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‘भक्त छल कपट रहित हो तो भगवत की कृपा जरूर होती है’
कृष्ण प्रणामी गौशाला बनसुधार में स्वामी नित्यानंद गिरी महाराज कैलाश आश्रम ऋषिकेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा श्रवण करवाते हुए कहा कि हमें गाय को आम जानवर की तरह नहीं समझना चाहिए । गाय की महिमा हर काल में गाई गई है । गौ माता के अंदर 33 कोटी के देवता वास करते हैं । जैसे गोबर में मां लक्ष्मी जी का वास , मुख में कन्हैया का वास होता है, ग्रहस्तजीवन में सभी गृहणियों को सर्वप्रथम रोटी गाय की और अंतिम रोटी कुत्ते की निकालनी चाहिये जिससे घर में सुख शांति , कलह शांत होती है और मां लक्ष्मी का वास होता है आजकल गाय माता की सबसे ज्यादा बेकद्री हो रही है यदि सभी हिंदू घरों में एक एक गाय पालने का संकल्प ले तो इस समस्या से निजात पाई जा सकती है ।
महाराज जी ने आगे बताया की बेटियां भगवान का अमूल्य उपहार है उनकी भ्रूण हत्या नहीं करनी चाहिए । माता बहने कन्याओं को बोझ न समझे । स्वामी ने आगे बताया कि जो व्यक्ति नशा करता है । उसका 21 दिन संग करने से दूसरा व्यक्ति भी उसके जैसे ही हो जाता है । किसी अच्छे व्यक्ति का संग करने से बुराई को छोड़ा भी जा सकता है । नशे से शरीर में अविकार पैदा होते हैं आदमी चोरी, डकैती , लूट , जैसी घटनाओं को अंजाम देता है । अंत में स्वामी जी ने कहां की भगवान ही एक ऐसी शक्ति है जो नाम जप करने से खुश होते हैं । मनुष्य जीवन अपना कल्याण के लिए भगवान को अपना प्रिय समझे और उनकी मर्जी में अपनी मर्जी मिला दे तो दुखों का रास्ता कभी देखना ही नही पड़ेगा । इसी दौरान रोजाना प्रातः काल व साय काल में पंडित हरिओम पतंजलि योग शिविर के द्वारा योगा करवाया जाता है । इसके पश्चात सदाशिव स्वामी नित्यानंद गिरी जी महाराज द्वारा 18 मार्च से गांव फूलका में स्कंद पुराण की कथा का आयोजन करेंगे ।
मित्तल ने जरूरतमंदों के लिए लंगर भंडारा लगाया
सिरसा| सेवा कार्यों में सतत कार्यशील संस्था श्याम मुरारी निस्वार्थ सेवा संस्थान द्वारा अध्यक्ष व समाजसेवी सुमन मित्तल ने अरोड़वंश चौक स्थित हरिभोजन में जरूरतमंदों हेतु लंगर भंडारा लगाया गया। सुमन मित्तल ने कहा कि अपने बच्चों का जन्मदिन और सालगिरह परिवार और मित्रों के साथ तो सभी मनाते हैं, पर यह शुभ दिन उन लोगों के साथ मनाना जिनको दोनों समय भरपेट भोजन भी नहीं मिलता एक अद्भुत संतुष्टि देता है। संरक्षक सुभाष वर्मा ने कहा कि सुमन मित्तल और परिवारजनों द्वारा भाई की सालगिरह और दामाद के जन्मदिन पर जरूरतमन्द लोगों को अपने हाथों से भोजन करवाकर मनाना पाश्चात्य संस्कृति से ओतप्रोत समाज को एक नया संदेश देने का अनूठा प्रयास है और श्याम मुरारी संस्था के सदस्यों द्वारा इसी तरह शुभ अवसरों पर इस तरह के सेवा कार्य निरंतर होते है।