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आज से विम्बलडन शुरू:जोकोविच के पास रिकॉर्ड 20 ग्रैंड स्लैम की बराबरी का मौका; करीब 2 साल बाद टूर्नामेंट खेलेंगे 8 बार के चैंपियन फेडरर

लंदन4 महीने पहले
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आज से दुनिया के सबसे खास टेनिस टूर्नामेंट में से एक विम्बलडन की शुरुआत हो चुकी है। यह टूर्नामेंट 28 जून से 11 जुलाई तक खेला जाएगा। पिछली बार यानी 2020 में इस टूर्नामेंट को कोरोना की वजह से कैंसिल कर दिया गया था। 2 साल बाद इस टूर्नामेंट की वापसी हो रही है। वहीं, 20 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन रोजर फेडरर भी इस टूर्नामेंट पर पूरी तरह फोकस कर रहे हैं। उन्होंने विम्बलडन खेलने के लिए फ्रेंच ओपन के तीसरे राउंड के बाद नाम वापस ले लिया था।

पुरुषों में दुनिया के नंबर-1 टेनिस प्लेयर सर्बिया के नोवाक जोकोविच डिफेंडिंग चैंपियन हैं। वे इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन और फ्रेंच ओपन जीत चुके हैं। उनसे पार पाना किसी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होगा। वहीं, महिलाओं में सिमोना हालेप डिफेंडिंग चैंपियन हैं। पर चोट की वजह से वे इस बार टूर्नामेंट नहीं खेलेंगी।

कई दिग्गज खिलाड़ियों ने नाम वापस लिया
इस बार कई दिग्गज खिलाड़ियों ने निजी कारणों से विम्बलडन नहीं खेलने का फैसला लिया है। इसमें राफेल नडाल, हालेप, नाओमी ओसाका, डोमिनिक थिएम, मिलोस राओनिक और डेविड गॉफिन जैसे खिलाड़ी हिस्सा नहीं ले रहे हैं।

विम्बलडन का इतिहास
विम्बलडन की शुरुआत 9 जून 1877 को हुई थी। उस वक्त मैच विम्बलडन के वोर्पल रोड पर होती थी। यह दुनिया का सबसे पुराना टेनिस टूर्नामेंट भी है। पहले इसे लॉन टेनिस मीटिंग के नाम से बुलाया जाता था। इसमें अमैच्योर प्लेयर भी खेल सकते थे। शुरुआत में इसमें सिर्फ मेन्स सिंगल्स मैच खेले जाते थे। 1844 में इसमें विमेंस सिंगल्स और मेन्स डबल्स के मुकाबले जोड़े गए। 1913 से विमेंस डबल्स और मिक्स्ड डबल्स के मैच भी खेले जाने लगे।

टूर्नामेंट में सख्त ड्रेस कोड
विम्बलडन में एक बात का खास ध्यान रखा जाता है, वह है ड्रेस कोड। सभी खिलाड़ियों को व्हाइट ड्रेस में खेलना होता है। इसकी प्रथा 1800 से चली आ रही है। उस वक्त पसीने के धब्बे को रोकने के लिए व्हाइट ड्रेस पहने जाते थे। 2013 में फेडरर को बीच मैच में जूते बदलने के लिए कहा गया, क्योंकि उसके सोल ऑरेंज कलर के थे।

रूफस से होती है मैच की शुरुआत
टूर्नामेंट के दौरान हर सुबह एक रूफस नाम के बाज को आसमान में छोड़ा जाता है। उसे सिर्फ कबूतरों को डराने के लिए छोड़ा जाता है। वह उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाता। रूफस का काम कबूतरों को कोर्ट तक आने से रोकना है। 2012 में उसे चुरा लिया गया था। पर फिर उसे ढूंढ़ निकाला गया।

हजारों टेनिस बॉल का इस्तेमाल
टूर्नामेंट के दौरान करीब 54 हजार टेनिस बॉल का उपयोग किया जाता है। जब इन बॉल का इस्तेमाल नहीं हो रहा होता है, तो इन्हें फ्रिज में भी रखा जाता है, ताकि इन पर कोई दाग न पड़े। विम्बलडन के फैन 3 बॉल के एक कैन को करीब 257 रुपए में खरीद सकते हैं। यह तभी पॉसिबल है, जब उस बॉल का पूरी तरह इस्तेमाल हो गया हो।

