरी के हाजीमे कहने पर खेल शुरू होता है। दोनों खिलाड़ी अलग-अलग दांव पेंच लगाकर अटैक करते हैं। जूडो का मैच 3 से 20 मिनट तक का हो सकता है। स्पेशल कंडीशन में समय को कम किया या बढ़ाया जा सकता है।

इस गेम में हार जीत का फैसला 1 पॉइंट से होता है। जो खिलाड़ी एक पॉइंट हासिल करता है, वह जीत जाता है। जब कोई खिलाड़ी सामने वाले खिलाड़ी को पीठ के बल 3 सेकेंड तक जमीन पर दाबे रहने में सफलता प्राप्त करता है, तो उसे विनिंग पॉइंट दिया जाता है। यदि स्कोर टाई होता है, तो बाउट गोल्डन स्कोर या ओवर टाइम में चला जाता है। इस दौरान जो भी खिलाड़ी पहला पॉइंट बनाता है, उसे विजेता चुना जाता है।

जूडो में स्कोरिंग
जूडो में 3 तरह से स्कोरिंग होती है। इसे इपपोन, वजा-आरी और यूको कहते हैं। इपपोन तब होता है, जब खिलाड़ी सामने वाले खिलाड़ी को थ्रो करता है और उसे उठने नहीं देता। इपपोन होने पर 1 फुल पॉइंट दिया जाता है और खिलाड़ी जीत जाता है।

जूडो में स्कोरकार्ड का एक उदाहरण।
जूडो में स्कोरकार्ड का एक उदाहरण।
यह टॉप-3 थ्रोइंग टेक्नीक में सबसे ऊपर है।
यह टॉप-3 थ्रोइंग टेक्नीक में सबसे ऊपर है।

अगर थ्रो कम ताकत से किया गया, तो उसे वजा-आरी कहते हैं। इसमें आधा पॉइंट दिया जाता है। खिलाड़ी के 2 बार वजा-आरी करने पर एक फुल पॉइंट मिलता है और विजेता बनता है। अगर खिलाड़ी सामने वाले खिलाड़ी को साइड वाइज गिराने में सफलता हासिल करता है, तो उसे यूको अवॉर्ड किया जाता है। इसका इस्तेमाल मैच के टाई होने पर ही होता है।

जूडो मैच में क्या करने पर पेनल्टी?
जूडो में कुछ चीजों पर पाबंदी है। इसके लिए पेनल्टी भी अवॉर्ड की जाती है। जैसे...

खेल शुरू होने पर एथलीट एक-दूसरे के कंधे के पास वाले हिस्से की ड्रेस को पकड़कर ही मैच शुरू करते हैं। इसके अलावा कोई और हिस्से को छूना या पकड़ना गलती मानी जाती है। सामने वाले खिलाड़ी का सिर या छाती को पकड़ने पर भी मनाही है।

ऐसा करने पर चेतावनी दी जाती है। रेफरी के फैसले का विरोध करने पर भी पेनल्टी दी जाती है। एथलीट एक-दूसरे को गलत शब्द नहीं कह सकते। कोई ऐसा मूव अपनाना जिससे सामने वाले खिलाड़ी की हड्डी टूट सकती है, उस पर भी रेफरी दंडनीय मानते हैं।

इस थ्रोइंग टेक्नीक में एथलीट सामने वाले खिलाड़ी को पैर फंसाकर गिराता है।
इस थ्रोइंग टेक्नीक में एथलीट सामने वाले खिलाड़ी को पैर फंसाकर गिराता है।
ओसोतो गारी टॉप-3 थ्रो टेक्नीक में से एक है।
ओसोतो गारी टॉप-3 थ्रो टेक्नीक में से एक है।

जापान ने सबसे ज्यादा मेडल जीते
जापान ने ओलिंपिक में इस गेम में सबसे ज्यादा मेडल जीते हैं। उसके नाम 39 गोल्ड मेडल, 19 सिल्वर और 26 ब्रॉन्ज समेत कुल 84 मेडल हैं। इसके बाद 49 मेडल के साथ फ्रांस दूसरे और 43 मेडल के साथ साउथ कोरिया तीसरे नंबर पर है। भारत इसमें कोई भी मेडल नहीं जीत सका है। हालांकि यह खेल भारत में भी प्रचलित है।

भारत में जूडो संघ की स्थापना 1964 में हुई। इसके 2 साल बाद पहली जूडो चैंपियनशिप आयोजित हुई थी। भारत ने साल 1986 में हुए एशियाड गेम्स में जूडो में 4 ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए थे। ओलिंपिक में भारत ने पहली बार इस खेल में साल 1992 में हिस्सा लिया था। इस साल सुशीला देवी पर भारत को मेडल दिलाने की जिम्मेदारी होगी। उन्होंने 48 किलोग्राम भार वर्ग में भारत को कोटा दिलाया।

व्हाइट यूनिफॉर्म में सुशीला देवी। वे ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
व्हाइट यूनिफॉर्म में सुशीला देवी। वे ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
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