बंचारी लोकनृत्य कला के 800 लोकगीतों का लोकग्रंथ और कोर्स तैयार: कुलपति

Faridabad News - लोकगीतों से विश्वविद्यालय में एक वर्ष का कोर्स तैयार किया गया है दुधौला स्थित श्री विश्वकर्मा कौशल विकास...

Feb 16, 2020, 07:15 AM IST
Faridabad News - folk text and course of 800 folk songs of banchari folk dance art prepared vice chancellor
लोकगीतों से विश्वविद्यालय में एक वर्ष का कोर्स तैयार किया गया है

दुधौला स्थित श्री विश्वकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय ने नगाड़े और झांझ के साथ लुप्तप्राय होती जा रही बंचारी की लोकनृत्य कला को सहेजने के लिए एक नया प्रयास किया है। इसने बंचारी गांव जाकर वहां के 800 लोकगीतों का एक लोक ग्रंथ तैयार किया है। इन लोकगीतों से विश्वविद्यालय में एक वर्ष का कोर्स तैयार किया गया है। अब 50 बच्चे इस कोर्स को पूरा कर बंचारी के इस संगीत से पूरी दुनिया में धूम मचाने को तैयार हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति राज नेहरू ने शनिवार को सूरजकुंड मेला में पत्रकारों को यह जानकारी दी। हम संगीत के जरिए देशों की सीमाएं तोड़ रहे हैं।

जिस बंचारी को कोई नहीं पूछता था आज उसी में आजीविका कमाने का मौका है

हम संगीत के जरिए देशों की सीमाएं तोड़ रहे हैं

कुलपति राज नेहरू नेे कहा हम संगीत के जरिए देशों की सीमाएं तोड़ रहे हैं और दिलों को जोडऩे का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा भगवान श्रीकृष्ण के समय से चली आ रही इस बंचारी लोककला पर अभी तक किसी ने ध्यान नहीं दिया था। लेकिन हमने एक वर्ष का जो कोर्स तैयार किया, उसमें बंचारी के इन कलाकारों को शास्त्रीय संगीत, आधुनिक वाद्य यंत्रों और संगीत से जुड़ी कई अन्य बारीकियां सिखाईं। इसका उद्देश्य इनके संगीत को विदेशों और बड़े कार्यक्रमों में प्रस्तुति का ढंग सिखाया। सूरजकुंड मेले में इन कलाकारों ने जब युगांडा के ड्रम के साथ अपनी प्रस्तुति दी तो कला व कलाकारों का नया रूप निखर कर सामने आया।

फरीदाबाद. बंचारी की लोकनृत्य कला के बारे में जानकारी देते श्री विश्वकर्मा कौशल विकास यूनिवर्सिटी के कुलपति राज नेहरू।

कलाकारों को 1000 से 1500 रुपए रोज मिलते

कुलपति नेहरू के अनुसार बंचारी के इन कलाकारों को पहले 400 से 500 रुपए मिलते थे, लेकिन अब इन्हें प्रतिदिन एक हजार से 1500 रुपए मिलते हैं। जिस बंचारी को कोई नहीं पूछता था आज उसी में आजीविका कमाने का मौका मिला है। गुजरात में ये एक सप्ताह अपनी प्रस्तुति देकर आए हैं। गीता जयंती महोत्सव हो या बड़े आयोजन अब इनकी मांग पहले से ज्यादा है। इस दौरान उनके साथ विश्वविद्यालय के बंचारी विभाग के कर्नल डा. एसएस मलिक, डीन प्रोफेसर डा. ज्योति राणा भी मौजूद थे।

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