जानिए भारतीय हॉकी के हीरोज को:रुपिंदर और हरमनप्रीत ने ड्रैग फ्लिक से कई गोल दागे; हार्दिक और गुरजंत ने काउंटर अटैक से विपक्षी टीम को परेशान किया

टोक्यो2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
ब्रॉन्ज मेडल के साथ भारत की पुरुष हॉकी टीम। - Dainik Bhaskar
ब्रॉन्ज मेडल के साथ भारत की पुरुष हॉकी टीम।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने ब्रॉन्ज मेडल के मैच में जर्मनी को 5-4 से हरा दिया। 3-1 से पिछड़ने के बाद टीम इंडिया ने शानदार वापसी की और मैच 5-4 से अपने नाम कर लिया। इस ऐतिहासिक जीत से भारत ने 1980 ओलिंपिक के बाद पहला मेडल अपने नाम किया। 41 साल पहले वासुदेवन भास्करन की टीम ने गोल्ड मेडल जीता था।

इस जीत से दुनिया में भारतीय हॉकी की गूंज एक बार फिर गूंजने लगी है। लोगों का मानना है कि हॉकी का गोल्डन एरा लौटने वाला है। ऐसे में हम आपको जीत के उन हीरोज के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने अपने दम पर भारतीय हॉकी के उदय में मदद की है। आप भी टीम इंडिया के इन हीरो से मिलिए...

1. मनप्रीत सिंह (कप्तान)

29 साल के मनप्रीत सिंह टीम इंडिया के कप्तान हैं। वे एक बेहतरीन मिडफील्डर होने के साथ-साथ एक शानदार प्लेमेकर भी हैं। पास निकालना और सही खिलाड़ी स्पॉट करना उनकी खासियत है। मनप्रीत ने 19 साल की उम्र में ही टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया था। मनप्रीत पहले भी टीम की कप्तानी संभाल चुके हैं।

उनकी कप्तानी में टीम ने 2017 एशिया कप, 2018 एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और 2019 में FIH सीरीज फाइनल जीता था। इसके साथ ही 2018 में भुवनेश्वर में हुए हॉकी वर्ल्ड कप में उनकी कप्तानी में टीम क्वार्टर फाइनल में पहुंची थी। इसके साथ ही वर्ल्ड रैंकिंग में टीम टॉप-5 में भी पहुंची।

2. पी.आर. श्रीजेश

श्रीजेश पिछले एक दशक से भारतीय मेंस हॉकी टीम के मजबूत स्तंभ बने हुए हैं। उन्होंने 2006 में डेब्यू किया था। तीन बार के इस ओलिंपियन ने कई बार मैदान पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उन्होंने ओलिंपिक में टीम इंडिया के सफर में कई पेनल्टी कॉर्नर बचाए। वे 2016 रियो ओलिंपिक में टीम इंडिया के कप्तान रहे थे।

3. हरमनप्रीत सिंह

2016 में जूनियर वर्ल्ड कप जीत चुके हरमनप्रीत सिंह रियो ओलिंपिक में भी टीम इंडिया का हिस्सा रहे थे। हालांकि इस ओलिंपिक में उन्हें नई जिम्मेदारी मिली और बीरेंद्र लाकरा के साथ उप-कप्तान बनाए गए। 25 साल के हरमनप्रीत ने ओलिंपिक में भारत के अभियान में काफी मदद की। उन्होंने अपने मजबूत डिफेंस से कई गोल रोके और शानदार ड्रैग फ्लिक से कई गोल दागे।

4. बीरेंद्र लाकरा

बीरेंद्र पिछले 9 साल से टीम इंडिया का हिस्सा रहे हैं। वे 2012 ओलिंपिक की टीम में थे। पर 2016 ओलिंपिक में घुटने में चोट और सर्जरी की वजह से नहीं खेल पाए थे। वापसी के बाद से बीरेंद्र ने टीम की कामयाबी में अहम योगदान दिया है। वे करीब 200 मैच खेल चुके हैं। वे डिफेंस के साथ मिडफील्ड भी संभालते हैं।

5. रुपिंदर पाल सिंह

31 साल के डिफेंडर रुपिंदर कई साल से टीम इंडिया के लिए खेल रहे हैं। उन्हें संदीप सिंह के बाद भारत के बेस्ट ड्रैग फ्लिकर्स में से एक माना जाता है। ड्रैग फ्लिक के अलावा उनकी खासियत मजबूत डिफेंडिंग भी है। ग्रेट ब्रिटेन, अर्जेंटीना और जर्मनी जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ उन्होंने शानदार डिफेंस का नजारा पेश किया। उनकी लंबी हाइट से टीम को काफी फायदा मिलता है।

