हर पहल छोटी शुरुआत केबाद ही बड़ी बनती है

Faridabad News - तापसी पन्नू अपनी बातों को बेबाकी से रखने के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में भास्कर ने उनसे चर्चा की.. तापसी...

Feb 22, 2020, 07:15 AM IST
Faridabad News - every initiative becomes big only after small start
तापसी पन्नू अपनी बातों को बेबाकी से रखने के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में भास्कर ने उनसे चर्चा की..

तापसी पन्नू

कं गना रनोट की बहन रंगोली आप पर तीखे चुभने वाले कमेंट्स करती रहती हैं, इस पर कैसा लगता है?

मैंने उसके इन कमेंट्स पर रिएक्ट करना बंद कर दिया है। वह कमेंट करती है तो करे, मैं क्यों रिएक्ट करूं उन्हें? ऐसे तो अगर मैं सबको रिएक्ट करने लगी तो यह मेरी फुल टाइम जॉब हो जाएगी। मेरे पास बहुत सारा काम है तो इन सब पर अपना समय और एफर्ट बर्बाद नहीं कर सकती। आप ही लोगों ने उन्हें सेंसेशन बनाया हुआ है।

‘सांड की आंख’ को लेकर नीना गुप्ता ने आप पर कमेंट कसा था कि इस तरह की फिल्में तो कम से कम उनके जैसे बुजुर्गों को कर लेने दो। इस पर आपका क्या टेक है?

बिल्कुल उन जैसे बुजुर्गों को देनी चाहिए। पर मेरे पास आई तो, मैं तो करूंगी ना...। ऐसे कई सारे रोल होते हैं जो मुझे लगता है कि मैं बेहतर कर सकती हूं। अब सारी दिल्ली की सरदानियों के रोल मैं थोड़ी ना करूंगी। ये तो ऐसा हो गया कि अगर मैं रियल लाइफ में सरदारनी हूं तो मुझे यही करना चाहिए। मतलब फिर तो आप एक्टर हैं ही नहीं, आप तो सिर्फ अपने आप को रीप्रेजेंट कर रहे हो फिल्म के अंदर। तो मेरे ख्याल से उस समय हुआ यह डिस्कशन बहुत ही स्टूपिड था।

सब्जेक्ट टैबू है फिर भी गुदगुदाती है ‘शुभ मंगल...’

"शुभ मंगल ज्यादा सावधान'

हॉन्टेड शिप के साथ डराने में विफल साबित हुई ‘भूत’

‘भूत पार्ट 1 : द हॉन्टेड शिप’

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु [[email protected]]

‘जब वी मेट’ की गीत जैसी स्टोरी रियललाइफ में मेरे साथ भी चल रही थी’

मौसम है कातिलाना,
पृथ्वी को बचाना है


जयप्रकाश चौकसे, फिल्म समीक्षक

दीपशिखा और जैकी की फिल्म को मिला पुरस्कार

congratulations...

निर्माता-उद्यमी जोड़ी दीपशिखा देशमुख और जैकी भगनानी ने दादा साहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवाॅर्ड्स 2020 में अपनी शॉर्ट फिल्म "कार्बन: द स्टोरी ऑफ टुमॉरो' के लिए सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फिल्म का पुरस्कार जीता। फिल्म 2067 में सेट की गई है और ग्लोबल वार्मिंग के मुद्दे पर एक परिकल्पना की पड़ताल करती है, जहां कार्बन गैस प्रचुर मात्रा में है और ऑक्सीजन एक महंगी वस्तु में बदल गई है। पुरस्कार प्राप्त करने पर दीपशिखा ने कहा, ‘एक निर्माता के रूप में मुझे पता है कि दर्शकों के साथ फिल्मों के माध्यम से संवाद कैसे करना है। मैं वास्तव में इस सम्मान को प्राप्त कर के खुश हूं और विशेष रूप से एक ऐसी फिल्म बनाकर खुश हूं जो आज के दिन और समय में जलवायु परिवर्तन जैसे प्रासंगिक मुद्दों में योगदान देती है। ये एक ऐसा मुद्दा है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।’

 मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए 9190000071 पर मिस्ड कॉल करें

सा रा, यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्डन की छात्र थी, जिसे उसके पिता और भाई रोजाना बुरी तरह पीटते थे। जब भी वह क्लास में आती, उदास और दु:खी दिखती और उसके चेहरे पर चोट के निशान होते। लिना खलिफेह को जिज्ञासा हुई कि सारा के जीवन में क्या चल रहा है। लिना जॉर्डन से वन यंग वर्ल्ड एम्बेसडर हैं। सारा ने लिना को कभी नहीं बताया कि उसके साथ क्या गलत हो रहा है, लेकिन एक दिन उसने पूरी कहानी बता दी। लिना ने पूछा कि वह इसके लिए कुछ करती क्यों नहीं, तो सारा का जवाब कई भारतीय महिलाओं की तरह ही था, ‘लिना यह जॉर्डन है। पुरुषों के दबदबे वाले समाज में मैं क्या कर सकती हूं?’

लिना का बचपन भी मुश्किलों भरा रहा था। ऐसा इसलिए क्योंकि वे भी उसी देश में पली-बढ़ी थीं, जहां लोग केवल पुरुषों के महत्व को मानते थे। लोग सोचते थे कि महिलाओं को बस पति के घर तक सीमित रहना चाहिए। लिना को इस सोच से नफरत थी। उन्हें लगता था कि महिलाएं बिना पुरुषों की मदद के भी जिंदगी जी सकती हैं। लिना की किस्मत अच्छी थी कि उन्हें 5 वर्ष की उम्र में मार्शल आर्ट्स सीखने दिया गया। यही कारण था कि वे बाद में बहुत व्यावहारिक लड़की बनीं।

सारा से मिलने के बाद लिना ने तय किया कि वे अपने घर के बेसमेंट में महिलाओं को आत्मरक्षा (सेल्फ-डिफेंस) का प्रशिक्षण देंगी। उन्होंने अपनी दो दोस्तों को सिखाने से शुरुआत की और उन्हें समझ आया कि जॉर्डन में महिलाओं और पुरुषों की मानसिकता बदलने में समय लगता है। उन्होंने 2012 में महिलाओं के लिए खुद का सेल्फ-डिफेंस स्टूडियो शुरू करने का फैसला लिया, जिसका नाम ‘शीफाइटर’ था। सभी ने उनसे कहा कि वे असफल होंगी, लेकिन उन्होंने निगेटिव कमेंट्स नजरअंदाज किए और वही किया जो दिल को सही लगा। दो साल में ही ‘शीफाइटर’ बहुत सफल हो गया। पूरे जॉर्डन और मिडल ईस्ट में इसने 12 हजार महिलाओं को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कई एनजीओ के साथ मिलकर सीरिया के शरणार्थियों को भी प्रशिक्षण दिया, जिनमें असुरक्षित महिलाओं और टीनएजर्स पर फोकस किया गया।

लिना ने 2014 में स्टूडियो को विस्तार दिया और ‘शीफाइटर’ को तेजी से फैलाने का फैसला लिया। ‘प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण’ (ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स) कोर्स शुरू किए, जिससे स्कूलों, विश्वविद्यालयों और असुरक्षित इलाकों के प्रोजेक्ट्स के लिए प्रशिक्षक भेजना आसान हो गया। सेल्फ-डिफेंस के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर की गई उनकी मेहनत की वजह से उन्होंने वुमन इन ग्लोबल बिजनेस अवॉर्ड में प्रथम पुरस्कार जीता, जो जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में आयोजित किया गया था। इस पुरस्कार से उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंसेस में ‘शीफाइटर’ के बारे में बात करने में मदद मिली।

मई 2015 में उन्हें व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया गया, जहां अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उनके काम की और महिलाओं को सहयोग की तारीफ की। फिर उन्होंने अपने लिए नया लक्ष्य रखा- दुनियाभर में 30 लाख महिलाओं को प्रशिक्षण देना और महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा को रोकने में मदद करना।

