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49 जोन हाथोंहाथ बिके, 23 जोन को ठेकेदार नहीं मिलने से बढ़ी अधिकारियों की बेचैनी
आबकारी व कराधान विभाग शुक्रवार को शराब ठेको की गई ई-नीलामी में इस बार बड़ी संख्या में ठेकों को मालिक नहीं मिल पाए। जिससे संबंधित अधिकारियों की बेचैनी बढ़ गई है। विभाग द्वारा कुल 72 जोन बनाया गया है, जिसमें 49 जोन तो हाथोंहाथ बिक गए, लेकिन 23 जोन के ठेकों में ठेकेदारों ने रुचि नहीं दिखाई। हालांकि इसके बाद भी जिन ठेकों की बोली लगी है, उसमें ही विभाग का दावा है कि साढ़े 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस बार सबसे महंगा ठेका जोन नंबर-16 कुंडली की बिका है। यह ठेका 18 करोड़ 91 लाख 11 हजार रुपए में बिका है। जबकि पिछले साल यह ठेका 15 करोड़ रुपए में बिका था। यह जिले का सबसे महंगा है।
वहीं दूसरी ओर जिले में जोन नंबर-56 की बोली अविश्वसनीय बढ़ोतरी हुई है। जिसकी इतनी ऊँची पर बोली लगने से अधिकारी और कर्मचारी भी हैरान हैं। विभाग द्वारा हर साल यूं तो टॉप-3 की लिस्टिंग की जाती है, लेकिन इस बार सूची में चौथे जोन की भी सूची तैयार की गई है। वहीं दूसरी ओर ठेकों की बोली नहीं होने से कर्मचारियों में बेचैनी है। तीन सालों में पहली बार ऐसा हुआ है जब इतनी बड़ी संख्या में जोन नहीं बिक हैं। इसका सीधा असर राजस्व पर पड़ता है। पहले बोली में कुल रिजर्व प्राइस भी नहीं निकल पाया है। हालांकि बिके हुए ठेकों की तुलना में वृद्धि हुई है।
बचे जोन की यह प्रक्रिया अपनाई जाएगी
विभाग द्वारा इस बार दो ठेकों का जोन बनाया गया था। जिसकी वजह से कुल 72 जोन बने थे। इसमें 49 जोन की बिक्री 193 करोड़ रुपए में हुई है। जबकि 23 जोन की बिक्री नहीं हो सकी है। इन जोन की बिक्री के लिए मुख्यालय से अनुमति मांगी गई है। आदेश मिलने के बाद विभाग द्वारा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
टॉप-4 में बिकने वाले जोन
शराब ठेकेदार ने सबसे अधिक बोली जोन नंबर-16 कुंडली की लगाया। वहीं दूसरे नंबर पर जोन नंबर-60 नाथूपुर सबोली का ठेका रहा। जिसे सात करोड़ 50 लाख रुपए में खरीदा गया। तीसरे नंबर पर जोन नंबर-40 फिरोजपुर बांगड़ जोन रहा। जिसके लिए विभाग को सात करोड़ 25 लाख 21 हजार रुपए का राजस्व मिला है। वहीं सबसे अधिक एक साल में जोन नंबर-56 शामड़ी जोन 125 गुना बढ़ गया। यह जोन पिछले साल करोड़ 90 लाख में बिका था। जिसे इस बार ठेकेदार ने चार करोड़ 11 लाख रुपए में खरीदा है।
ठेकों की बिक्री को लेकर कोई संशय नहीं है। सभी ठेके बेचे जाएंगे। पहले चरण में जो नहीं बिका, उनकी ऑक्शन के लिए मुख्यालय से अनुमति मांगी गई है। पिछले साल की तुलना में इस बढ़ोतरी पर ठेकों को बेच गया है। -नरेश कुमार, डीईटीसी सोनीपत।
सोनीपत. नीलामी में हिस्सा लेते ठेकेदार और अधिकारी।