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इंस्पिरेशन फ्रॉम ग्रेट पर्सनालिटीज:युद्ध ने जोकोविच को मजबूत बनाया, बमबारी के डर से इन्होंने कई रातें जागकर गुजारी थीं

5 दिन पहले
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नोवाक जोकोविच के नाम 17 ग्रैंड स्लैम खिताब हैं। सर्बिया के इस खिलाड़ी ने 8 ऑस्ट्रेलियन ओपन, 5 विंबलडन, 1 फ्रेंच ओपन और 3 बार यूएस ओपन जीता है। -फाइल
  • नोवाक ज़ोकोविच को हाल ही में गुस्से के इजहार के कारण यूएस ओपन से बाहर होना पड़ा था
  • 16 साल की उम्र में जोकोविच ने पांच आईटीएफ टूर्नामेंट जीतकर अपनी काबिलियित साबित कर दी थी

चंद हफ्ते पहले कोविड-19 से लड़ाई जीतकर मैदान में आए टेनिस खिलाड़ी नोवाक ज़ोकोविच को यूएस ओपन 2020 से तब बाहर कर दिया गया था, जब गुस्से में उनकी टेनिस बॉल, लाइन जज को बुरी तरह चोट पहुंचा गई। उनका गुस्सा उनके और उन्हें हासिल होने वाले 18वें ग्रैंड स्लैम टाइटल के बीच आ गया। नोवाक के गुस्से ने उन्हें एक बड़े टूर्नामेंट से भले ही बाहर कर दिया हो, लेकिन ये वही गुस्सा है जिसने उन्हें टेनिस कोर्ट तक पहुंचाया था।

ये गुस्सा उन्हें तब भी आता था जब युद्ध के हालात में आधी रात को उन्हें बमबारी के डर से बेसमेंट में घंटों जागना पड़ता था। किशोरावस्था से ठीक पहले करीब तीन महीने तक हर रात उन्होंने ऐसे बुरे माहौल में बिताई है। बाद में उन्होंने माना भी कि युद्ध के कड़े माहौल ने उनकी दृढ़ता को बढ़ाया था।

नोवाक के पिता की टेनिस एकेडमी थी

22 मई 1987 को सर्बिया के बेल्ग्रेड में पैदा हुए नोवाक जोकोविच के पैरेंट्स के पास खासी दौलत थी और खेलों के लिए दिल में खास जगह भी। उनके माता-पिता के तीन रेस्त्रां थे और एक टेनिस एकेडमी। नोवाक के पिता, अंकल और आंटी प्रोफेशनल स्कीअर्स थे। पिता तो सॉकर भी बढ़िया खेलते थे, लेकिन नोवाक ने शुरू से ही अपना खेल टेनिस को माना। 1992 की गर्मियों में छह साल के नोवाक के टैलेंट को यूगोस्लावियन टेनिस लेजेंड जेलेना गेंकी ने सबसे पहले पहचाना। तब तक नोवाक विम्बलडन के मैच देख चुके थे और वहां खेलने का सपना भी बुन चुके थे।

जोकोविच ने 14 साल की उम्र में इंटरनेशनल करियर शुरू किया

जेलेना ने छह साल तक नोवाक पर मेहनत की। 13 साल की उम्र में उन्हें म्यूनिख की पिलिक एकेडमी भेज दिया गया कि ऊंचे स्तर के कॉम्पिटिशन का सामना वो कर पाएं। 2001 में जब वे 14 साल के थे, नोवाक ने अपना इंटरनेशनल करियर शुरू किया।

16 साल में पांच आईटीएफ टूर्नामेंट जीते

16 की उम्र में उन्होंने पांच आईटीएफ टूर्नामेंट्स जीते और उन्हें दुनिया के बेस्ट जूनियर प्लेयर्स की लिस्ट में 40वां स्थान हासिल हुआ। 2007 में नोवाक की पहुंच फ्रेंच ओपन और विम्बलडन के सेमी फाइनल्स तक हो गई और उन्होंने रोजर फेडरर, राफेल नडाल और एंडी रॉडिक जैसे दिग्गजों को हराया। 2011 उनके लिए कमाल का साल रहा और लगातार 43 मैच जीतकर ऐसा करने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने। इसी साल वो ऑस्ट्रेलयन ओपन, विम्बलडन और यूएस ओपन जीतकर दुनिया के नंबर वन खिलाड़ी भी बने।

चार भाषाओं में महारत

  • नोवाक को चार भाषाओं में महारत हासिल है, वो सर्बियन, इटालियन, जर्मन और अंग्रेजी पर बराबर पकड़ रखते हैं।
  • नोवाक...मार्टिन सॉल्विग के एक म्यूजिक वीडियो ‘हैलो’ में भी नजर आए थे।
  • ये जब भी विम्बलडन में फाइनल जीतते हैं, कोर्ट पर घास की दो पत्तियां खाकर सेलिब्रेट करते हैं।

सपने पूरे करने के लिए खुद पर यकीन होना जरूरी

नोवाक कहते हैं कि भरोसा मेरे लिए सबसे खास शब्द है, उम्मीद से भी बढ़कर। जो भी अपने सपने पूरे करना चाहते हैं, उन्हें खुद पर सच्चा यकीन करना होगा।2014 के विम्बलडन के ऐतिहासिक मैच में जब उन्होंने रोजर फेडरर को पांच सेट के मुकाबले में हराया तो विनिंग स्पीच में नोवाक का मजेदार अंदाज आज तक सभी को याद है।

नोवाक ने फेडरर की खूब तारीफ करते हुए कहा था कि मैं आपके करिअर की बेहद इज्जत करता हूं। आप वाकई कमाल के एथलीट हैं। आपका शुक्रिया जो आपने मुझे आज जीतने दिया। इस जीत के बाद नोवाक ने शादी कर ली और कुछ महीनों में ही पिता भी बन गए। नोवाक का सेंस ऑफ ह्यूमर कमाल का है। इस वजह से उन्होंने निक नेम ‘डीजोकर’ हासिल किया है।

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