मुझे लिना की कहानी तब याद आई जब मुझे बेंगलुरु पुलिस की डीसीपी ईशा पंत के बारे में पता चला, जिन्हें महसूस हुआ कि उनकी फोर्स की महिलाएं डेस्क जॉब में ही उलझी रहती हैं और उन्हें शायद ही कभी फील्ड पर काम करने मिलता है। इसलिए उन्होंने मार्शल आर्ट्स और सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण देना शुरू किया। छह महीने से चल रही इस क्लास को अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली थी और महिलाओं को पुलिस स्टेशन में डेस्क जॉब का काम निपटाकर, घरेलू जिम्मेदारियों के लिए घर भागना पड़ता था। ईशा ने खुद इसमें दखल दिया और उनका उत्साह बढ़ाया। फिलहाल 15 महिला कॉनिस्टेबल को वहां प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ईशा को इनमें से कुछ महिलाओं पर बहुत गर्व है, क्योंकि वे अपने मुक्के या किक में ऐसी तकनीक इस्तेमाल करती हैं, जिससे हमलावर चंद सेकंड में हार जाए। अब ये कॉनिस्टेबल्स स्कूलों और कॉलेजों में युवा लड़कियों, बच्चियों को सेल्फ-डिफेंस के लिए मार्शल आर्ट्स सिखाने जाती हैं। बेशक अभी इनकी संख्या कम है, क्योंकि इस मिथक को तोड़ने में समय लगता है कि लड़कियां कमजोर होती हैं। उनका नारा याद रखिए, ‘गो एंड पंच लाइक ए गर्ल।’ (जाओ और लड़की की तरह मुक्का मारो)

फंडा यह है कि हर पहल छोटी संख्या से ही शुरू होती है, लेकिन खुद पर विश्वास के साथ जिद और जुनून इसे बड़ा बनाता है।

मैनेजमेंट फंडा**

सरोगेसी के जरिए शिल्पा बनीं मां, बेटी का नाम रखा "समिशा'

congrats...

बच्ची के नाम समिशा का अर्थ बताते हुए उन्होंने लिखा,
 स का संस्कृत में मायने सहित होता है और मिशा का रूसी भाषा में अर्थ ईश्वर जैसा होता है। हमारे यहां इस नाम को लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है। हमारी परी को आपके प्यार और दुआओं की दरकार है।’

शिल्पा शेट्टी कुंद्रा ने शुक्रवार को महाशिवरात्रि के पर्व पर अपने फैंस के साथ एक खुशखबरी शेयर की। शिल्पा ने बताया कि बीते 15 फरवरी को उनके घर एक नन्ही परी ने दस्तक दी है। बेटी की नन्ही अंगुलियों की एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ‘ऊं गणेशाय नम:, हमारी प्राथर्नाओं का जवाब मिल गया है। हमें ये बताते हुए खुशी हो रही है कि लिटिल एंजेल ने हमारे घर पर कदम रखा है। समिशा शेट्टी कुंद्रा। समीषा ने 15 फरवरी 2020 को जन्म लिया। घर में जूनियर एसएसके आ गई हैं।’

हालांकि, शिल्पा ने यह क्लीयर नहीं किया कि इस बच्ची का जन्म कैसे हुआ पर भास्कर को पुख्ता जानकारी मिली है कि इसके लिए उन्होंने सरोगेसी की मदद ली है। बता दें कि शिल्पा और राज कुंद्रा इससे पहले भी एक बार पैरेंट्स बन चुके हैं। उनके बेटे का नाम वियान राज कुंद्रा है।

शाहिद पर और क्या बोलीं करीना

 शाहिद ने ही मुझे जब वी मेट करने का सुझाव दिया था। वास्तव में, यह शाहिद था जिसने कहा था कि मुझे इस फिल्म की स्क्रिप्ट सुननी चाहिए। उसने समझाया कि यह शानदार है, लड़की का कैरेक्टर और भी शानदार है और तुम्हें इसे करना चाहिए। उसे वास्तव में इस पूरे प्रोजेक्ट का साथ मिला और हम दोनों ने इस फिल्म को पूरा किया। इस कॉम्बिनेशन से "जब वी मेट' शाहिद और मेरी दोनों की ही अब तक की बेस्ट फिल्म बन गई।'




