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1.15 लाख घरों से कचरा कलेक्शन को नहीं मिले टिपर, 3 साल में पुराने 60 टिपर हुए कंडम
शहरी क्षेत्र में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए महज 60 टिपर हैं। नगर निगम में शामिल 43 गांवों तक टिपर सर्विस अभी तक पहुंची ही नहीं है, वहीं शहर में भी सर्विस लड़खड़ाने लगी है। क्योंकि डिमांड के बावजूद तीन सालों में और टिपर नहीं मिले।
वहीं पुराने टिपर की हालत खट्टारा हो गई। इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि बीते माह 19 टिपर सर्विस के लिए खड़े करने पड़े। इसी तरह हर माह कई टिपर गलियों में कचरा कलेक्शन के बजाए सर्विस में रहते हैं। इनकी मरम्मत से रोज डलने वाले डीजल के अटके बिल भी सर्विस में अड़ंगा बन रहे हैं। हालात ये है कि कई जगह रोज के बजाए टिपर 7 से 20 दिन बाद पहुंच रहे हैं, इसके पीछे टिपर कर्मियों के दो रटे जवाब हैं कि टिपर खराब था या पंप की पेमेंट न होने से डीजल नहीं मिला। 22 वार्डों में यमुनानगर एरिया के 42 और जगाधरी के 18 टिपर लगते हैं। अभी भी छह-सात टिपर खराब खड़े हैं। टिपर की सर्विस के लिए नगर निगम ने जगाधरी के रामा मोटर्स और डीजल के लिए महेंद्रा व चावला फीलिंग स्टेशन को अधिकृत कर रखा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो रामा मोटर्स पर फरवरी में यमुनानगर के 12 व जगाधरी के 7 टिपर की सर्विस हुई, जिसकी पेमेंट अभी नहीं हुई। इसी तरह चावला फीलिंग स्टेशन से टिपर में डलवाए डीजल की करीब 25 लाख पेमेंट बकाया है। ऐसे में टिपर खस्ताहाल होने के साथ डीजल की कमी में टिपर गलियों में रोज नहीं पहुंच पा रहे।
होने चाहिए 120, नए 20 की डिमांड ही अधूरीः नगर निगम सफाई शाखा की मानें तो सर्विंस में यमुनानगर-जगाधरी दोनों शहरों को कवर करने के लिए 120 टिपर होने चाहिए, लेकिन पिछले वर्ष से जारी 20 नए टिपर की मांग पूरी नहीं हुई। जबकि मौजूदा टिपर में कई खट्टारा हो चुके हैं।
नगर निगम ने 2017 में पहले एक करोड़ के बजट में खरीद 10 टिपर से डोर-टू डोर कलेक्शन की सर्विस शुरू की। इसके बाद 4 करोड़ के बजट में 40 और फिर 10 टिपर खरीदे गए। 3 साल में टिपर की हालत कैल प्लांट में कचरा डंप करने के दौरान ज्यादा बिगड़ी। जहां कचरे बने टीलों में टिपर धंस जाते थे। वहीं, समय पर सर्विस न करवा खट्टारा टिपर घसीटने से वह और भी खट्टारा हो गए।
टाइल खपाने में कोई कमी नहीं, रूटीन के कामों में फंड का अड़ंगा: शहर के लोग नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर अंगुली उठा रहे हैं।
उनका कहना है कि निगम में कभी रूटीन के काम के िलए और कर्मियों के वेतन मामले में फंड के लाले पड़े हुए हैं, लेकिन शहर में सड़कों के किनारे टाइल्स को खपाने में का काम दिनरात युद्ध स्तर पर चल रहा है। आखिर इसके लिए निगम के लिए फंड कहां से आ रहा है। जहां पर जरूरत नहीं है वहां पर भी टाइल्स लगाए जा रहे हैं।
हर सड़क व उसके किनारे इंटरलॉक टाइल में बदल रहे हैं। जिस पर पार्षद भी हाउस मीटिंग में आरोप लगा चुके हैं कि एक नेता की टाइल फैक्ट्री की टाइल खपाने के लिए बिन सीवर व पेयजल लाइन के गलियों के टेंडर लग रहे हैं, जिन्हें बाद में फिर से उखाड़ कर लाइने डल रही हैं। यह पैसे की बर्बादी है, जिससे रुटीन के काम व वेतन के लिए फंड का संकट पैदा हो रहा है।
सर्वजनिक हो कि कितना आ रहा डीजल व मेंटेनेंस खर्च ः वार्ड-13 से पार्षद निर्मल चौहान ने कहा कि वार्ड-13, 14, 15 में अभी तक टिपर सर्विस के लिए निजी फर्म को कांट्रेक्ट है, जो तीनों वार्ड में डोर-टू डोर कचरा कलेक्शन के लिए यूजर चार्जिस ले रहीं हैं। जबकि बाकी सभी जगह सर्विस फ्री है। यह तीनों वार्ड के लोगों के साथ अन्याय है। जहां घरों की संख्या ज्यादा है और निम्न व मध्यम वर्ग के लोग ज्यादा है, वहां यूजर चार्जिस लगाया जा रहा है, जो गलत है। टिपर सर्विस में घपले की आशंका है, इसलिए मांग है कि कमेटी गठित कर जांच की जाए। साथ ही इसमें कितना डीजल व मेंटेनेंस खर्च आ रहा है, यह जानकारी भी नगर निगम सार्वजनिक करे।
जगाधरी में 18 टिपर हैं, जिनमें से सिर्फ वार्ड-2 का ही टिपर खराब है, जिसे सर्विस के लिए भेजा है। जहां तक मेनटेनेंस व डीजल के बिलों की बात है, यह पेमेंट नगर निगम से सीधे अधिकृत डीलर को हो रही है।
अमित कांबोज, सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर निगम।
बिल अटकते नहीं, लेकिन कई बार पेमेंट नहीं हो पाती है। मामले को चैक कराएंगे और आगे बकाया बिल व पेमेंट की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
धर्मवीर सिंह, कमिश्नर, नगर निगम।
यमुनानगर | नगर निगम के कंडम हुए टिपर।