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विश्व में 19.5 करोड़ महिलाएं किडनी की समस्या से पीड़ित, लापरवाही हो सकती है जानलेवा: डाॅ. नेहा
निरोगी अस्पताल में किडनी दिवस पर महिलाओं को जागरूक किया गया। अस्पताल के निदेशक हदय व छाती रोग विशेषज्ञ डाॅ. अभिमन्यु अरोन ने बताया कि सीकेडी के नाम से पुकारे जाने वाले रोग का मतलब किडनी का काम करना बंद कर देना होता है । इस रोग के बारे जागरूकता जरूरी है।
वे निरोगी अस्पताल में वर्ल्ड किडनी डे पर बोल रहे थे। मधुमेह और हार्मोन विशेषज्ञ डाॅ. नेहा अरोन ने महिलाओं को इस रोग के बारे में जागरूक किया। कहा कि हमारा शरीर अपने आप में एक अनूठी मशीन है, जिसका हर पुर्जा अपने हिस्से का काम बिना रूके करता रहता है।
लेकिन अगर किसी तरह की लापरवाही हो तो बीमारी अपना सिर उठाने लगती है। एक हिस्से की बीमारी दूसरे अंगों पर भी असर डालती है। उन्होंने कहा कि किडनी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है और इसके प्रति लापरवाही जानलेवा हो सकती है। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में खान-पान और दिनचर्या में बदलाव के चलते दुनियाभर में किडनी की बीमारी से प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
देश में 12 प्रतिशत पुरुष किडनी रोगों से पीड़ित : डाॅ. नेहा ने बताया कि देश में औसतन 14 प्रतिशत महिलाएं और 12 प्रतिशत पुरुष किडनी की समस्या से पीड़ित हैं। पूरे विश्व में 19.5 करोड़ महिलाएं किडनी की समस्या से पीड़ित है। भारत में भी यह संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। यहां हर साल दो लाख लोग इस रोग की चपेट में आते हैं। डाॅ. नेहा ने कहा कि शुरुआती अवस्था में बीमारी को पकड़ पाना मुश्किल होता है, क्योंकि दोनों किडनी 60 प्रतिशत खराब होने के बाद ही मरीज को इसका पता चल पाता है। उन्होंने बताया कि किडनी या गुर्दा राजमा की शक्ल जैसा अंग है, जो पेट के दाएं और बाएं भाग में पीछे की तरफ स्थित होता है। किडनी खराब होने पर शरीर में खून साफ नहीं हो पाता और क्रिएटनिन बढऩे लगता है। यदि दोनों किडनी अपना कार्य करने में सक्षम नहीं हों, तो उसे आम भाषा में किडनी फेल हो जाना कहते हैं।
शाहाबाद | निरोगी अस्पताल में महिलाओं की जांच करती डाॅ. नेहा अरोन।