वीडियो में इंटरव्यू के दौरान करीना कह रही हैं,

 भाग्य के अपने कुछ प्लान होते हैं और जिंदगी उसके हिसाब से चलती है। ‘जब वी मेट’ की शूटिंग के दौरान से लेकर फिल्म ‘टशन’ के बीच में बहुत कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद मैंने और शाहिद ने अपने-अपने रास्ते अलग कर लिए।’

अपने ब्रेकअप के बारे में फिल्म ‘जब भी मेट’ के किरदार गीत का जिक्र करते हुए करीना ने कहा कि उनकी असल जिंदगी और गीत की जिंदगी में काफी चीजें एक जैसी हो रही थीं। वे बोलीं, ‘मेरे लिए उस वक्त पर्सनली और प्रोफेशनली सब हैंडल करना काफी मुश्किल हो रहा था। अगर आप देखेंगे तो फिल्म में जैसे गीत की जिंदगी सेकंड हाफ के बाद बदल जाती है, वैसा ही मेरी जिंदगी में भी फिल्म के बनते वक्त हुआ। इस दौरान मैं ‘टशन’ की भी शूटिंग कर रही थी। ‘टशन’ ने मेरी लाइफ बदल दी क्योंकि इस फिल्म के जरिए मैं अपने लाइफ पार्टनर से मिली थी।’

throwback...

ए क्ट्रेस करीना कपूर खान और शाहिद कपूर का नाम एक समय पर एक दूसरे के साथ जोड़ा जाता था। यह भी खबर थी कि दोनों ने लंबे समय तक एक-दूसरे को डेट किया था पर बाद दोनों का ब्रेकअप हो गया था। हालांकि इस पर करीना और शाहिद ने कभी साफ-साफ नहीं बोला। अब लंबे समय बाद करीना के एक इंटरव्यू का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वो शाहिद के साथ उनकी बॉन्डिंग और उनसे अलग होने के बारे में खुलकर बात कर रही हैं।

वायरल वीडियाे में शादी से पूर्व शाहिद कपूर से अपने ब्रेकअप पर पहली बार बोलती दिखीं करीना...**

‘कंगना की बहन चुभने वाले कमेंट करती है तो करे, मैं क्यों रिएक्ट करूं'**

Âफिल्मों में आपका काम किस तरह का चल रहा है?

इंडस्ट्री में दौड़ने का ठेका मैंने ले रखा है। अभी अपनी अगली फिल्म ‘हसीन दिलरुबा’ की शूटिंग के साथ-साथ स्प्रिंटर की ट्रेनिंग ले रही हूं। एक-डेढ़ महीने बाद ‘रश्मि रॉकेट’ की शूटिंग शुरू करूंगी जिसमें मेरा स्प्रिंटर का रोल है। इसके अलावा मिथाली की बायोपिक "शाबाश मिथु' और "लूप लपेटा' में भी भागती ही दिखूंगी।

Âथिएटर मेंे ‘थप्पड़’ रिलीज करने से पहले आप इसकी कई शहरों में स्क्रीनिंग कर रहे हैं? ये रिस्की नहीं लगता?

इसे अनुभव सिन्हा का कॉन्फिडेंस कह लीजिए। उनका कहना था कि मैं ये पिक्चर दस दिन पहले खाेल दूंगा, लोगों को आकर देखने दो। हमने उन लाेगों को बुलाया जो फिल्मों की समझ रखते हैं और उन्हें फिल्म दिखाकर जुआ खेला।

(तापसी से चर्चा आकाश खरे ने की)

