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मास डेपुटेशन नहीं,अध्यापक संघ का 11 सदस्यीय शिष्टमंडल आज शिक्षा मंत्री से मिलेगा

एक वर्ष पहले
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हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के सैकड़ों पदाधिकारियों का 11 सदस्यीय शिष्टमंडल रविवार 15 मार्च को हरियाणा के शिक्षा मंत्री के कैंप कार्यालय उनके निवास स्थान जगाधरी में उनसे मिलने जाएगा। इस कार्यक्रम की संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए संगठन के राज्य सचिव सतबीर गोयत जिला प्रधान विजेंद्र मोर, सचिव रामपाल शर्मा व कोषाध्यक्ष तरसेम सिंह, राज्य सचिव कंवरजीत व सुशीला शर्मा ने बताया कि विभाग के आला अधिकारी मुद्दों व समस्याओं पर यही संवेदनहीनता का रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि अध्यापकों को 80-90 प्रतिशत परिणाम के टारगेट दिए जा रहे हैं। ठीक है विभाग ही नहीं समाज भी अध्यापकों से बेहतर परिणाम की उम्मीद करता है परंतु क्या शिक्षा मंत्री, प्रधान-सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, निदेशक माध्यमिक एवं मौलिक शिक्षा हरियाणा ने स्वयं के लिए कोई भी टारगेट तय किए हैं। क्या ये आला अधिकारी कोई श्वेत पत्र सार्वजनिक कर सकते हैं कि उनके संज्ञान में कार्यालय में इस मास व इस वर्ष कितने मुद्दे, समस्याएं व लंबित मामले आए एवं उन्होंने कितने प्रतिशत पूर्णतय: हल कर दिए।

अनेक समस्याएं व मांगें तो वर्षों से लंबित पड़ी हैं। हालात ये हैं कि आज 40 हजार से अधिक अध्यापकों व गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के पद रिक्त पड़े हैं, जिन पर भर्ती की कोई योजना नहीं दिख रही। सार्वजनिक शिक्षा व विज्ञान शिक्षा का विस्तार तो दूर, उलटा उसे अलग-अलग नाम से सुकोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में नामांकन कैसे बढ़ पाए, इस पर सरकार व विभाग मौन है। अनुसूचित, पिछड़ी व अन्य जातियों के छात्र-छात्राओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि, वर्दी भत्ता, स्टेशनरी आदि पिछले तीन साल से लाखों बच्चों को नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह डिजिटल हरियाणा का कमाल है यहां तक कि आरटीई के तहत विद्यालयों में सरकार द्वारा भेजी जाने वाली निधियों की राशि तीन वर्ष से नहीं आ रही है। छह साल से हरियाणा सरकार शिक्षा विभाग में एक ही उपलब्धि का गुणगान कर रही है कि उसने आॅनलाइन स्थानांतरण नीति बना दी है परंतु जमीनी स्तर पर स्वयं सरकार व विभाग ही इसकी धज्जियां उड़ा रहे हैं। भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। पैसे के बदले व्यक्तिगत तबादला आदेश जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ित प्राथमिक शिक्षक वर्ष 2016 से न्याय की इंतजार में है और न्यायालय द्वारा मुकद्दमा जीतने के बावजूद 2011 के प्राथमिक शिक्षकों एवं सी एंड वी अध्यापकों के अंतर जिला स्थानांतरण नहीं किए जा रहे हैं। वर्षों से सभी वर्गों की पदोन्नतियां लंबित हैं।

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