स्ट्रॉबेरी और क्रीम भी बेहद जरूरी
टूर्नामेंट में जितना जरूरी टेनिस रैकेट है, उतना ही जरूरी स्ट्रॉबेरी और क्रीम भी है। 2017 में 23 टन स्ट्रॉबेरी और 7 हजार लीटर फ्रेश क्रीम कोर्ट में आने वाले लोगों को बांटे गए थे। अगर 23 टन स्ट्रॉबेरी को लाइन में लगाया जाए, तो ये करीब 37 मील की दूरी तय कर लेंगी।

बॉल गर्ल और बॉल बॉय का महत्व
विम्बलडन में बॉल गर्ल और बॉल बॉय होना एक सीरियस जॉब है। टूर्नामेंट के लिए 250 लड़कों और लड़कियों को करीब 27 स्कूल से सिलेक्ट किया जाता है। यह सभी 15 साल के आसपास की उम्र वाले होते हैं और उन्हें टेनिस में दिलचस्पी होती है। उन्हें चेक भी किया जाता है कि वे 3 मिनट तक एक दम शांत खड़े रह सकते हैं या नहीं। अगर इसमें वे फेल हुए, तो हिस्सा नहीं लेने दिया जाता।

फेडरर ने 8 बार यह टूर्नामेंट जीता
पुरुषों में सबसे ज्यादा बार विम्बलडन जीतने का रिकॉर्ड रोजर फेडरर के नाम है। उन्होंने 8 बार यह टाइटल जीता है। वहीं, विलियम रेनशॉ, पीट सैम्प्रास ने 7-7 बार यह टाइटल जीता है। महिलाओं में चेक और अमेरिकी खिलाड़ी मार्टिना नवरातिलोवा के नाम यह रिकॉर्ड है। उन्होंने 9 बार यह खिताब जीता है।

सबसे लंबा मैच 11 घंटे तक चला
विम्बलडन में सबसे लंबा मैच जून 23, 2010 को खेला गया था। तब अमेरिका के जॉन इस्नर ने फ्रांस के निकोलस माहुत को 11 घंटे 5 मिनट में हराया था। यह मैच 3 दिन तक चला था। टूर्नामेंट में मेन्स में सबसे तेज सर्व करने का रिकॉर्ड टेलर डेंट के नाम है। उन्होंने 238 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सर्व किया था। महिलाओं में वीनस विलियम्स के नाम यह रिकॉर्ड है। उन्होंने 205 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सर्व किया था।

क्या सेरेना और फेडरर का आखिरी टूर्नामेंट?
39 साल के फेडरर का यह आखिरी टूर्नामेंट हो सकता है। वे अगस्त में 40 साल के हो जाएंगे। पिछले साल फेडरर ने दो बार घुटने की सर्जरी कराई थी। फ्रेंच ओपन खेलकर उन्होंने करीब डेढ़ साल बाद ग्रैंड स्लैम में वापसी की थी। अब यह जीतकर 21 करियर ग्रैंड स्लैम के रिकॉर्ड के साथ फेडरर करियर का अंत कर सकते हैं।

वहीं, सेरेना विलियम्स भी 39 साल की हो चुकी हैं। उन्होंने करियर में 23 ग्रैंड स्लैम जीते हैं। महिलाओं में ओपन एरा में उनके नाम सबसे ज्यादा ग्रैंड स्लैम का रिकॉर्ड है। वहीं, 1 और ग्रैंड स्लैम जीतते ही मार्गरेट कोर्ट के 24 ग्रैंड स्लैम के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगी।

टूर्नामेंट जीतने वाले को 17.80 करोड़ रुपए
इस बार टूर्नामेंट जीतने वाले महिला और पुरुष खिलाड़ियों को करीब 17.80 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। जबकि, रनर अप को 9.42 करोड़ रुपए मिलेगा। इसके साथ चैंपियंस को एक ट्रॉफी भी दी जाती है। टूर्नामेंट जीतने वाली महिला खिलाड़ी को राउंड प्लेट के साइज की ट्रॉफी मिलती है। इसे साल्वर भी कहते हैं।

यह पहली बार 1864 में बनाकर तैयार किया गया था। वहीं, पुरुष खिलाड़ियों को गोल्डन कप दिया जाता है। इसकी शुरुआत 1887 में हुई थी। विजेताओं को ट्रॉफी रखने की इजाजत नहीं है। इसे ऑल इंग्लैंड क्लब म्यूजियम में रखा जाता है। इसकी जगह विनर्स को इसकी कॉपी मिलती है।

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