6. अमित रोहिदास

ब्रॉन्ज मेडल जीतकर डिफेंडर अमित रोहिदास का 12 साल पुराना सपना पूरा हो गया। इस 28 साल के खिलाड़ी ने नेशनल टीम से 100 से ज्यादा मैच खेले हैं। उन्होंने 3 बार के ओलिंपियन और पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप टिर्की को देखकर हॉकी खेलना शुरू किया था। 2017 के बाद से रोहिदास लगातार टीम इंडिया का हिस्सा रहे हैं।

7. सुरेंद्र कुमार

भारतीय पुरुष टीम के डिफेंडर सुरेंद्र कुमार ने रुपिंदर, हरमनप्रीत और बीरेंद्र के साथ मिलकर डिफेंस को संभाला। वे हरियाणा के कुरुक्षेत्र के रहने वाले हैं। सुरेंद्र एशियन गेम्स और रियो ओलिंपिक में भी टीम इंडिया का हिस्सा रहे थे। टीम की जीत के बाद कुरुक्षेत्र में जश्‍न का माहौल रहा। लोग घरों से बाहर निकल आए।

8. विवेक सिंह प्रसाद

विवेक ने 2018 में सिर्फ 17 साल की उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू किया था। वे टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में से एक हैं। इस टैलेंटेड मिडफील्डर को बेहतरीन प्लेमेकिंग और पास निकालने के लिए जाना जाता है। टोक्यो में उन्होंने अपने फॉरवर्ड का बखूबी साथ निभाया।

9. नीलकांत शर्मा

मणिपुर के इस मिडफील्ड ने कहा कि वे मनप्रीत के बड़े फैन हैं और उन्हीं से हॉकी में काफी कुछ सीखा है। 2016 के जूनियर हॉकी वर्ल्ड कप में अपना जलवा दिखाने के बाद नीलकांत ने सीनियर टीम में जगह बनाई।

26 साल के नीलकांत ने 16 साल की उम्र में हॉकी के लिए घर छोड़ दिया था। उन्होंने यह तय कर लिया था कि चाहे जो भी वे खाली हाथ नहीं लौटेंगे और अब ब्रॉन्ज जीतकर उन्होंने अपने वादे को पूरा किया।

10. दिलप्रीत सिंह

पंजाब के 21 साल के युवा स्ट्राइकर दिलप्रीत सिंह ने ओलिंपिक में कई अहम मौकों पर भारत के लिए गोल किया और जीत दिलाई। वे 2018 एशियन गेम्स के ब्रॉन्ज मेडल विनिंग टीम का हिस्सा रहे थे। उन्होंने ओलिंपिक के लिए SAI बेंगलुरु में जमकर मेहनत की थी।

11. गुरजंत सिंह

भारत के स्टार फॉरवर्ड गुरजंत सिंह ने इस साल ओलिंपिक में शानदार परफॉर्मेंस दिया। उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में मिली जीत में भी अहम भूमिका निभाई थी। वे जूनियर वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में टीम इंडिया को मिली जीत के सबसे बड़े स्टार रहे थे। इसके बाद ही उन्हें टीम इंडिया में जगह मिल गई थी।

12. मनदीप सिंह

26 साल के मनदीप सिंह टीम इंडिया के फॉरवर्ड की शान हैं। वे पूरे ओलिंपिक में भारत के अटैक की अगुवाई करते रहे। 2013 में मनदीप ने डेब्यू किया था और 105 इंटरनेशनल मैच में उन्होंने अब तक 42 गोल दागे हैं।

13. सुमित वाल्मीकि

सोनीपत के रहने वाले सुमित को तेज काउंटर अटैक और ड्रिब्लिंग स्किल्स के लिए जाना जाता है। वे 2016 में जूनियर वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रह चुके हैं।

14. शमशेर सिंह

24 साल का यह प्लेयर हॉकी में फॉरवर्ड के तौर पर खेलता है। शमशेर पंजाब के अटारी बॉर्डर के पास बसे गांव से आते हैं। उन्होंने भारत के लिए 10 मैच खेले हैं। वे आने वाले समय में भारतीय हॉकी के बड़े स्टार बन सकते हैं।

15. हार्दिक सिंह

22 साल के स्टार स्ट्राइकर हार्दिक ने टोक्यो ओलिंपिक में गहरी छाप छोड़ी है। उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल, बेल्जियम के खिलाफ सेमीफाइनल और जर्मनी के खिलाफ ब्रॉन्ज मेडल मैच में गोल दागे। इस ओलिंपिक में उन्होंने एक अलग ही पहचान बना ली है। हार्दिक ने 2018 में डेब्यू किया था।

खबरें और भी हैं...