STAR मुलाकात**

क रण जौहर ने अपने बैनर से यह दूसरी हॉरर फिल्म बनाई है। इस फिल्म को उन्होंने अपने असिस्टेंट रहे शशांक खेतान के भी असिस्टेंट भानु प्रताप सिंह से डायरेक्ट करवाया है। बहरहाल भानु की यह फिल्म सच्ची घटना को केंद्र में रखकर फिक्शनलाइज की गई है। घटना नौ साल पुरानी है। जब जुहू बीच पर एमवी विजडम जहाज अचानक आ गया था। भानु को वह घटना अपील कर गई और उन्होंने अपनी कहानी में विशालकाय जहाज ‘सी-बर्ड’ गढ़ा। कहानी में जहाज ओमान से जुहू बीच पहुंचा है। लोगों को सिर्फ इतना मालूम कि वह जहाज हॉन्टेड है। इसी सच्चाई का पता करने का जिम्मा पृथ्वी (विकी कौशल) के हवाले है। वह एक शिपिंग अफसर है। कहानी उसके एक अपराध बोध और नए असाइनमेंट के बीच सफर करती है। पृथ्वी जब इस केस को सुलझाने में जुटता है तो 15 साल पहले वंदना (मेहर विज) के साथ उसी शिप पर हुई एक घटना का खुलासा होता है। इन सबके जरिए दर्शकों को डराने और एंगेज करने की कोशिश की गई है।

डायरेक्टर के पास दर्शकों को डराने के पूरे साजो सामान थे। किरदारों की जिंदगी की उथल-पुथल थी। केतन सोढा का बैकग्राउंड स्कोर था। अनीश जॉन जैसे साउंड डिजाइनर का साथ था। कमी बस राइटिंग में रह गई। फिल्म फर्स्ट हाफ में तो ठीक हैै पर सेकंड हाफ में मुद्दे पर आते ही ढह जाती है। ‘सी-बर्ड’ जहाज से जुड़े राज के सारे पत्ते एक ही बार में खुल जाते हैं। अंत में रही सही कसर भूत भगाने के लिए इस्तेमाल किए गए मंत्रों के जाप से पूरी हो जाती है और फिल्म टिपिकल हॉरर ही बनकर रह जाती है।

पृथ्वी के रोल में विकी वह समां नहीं बांध पाए हैं, जैसी उनसे उम्मीद थी। ‘मसान’ में वह नायक दीपक के दर्द से दर्शकों को अपना साझीदार बना गए थे। यहां पृथ्वी के डर में वे दर्शकों को एंगेज नहीं कर पाए हैं। वैसा ही हाल वंदना बनी मेहर आैर स्पेशल अपीयरेंस में आईं भूमि पेडनेकर के साथ भी हुआ है। यह जरूर है कि डायरेक्टर ने इसे मेलोड्रैमेटिक नहीं होने दिया है। मगर यह सधी हुई भी नहीं बन पाई है। जो मेन विलन भूत है, उसकी डिजाइनिंग और स्टाइलिंग भी असरहीन है। हां, फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर जरूर धारदार है।

ए क कहावत तो सुनी होगी- जाके पांव न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई। कुछ इसी तरह की दो लड़कों के आपसी प्यार और उनके परिवार के बीच उठे जद्दोजहद व पीड़ा पर बनी है फिल्म- ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’। इस कथा-व्यथा को बखूबी वही समझ सकता है, जो इस रास्ते से गुजर रहा हो। टैबू सब्जेक्ट पर कहानियां बननी शुरू हुई हैं, यह अच्छी बात है। फिल्म ‘शुभ मंगल...’ का सार भी यही है। समलैंगिकता विषय पर बनी इस फिल्म की कहानी के अनुसार, कार्तिक (आयुष्मान खुराना), अमन (जीतेंद्र कुमार) से प्यार कर बैठता है। इसी बीच अमन के माता (नीना गुप्ता)-पिता (गजराज राव) उसकी शादी एक लड़की से तय कर रहे होते है, लेकिन अमन समलिंगी होने के कारण वह कार्तिक से प्यार-संबंध में रहना चाहता है। अमन के गे होने की बात उनके माता-पिता को पता चलने पर घर-परिवार में हाय-तौबा मच जाती है। आगे फिल्म देखने के बाद पता चलेगा कि ये दोनों अपने प्यार पर जीत हासिल करते हैं या नहीं। यूथ के लिए बनी इस फिल्म को खूबसूरती से कटाक्ष और कॉमिक रूप में दिखाया गया है।

