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यस बैंक में केयू के 100 करोड़ जमा, केयू कर्मियों को सता रहा पीएफ फंसने का डर

एक वर्ष पहले
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यस बैंक के हालातों को देखते हुए केयू कर्मचारियों को अपने पीएफ के पैसे के फंसने का डरा सता रहा है। केयू का यस बैंक में करीब 100 करोड़ रुपए जमा है। नेशनल बैंकों को छोड़कर प्राइवेट बैंक में इतनी बड़ी रकम जमा कराने को लेकर भी अब केयू पर सवाल उठ रहे हैं। केयू प्रशासन का कहना है कि बैंक अधिकारियों से केयू की मीटिंग हुई है। बैंक की तरफ से पैसा सुरक्षित होने का भरोसा दिया है। बता दें कि पिछले कई दिनों से यस बैंक की आर्थिक हालत खस्ता है। ऐसे में इस बैंक को अब आरबीआई और सरकार ने अपने नियंत्रण में लिया है। बैंक के खाताधारकों पर महीने में 50 हजार तक ही निकाल पाने की शर्त लगाई है।

रीजनल कार्यालय से की केयू ने बातचीत : केयू प्रशासन अलर्ट मोड पर है। बताया जाता है कि केयू प्रशासन ने बैंक के रीजनल कार्यालय के अधिकारियों से बातचीत की है। इसमें केयूके जमा पैसों को लेकर जानकारी ली।

केयू के फैसले पर अब सवाल : यस बैंक की हालत खस्ता होने के बाद अब केयू प्रशासन के फैसले पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई कर्मचारियों का कहना है कि केयू में ही राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा है। ऐसे में नेशनल बैंक को छोड़कर इतनी बड़ी रकम प्राइवेट बैंक में जमा कराने का फैसला किसी भी लिहाज से सही नहीं है। कहा कि केयू के वित्त विभाग ने प्राइवेट बैंक में पैसा जमाकर गलत कदम उठाया।

सूची में था बैंक, ब्याज भी ज्यादा : डॉ. शर्मा

केयू प्रवक्ता डॉ. अशोक शर्मा ने बताया क्रेडिट कंट्रोल हरियाणा ने 2013 में एक पत्र जारी किया था। इसमें किन बैंकों में पैसे जमा करवाए जा सकते हैं उनके नाम थे। इस सूची में यस बैंक भी शामिल था। इसी के आधार पर केयू प्रशासन की ओर से उच्चतम ब्याज दरों को देखते हुए यस बैंक में पैसे जमा कराए। पैसे किस बैंक में जमा हो, यह एक कमेटी द्वारा तय किया जाता है। जो ब्याज दरों को देखते हुए फैसला लेती है। यस बैंक की ब्याज दरें सबसे अधिक थी। इसके चलते हैं कर्मचारियों के पीएफ का पैसा इस बैंक में जमा कराया गया। पिछले सात सालों से यह पैसा यस बैंक में जमा है।

1 प्रतिशत तक अधिक ब्याज : केयू का तर्क है कि राष्ट्रीयकृत बैंकों की ओर से 7.1 से 7: 5 प्रतिशत तक ब्याज केयू को ऑफर किया गया। वहीं यस बैंक की ओर से 8.15 से लेकर 8.51 प्रतिशत तक ब्याज ऑफर किया गया। इसी आधार पर केयू की कमेटी ने यह फैसला लिया। डॉ. अशोक शर्मा का कहना है कि बैंक की वित्तीय हालत को देखते हुए बैंक के आला अधिकारियों के साथ केयू प्रशासन की मीटिंग हुई है। जिसमें बैंक प्रबंधन की तरफ से पैसा पूरी तरह से सुरक्षित होने का भरोसा दिया गया है। केयू कर्मचारियों को किसी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है।
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