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‘परमात्मा इस सृष्टि की कर रहा है रक्षा, अपने सत्कर्मों से सुख पाएंगे’

एक वर्ष पहले
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वैदिक यज्ञ समिति के तत्वावधान और परोपकारिणी सभा अजमेर के प्रधान आचार्य वेद पाल के ब्रह्मत्व में ऋग्वेदीय 41वें समारोह का कार्यक्रम आर्य समाज सेक्टर-14 में आयोजित किया गया। जिसके छठे दिवस पर आर्य कन्या गुरुकुल की आचार्या शारदा आर्या के मार्गदर्शन में ब्रह्मचारिणी कन्याओं ने माधुर्ययुक्त वाणी से वेदपाठ किया। आचार्य ने कहा कि यज्ञ के व्यापक अर्थों में पुरुषार्थ भावना से विश्व के जीवों के लिए कल्याण करना है। प्राणिमात्र का कल्याण करना ही यज्ञ का मुख्य उद्देश्य है। जिसमें हवन, अग्निहोत्र, देवयज्ञ आदि भी यज्ञ का भाग है। सम्पूर्ण निष्ठा और प्रभु पर विश्वास करते हुए यज्ञीय कार्य करते रहें। कार्यक्रम में दिल्ली से सतीश कुमार आर्य मंच का कुशल संचालन कर रहे हैं।

आर्य जगत के संगीतर| दिनेश आर्य ने मानव जीवन के कल्याणार्थ गीतों के द्वारा मार्गदर्शन किया जिसमें परमेश्वर की उपासना, महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती का जीवन चरित्र, बलिदानी वीरों की जीवन गाथा, पारिवारिक और सामाजिक विषयों से श्रद्धालुओं को रोमाँचित कर दिया जिन्होंनें बहुत सराहना की। इनके अतिरिक्त कार्यक्रम में आचार्य सन्दीप आर्य, युधिष्ठिर गुगलानी, सुधांशु मित्र, दिनेश आर्य, हरि चन्द स्नेही, अशोक आर्य, प्रभा बत्रा, सुरेश बत्रा, शान्ति भारती, दीक्षा आचार्या, राज गुलाटी, महात्मा वेदमुनि, निर्मल वधवा, जवाहर बत्रा देवकीनंदन ख़ुराना, राम गोपाल भुटानी, रणधीर सिंह ढुल, जवाहर चावला, अर्जुन देव दुरेजा, ज्ञानेश्वर त्यागी, सुरेन्द्र ख़ुराना एवं सैकड़ों श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे।

दो अरब सौ साल से सृष्टि का सृजन कर रहा


आर्य जगत के उच्चतम कोटि के वैदिक विद्वान आचार्य विष्णुमित्र वेदार्थी ने कार्यक्रम में वेदमन्त्र के पश्चात् सम्बोधित करते हुए बताया कि सृष्टि का निर्माण एक अरब छयानवे करोड़ आठ लाख त्रेपन हज़ार एक सौ बीस वर्ष पूर्व से चल रहा है। सृष्टि की तीन आदि सत्तायें परमेश्वर, जीवात्मा और प्रकृति हैं। प्रकृति आदि काल, वर्तमान और भविष्य में भी रहेगी जिसका गुण सत है जबकि जीवात्मा सत और चित अर्थात् चेतन स्वरूप भी है यह कर्म करनें में स्वतन्त्र है किन्तु परमेश्वर की कर्मफ़ल व्यवस्था के आधीन है। जो प्राणी जैसा कर्म करेगा वैसा ही फ़ल प्राप्ति का अधिकारी होगा अतः मनुष्यमात्र को सुकर्म करने आवश्यक हैं। पुरुषार्थ द्वारा किये गए कर्मों से ही मोक्ष सम्भव है।

सोनीपत. वैदिक कथा में श्रोता व राजीव जैन।

सोनीपत. वैदिक कथा में प्रवक्ता।
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