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वाड्रा के करीबी पूर्व विधायक नागर व 3 भाइयों समेत समर्थकों के यहां 90 घंटे आईटी टीम ने खंगाला रिकॉर्ड
आईटी कस सकता है शिकंजा, विधायक ने भी जताई है आशंका
तिगांव विधानसभा से पूर्व विधायक ललित नागर, उनके तीन भाइयों और समर्थकों के घर व दफ्तरों की 90 घंटे तक छानबीन करने के बाद आयकर विभाग की टीम वापस चली गई। दिल्ली, मेरठ, चंडीगढ़ और रोहतक से आई 35 अधिकारियों की टीम ने विधायक और उनके भाइयों के मकानों का चप्पा चप्पा छाना। किचन से लेकर ड्राइंग रूम तक। टॉयलेट से लेकर बेडरूम तक खंगाला। लैपटॉप और परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल फोन तक की भी पड़ताल शनिवार देर रात करीब सवा 10 बजे टीम दिल्ली रवाना हो गई। बताया जा रहा है टीम पूर्व विधायक की जमीन व घरों से संबंधित कागजात की फोटो कापी अपने साथ ले गई ।
विधायक ने लगाया झूठा फंसाने का आरोप
रविवार को प्रेसवार्ता में पूर्व विधायक नागर ने भी अंदेशा जताया कि अधिकारियों की टीम उनके जमीन के खरीद फरोख्त के कागजात की फोटो कापी अपने साथ ले गई है। उन्हें झूठे केस में फंसाया जा सकता है। पूर्व विधायक ने दावा किया कि आयकर विभाग को 4 दिन की जांच में कुछ भी ऐसा नहीं मिला। जिसमें कोई गड़बड़ी की बात सामने आई हो। नागर ने आरोप लगाय कि अधिकारियों ने उनकी बूढ़ी मां समेत बच्चों और महिलाओं को घरों में बंधक बनाए रखा।
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परदे के पीछे और मैनेजमेंट फंडा
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पूर्व विधायक का दावा नहीं मिला कोई सबूत| पूर्व विधायक ने दावा किया कि आईटी टीम को चार दिन की जांच में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। इसलिए टीम शनिवार की देर रात मुंह छुपाकर चली गई। उन्होंने कहा कि यदि जमीन का व्यापार करना गुनाह है तो भाजपा के सभी विधायक और मंत्री भी तो इसी धंधे में लगे हैं। उनकी जांच क्यों नहीं की जा रही। नागर ने कहा कि वह भाजपा की नीतियों का विरोध करते हैं। इसलिए उन्हें परेशान किया जा रहा है।
2016 से अब तक चौथी बार पड़ी है रेड| पूर्व विधायक ललित नागर के घर छापेमारी की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसके पहले तीन बार आयकर और प्रवर्तन निदेशालय की टीम कार्रवाई कर चुकी है। पहली रेड वर्ष 2016 में आयकर की पड़ी थी। वर्ष 2017 में आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय ने संयुक्त रूप से जांच की थी। इसके बाद अक्टूबर 2019 में विधानसभा चुनाव के दौरान रेड डाली गई थी। अब 4 मार्च को चौथी बार रेड डाली गई।
कार्रवाई के खिलाफ एकजुट हुए कांग्रेसी |पूर्व विधायक और उनके समर्थकों के यहां चार दिन तक चली कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस नेता एकजुट हो गए हैं। उन्होंने कहा इस ज्यादती के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। इन्होंने आरोप लगाया कि यह सब भाजपा सरकार क इशारे पर हो रहा है। प्रेसवार्ता में एनआईटी क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक नीरज शर्मा, नूंह से विधायक आफताब अहमद, पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर मुकेश शर्मा, पूर्व डिप्टी मेयर राजेंद्र भामला, गुलशन बगगा, पूर्व पार्षद योगेश ढींगड़ा, अनिल शर्मा, वेदप्रकाश यादव, एडवोकेट राजेश खटाना, प्रदीप धनखड़, अशोक रावल, युद्धवीर झा सहित काफी कांगऱ्सी नेता मौजूद थे।
बीकानेर में खरीदी गई 270 बीघा जमीन की भी जांच की गईआयकर विभाग की टीम ने पूर्व विधायक के भाई महेश नागर द्वारा राबर्ट वाड्रा को बीकानेर में दिलाई 270 बीघा जमीन की खरीद फरोख्त की भी जांच की। विधायक के भाई महेश नागर ने बताया कि उन्होंने जमीन वर्ष 2009 में खरीदी थी। पहले जो जांच की गई थी उसमें प्रशासन के अधिकारी तहसीलदार और पटवारी के खिलाफ वर्ष 2004 में बीकानेर में केस दर्ज किया गया था। अभी तक की जांच में उनके खिलाफ कहीं भी एक भी केस दर्ज नहीं है। सिर्फ राबर्ट वाड्रा से संबंध होने के कारण उन्हें परेशान किया जा रहा है।
इन इन लोगों के यहां भी की गई जांच पड़ताल| आयकर विभाग की टीम ने पूर्व विधायक ललित नागर के अलावा उनके तीन भाई महेश नागर, मनोज नागर और राजू नागर के घरों और दफ्तरों की जांच की। इनके अलावा नागर के समर्थक बादशाहपुर निवासी रोहताश, भारत कॉलोनी निवासी डॉ. दीपक राघव, इनके मामा ऋषिपाल, फुफेरा भाई जोगिंदर, भाई महेश नागर के ससुराल बदरपुर, ललित नागर की ससुराल ग्रेटर नोएडा, अमीपुर निवासी राजपाल, विजयपाल, उमेश, महेश नंबरदार, खेड़ी निवासी रणवीर, भुआपुर निवासी देवराज, पूर्व फौजी सुरेंद्र, अशोक कुमार, केहर नागर, विकल, नरेंद्र, फतेहपुरा निवासी लेखराज सरपंच, संदीप, कैलाश आदि के घरों की जांच पड़ताल की गई।
4 मार्च को सुबह सवा छह बजे शुरू हुई थी आईटी की सर्चिंग
फरीदाबाद। सेक्टर 17 अपने आवास पर कांग्रेसी नेताओं के साथ प्रेसवार्ता करते पूर्व विधायक ललित नागर व अन्य।
आयकर विभाग की टीम 4 मार्च की सुबह करीब सवा छह बजे पूर्व विधायक ललित नागर, उनके भाइयों और समर्थकों के घरों और दफ्तरों में एक साथ कार्रवाई शुरू की थी। अधिकारियों ने जिस वक्त जांच शुरू की थी उस समय विधायक और उनके परिवार के सदस्य सो रहे थे। जब उनकी नींद खुली तो घर में आयकर के विभाग के अधिकारी खड़े थे। जांच शुरू करने से पहले अधिकारियों ने लोकल पुलिस भी बुला रखी थी। न किसी को अंदर आने की इजाजत थी और न बाहर जाने की। परिवार के सभी सदस्यों के मोबाइल फोन भी जब्त कर बंद कर दिए गए थे।