हितेश केवल्या द्वारा लिखित-निर्देशित यह फिल्म सीधे-सीधे समलैंगिकता का एक संदेश देने में सफल साबित दिखाई देती है, जो नैचुरल है। हम सब समलैंगिकता की बात को सिरे से नकार नहीं सकते। निर्माता-निर्देशक ने बड़ी हिम्मत दिखाई है कि ऐसे विषय-वस्तु पर फिल्म बनाई है। बहुत ही सधे हुए अंदाज में हितेश ने फिल्मांकन कराया है। हमेशा की तरह आयुष्मान ने अपने खास अंदाज में दर्शकों का मनोरंजन किया है। फिल्म में बाकी कलाकारों ने भी अच्छी परफॉर्मेंस दी है। गजराज और नीना एक बार फिर से अपने अभिनय से कमाल कर गए। मनुऋषि चड्‌ढा और सुनीता राजवार भी खूब जमें। आयुष्मान के पार्टनर की रूप बहन के रुप मानवी गगरू ने भी अच्छा काम किया। फिल्म में आज के यूथ और कॉमेडी का अच्छा तालमेल है। डायलॉग्स भी सिचुएशन के हिसाब से बिल्कुल सटीक बैठते है। फिल्म में गाने कम हैं, पर ‘गबरू...’ जैसे गाने कहानी के मुताबिक अच्छे और सार्थक लगे। इसके अलावा ‘अरे प्यार कर ले...’ भी अच्छे तरीके से क्रिएट किया गया है।

Áरेटिंग : * 3/5

Áस्टार कास्ट : आयुष्मान खुराना, जीतेंद्र, नीना गुप्ता

Áडायरेक्टर : हितेश केवल्या

Áप्रोड्यूसर : आनंद एल. राय Áम्यूजिक : तनिष्क बागची

Áरनिंग टाइम: 1 घंटा 57 मिनट

Áरेटिंग :  2.5/5

Áस्टार कास्ट : विकी कौशल, भूमि पेडनेकर, आशुतोष राणा

Áडायरेक्टर : भानु प्रताप सिंह

Áप्रोड्यूसर : करण जौहर, शशांक

Áम्यूजिक : अखिल सचदेवा, केतन Áरनिंग टाइम: 1 घंटा 56 मिनट

देखें या नहीं... सोशल इश्यू पर फिल्म पसंद है तो जरूर देखें।

देखें या नहीं... हॉरर फिल्मों के शौकीन हैं तो देख लें।

अभिनेत्री नोरा फतेही ने हाल ही में पेरिस के ओलंपिया हॉल में परफॉर्म किया है। ओलंपिया के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि किसी बॉलीवुड स्टार ने वहां परफॉर्म किया। बता दें कि ओलंपिया हॉल दशकों से सबसे प्रतिष्ठित कॉन्सर्ट स्थल है। मैडोना, द बीटल्स, जेनेट जैक्सन, बेयॉन्से और टेलर स्विफ्ट जैसे कई अन्य हॉलीवुड सेलेब्य यहां परफॉर्म कर चुके हैं।

पेरिस के ओलंपिया हॉल में नोरा ने किया परफॉर्म

में सरदारों की जरूरत होती है। मैं एक आम इंसान और एक्टर हूं तो आप मुझे कोई भी रोल दे सकते हैं। मैं पगड़ी हटाने और बाल कटवाने के बारे में कभी सोच भी नहीं सकता। अगर मैं अपने धर्म का सम्मान नहीं कर सकता तो मुझे किसी से यह सम्मान पाने की उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए। केवल इसलिए ही मुझे रोल नहीं मिल रहे क्योंकि मैं बाल कटवाने को तैयार नहीं हूं।'

‘फुकरे’ और ‘ड्रीम गर्ल’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुके मंजोत सिंह का दर्द एक बार फिर उभर कर आया है। उनका कहना है, ‘अगर मैं बुरा एक्टर हूं तो मुझे मत चुनो, लेकिन सरदार होने के कारण मुझे मत नकारो। मैं एक सरदार हूं और पगड़ी पहनता हूं। इंडस्ट्री से मेरे पास तभी कॉल आता है जब कहानी

"बुरा एक्टर हूं तो निकालो, सरदार होने की वजह से मत नकारो'


manjot says...

