ओलिंपिक में भारत की बेटी का एक और कमाल:मोहम्मद अली की फैन लवलीना 30 जुलाई को बन सकती हैं देश की दूसरी मेरीकॉम, उम्र में 12 साल बड़ी मुक्केबाज को हराया

टोक्यो3 महीने पहले

भारतीय महिला मुक्केबाज लवलिना बोरगोहेन ने टोक्यो ओलिंपिक के लिए रवाना होने से पहले दिए इंटरव्यू में कहा था- 'नेशनल में अगर कोई गोल्ड मेडल जीतता है तो लोग जल्द ही उसे भूल जाते हैं, लेकिन ओलिंपिक में मेडल जीतने पर सब हमेशा याद रखते हैं। मेरा लक्ष्य ओलिंपिक में देश के लिए मेडल जीतना है।' 23 साल की लवलिना अब उस कभी न भूलने वाले मेडल से सिर्फ एक जीत की दूरी पर हैं। मंगलवार को उन्होंने उम्र में अपने से 12 साल बड़ी जर्मन प्रतिद्वंद्वी नादिने एपेट्ज को हराकर 69 किलोग्राम वेट कैटेगरी के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है।

लवलिना की अगली बाउट 30 जुलाई को होनी है। अगर वे उसमें जीत हासिल कर लेती हैं तो बॉक्सिंग में एमसी मेरीकॉम के बाद ओलिंपिक मेडल जीतने वाली देश की दूसरी महिला मुक्केबाज बन जाएंगी। मेरीकॉम ने 2012 लंदन ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।

मोहम्मद अली से प्रभावित होकर बॉक्सिंग शुरू की
लवलिना ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने मोहम्मद अली से प्रभावित होकर बॉक्सिंग करना शुरू किया था। उनके पापा टिकेन बोरगोहेन एक बार बाजार से अखबार में लपेट कर मिठाई लेकर आए थे। अखबार की उस कतरन में मोहम्मद अली के बारे में छपा था। उन्होंने पापा से मोहम्मद अली के बारे में जाना। तभी से वह बॉक्सिंग में करियर बनाने का सपना देखने लगी।

लवलिना ने भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, 'हम तीन बहनें हैं। सब लोग यही कहते थे कि लड़कियां कुछ नहीं कर पाएंगी। लेकिन मेरी मां ममोनी बोरगोहेन हमेशा कहती हैं कि कुछ ऐसा करना है, जिसे आपको लोग याद रखें।' लवलिना अपनी मां के इस कथन को पूरा करने के लिए एक कदम बढ़ा चुकी हैं। वे असम की पहली महिला खिलाड़ी हैं, जो ओलिंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। असम के गोलाघाट जिले की रहने वाली लवलिना को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

किक बॉक्सिंग से की थी शुरुआत
लवलिना ने अपनी जुड़वा बहनों लीचा और लीमा को देखकर किक बॉक्सिंग करना शुरू किया था। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) के असम रीजनल सेंटर में सिलेक्शन होने के बाद वह बॉक्सिंग की ट्रेनिंग लेने लगी थीं। उनकी दोनों बहनें किक बॉक्सिंग में नेशनल स्तर पर मेडल जीत चुकी हैं। लवलिना को बचपन में काफी संघर्ष करना पड़ा। उनके पिता टिकेन बोरगोहेन की छोटी सी दुकान थी। शुरुआती दौर में लवलिना के पास ट्रैकसूट तक नहीं था। इक्विपमेंट और डाइट के लिए संघर्ष करना पड़ता था।

साई में आने के बाद लवलिना को मिली नई दिशा
लवलिना जब क्लास 9 में थी, तभी उनका चयन असम में साई के स्थित रिजनल सेंटर के लिए हुआ। वहां पर ही उनके खेल में सुधार हुआ। लवलिना की कोच संध्या गुरांग ने एक इंटरव्यू में कहा था जब वह साई में आई तो वह काफी डर के लिए खेलती थी। यहां आने के बाद ही उनके तकनीक में सुधार हुआ और वह खुलकर खेलने लगी।

दो वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जीत चुकी हैं मेडल
लवलिना 2018 और 2019 में हुए वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं। वहीं दिल्ली में आयोजित पहले इंडियन ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में सिल्वर और गुवाहटी में आयोजित दूसरे इंडियन ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीत चुकी है। इसके अलावा वह 2017 में एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी है। 2018 कॉमनेवल्थ गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

खबरें और भी हैं...