एआर रहमान ने बेटी के बुरका पहनने पर हुए विवाद पर चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने कहा, "मेरे बच्चों की परवरिश इस तरह से हुई है कि खतीजा को अच्छे और बुरे में फर्क पता है और वो जो करना चाहते हैं, उसके लिए स्वतंत्र हैं। खतीजा द्वारा बुरका पहनना एक धार्मिक महत्व से जुड़ा फैसला है और वो इसे पहनना चाहती है इसलिए पहनती है। उसे क्या पहनना है, यह फैसला उसका है।'

खतीजा को क्या पहनना है, यह उसका फैसला: रहमान

एक्ट्रेस सना खान ने हाल ही में कोरियोग्राफर मेलविन लुईस से ब्रेकअप कर लिया है। इस ब्रेकअप की वजह बताते हुए अब सना ने मेलविन पर एक बच्ची को प्रेग्नेंट करने के आरोप लगाए हैं।

वीडियो में खोले राज़

सना हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से लाइव आई थीं। उन्होंने बताया कि किस तरह मेलविन उन पर पाबंदी लगाते थे और उन्हें धोखा देते थे। सना ने बताया कि मेलविन के कई लड़कियों के साथ रिश्ते रह चुके हैं। लाइ‌व वीडियो में ही सना काफी भावुक हो गई थीं, जिसके बाद उन्हें स्ट्रीमिंग खत्म करनी पड़ी।

स्टूडेंट्स से लेते थे पैसे

इसके बाद सना ने एक स्टोरी शेयर कर लिखा, "उसने एक छोटी बच्ची को प्रेग्नेंट किया था, लड़कियों से पैसे लिए और अपनी स्टूडेंट्स के साथ फ्लर्ट किया, क्या एक टीचर को ऐसा होना चाहिए? चरित्रहीन लोग।'

ब्रेकअप के बाद सना ने खोले राज...

"मेलविन ने बच्ची को प्रेग्नेंट किया'

चेन्नई में "इंडियन 2' की शूटिंग के दौरान क्रेन गिरने से हुई तीन लोगों की मौत के बाद तमिलनाडु पुलिस ने कमल हासन और डायरेक्टर शंकर के खिलाफ समन जारी किया है। पुलिस ने इन दोनों के खिलाफ भी आईपीसी की धारा 287, 337 और 304A के तहत मामला दर्ज किया है।

कमल पर दर्ज हुआ लापरवाही का मामला**

indian 2 incident

क मल हासन अभिनीत फिल्म ‘इंडियन 2’ की शूटिंग के समय क्रेन के ऊपरी हिस्से के गिर जाने से तीन तकनीशियनों की मृत्यु हो गई और 15 घायल हो गए। हर स्टूडियो में एंबुलेंस रखी जाती है। घायलों को तुरंत अस्पताल भेज दिया गया। विगत कुछ वर्षों से शूटिंग के समय कलाकारों और तकनीशियनों का बीमा कराया जाता है। कमल हासन ने भी मृतकों के हर परिवार को एक एक-एक करोड़ रुपए देने की घोषणा की है। साथ ही यह भी कहा है कि कोई भी राशि मनुष्य के जीवन के बराबर नहीं होती। उनके द्वारा मृतकों के परिवार को दिया जाने वाला धन महज सहानुभूति अभिव्यक्त करता है। हम दुख के समय उनके साथ खड़े हैं।

मनमोहन देसाई की फिल्म ‘कुली’ के सेट पर हुई दुर्घटना में अमिताभ बच्चन घायल हुए थे और उन्हें चार्टर्ड फ्लाइट से मुंबई लाया गया था। डॉक्टरों की प्रतिभा, अस्पताल के साधन और अमिताभ की दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण वे बच गए। मनमोहन ने दुर्घटना वाले शॉट को फ्रीज करके फिल्म में इस्तेमाल किया। इस शॉट को देखने के लिए दर्शकों में उत्साह रहा। इस तरह दुर्घटना भी बॉक्स ऑफिस पर भुना ली गई। मनोज कुमार की ‘क्रांति’ के लिए एक सेट लगाया गया था, जिसमें पैसे की बचत का ध्यान रखा गया। परिणाम यह हुआ कि शूटिंग के समय वह दीवार भरभराकर गिर गई, इसमें कैमरामैन नरीमन ईरानी की मृत्यु हो गई। उस वक्त नरीमन अमिताभ बच्चन अभिनीत ‘डॉन’ का निर्माण कर रहे थे। सलीम खान ने फिल्म पूरी की और प्रदर्शन से प्राप्त आय दिवंगत कैमरामैन की प|ी को दी।

छोटे शहरों और कस्बों के युवा अपने प्रिय कलाकार की तरह कपड़े पहनने लगते हैं और अपनी चाल-ढाल भी उसी अनुरूप करने लगते हैं। इस तरह कस्बों के अपने दिलीप कुमार, देवानंद और राज कपूर होते हैं। आजकल कस्बाई सलमान और आमिर भी नजर आते हैं। कपड़े और चाल-ढाल के साथ ही युवा अपने नाई से कहते हैं कि उनके बाल फलां सितारे जैसे बना दो। यहां तक कोई विशेष हानि नहीं होती, परंतु जब कस्बाई युवा स्वयं को सचमुच सितारा समझने लगता है तब बहुत नुकसान होता है। नाई की दुकान किस्सागोई का अड्डा होती है। इसे अफवाहों की नर्सरी भी कह सकते हैं। नेताओं के विषय में मजाक भी यहां बनाए जाते हैं। कुछ टीवी एंकर भी यही काम करते हैं। ‘पप्पू कांट डांस साला...’ की तर्ज से प्रेरित जुमला अभी तक उस नेता पर चस्पा है, जबकि वह बदल चुका है।

ज्ञातव्य है कि महबूब खान की ‘मदर इंडिया’ के एक दृश्य की शूटिंग में सुनील दत्त ने नरगिस को झुलसने से बचाया था। इसी घटना से उनकी प्रेम कथा प्रारंभ हुई और उन्होंने शादी कर ली। यह भी दुखद ही रहा कि आर.के.स्टूडियो में एक टेलीविजन सीरियल की शूटिंग हो रही थी। दिवाली के दृश्य के लिए सैकड़ों दीये जलाए गए थे। शूटिंग समाप्त होने पर एक दीया जलता रह गया, जिससे आग लगने के कारण पूरा स्टूडियो खाक हो गया। एक फिल्म विरासत नष्ट हो गई।

फिल्म टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से विकसित हुई है कि एक्शन दृश्य संपादन टेबल पर रखे जाते हैं। कुछ ट्रिक्स कैमरे द्वारा रची जाती है। कुछ लोगों का अनुमान है कि चीन की प्रयोगशाला में केमिकल युद्ध के लिए एक वायरस का विकास किया जा रहा था। दुर्घटना स्वरूप एक जार फूट गया। चीन में हजारों लोगों की मृत्यु हो गई। दुर्घटना कहीं भी हो, आम आदमी ही सबसे अधिक कष्ट पाता है।

इस समय सबसे बड़ी चिंता यह है कि पृथ्वी को बचाना है। विश्व में तापमान रूठी हुई महबूबा की तरह हो गया है। कई देशों के जंगलों में आग लग रही है। पौधारोपण और उनकी रक्षा एकमात्र बीमा है जो हम अपने बचाव में कर सकते हैं। एक वृक्ष को बचाना इस बीमे की एक किस्त चुकाने की तरह हम मान सकते हैं। हिमालय पर इस वर्ष अभी तक बर्फ पिघली नहीं है, परंतु मंदसौर में ओले बरस रहे हैं। आम आदमी अपनी किफायत और बचत की जीवनशैली से पृथ्वी की रक्षा कर सकता है।

परदे के पीछे**

ग्लैमर**

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फरीदाबाद, शनिवार 22 फरवरी, 2020 |

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