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फैक्ट्री हादसे मेंे घायल संचालक राजन जैन की 11 दिन बाद इलाज के दाैरान माैत
मॉडल इंडस्ट्रियल इस्टेट (एमआइई) के पार्ट-बी में 28 फरवरी की दोपहर केमिकल फैक्ट्री में बॉयलर फटने से लगी अाग के कारण अाठ श्रमिकों के मारे जाने के बाद अब कैमिकल फैक्ट्री के मालिक राजन जैन की भी दिल्ली के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। मंगलवार को उसका अंतिम संस्कार भी दिल्ली में कर दिया गया। इस तरह से एमअाईई क्षेत्र में हुए इस धमाके के कारण मरने वालो की संख्या अाठ से बढ़कर नौ हो गई है। बहादुरगढ़ पुलिस के पास भी इसकी सूचना पहुंच गई है। अब इस मामले में केस के प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है क्योंकि श्रमिकों के साथ-साथ अन्य साथ की फैक्ट्रियों के मालिकों ने भी राजन जैन के खिलाफ ही पुलिस को शिकायत की हुई है। जिसमें पड़ौसी फैक्ट्री संचालक राजकुमार की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज करके अन्य फैक्ट्रियों के संचालकों की शिकायतों को इसी शिकायत के साथ जोड़ते हुए जांच का काम शुरू किया है।
34 कर्मचारी हुए थे घायल
इस घटना में 34 कर्मचारी घायल हो गए थे। उन्हें अब अस्पतालों से छुट्टी मिल चुकी है। जानकारी के अनुसार, 1816 नंबर की फैक्टरी में बॉयलर फटने का धमाका इतना तेज था कि उसकी आवाज दो किलोमीटर तक सुनाई दी। धमाके की आवाज सुनकर आसपास की कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी सड़कों पर आ गए थे। चारों तरफ मलबा होने के कारण डीसी जितेंद्र सिंह दहिया ने गाजियाबाद से एनडीआरएफ और भोंडसी से एसडीआरएफ की टीम को भी बुलाया था। सूचना मिलते ही डीसी, डीआईजी के अलावा कई विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंच थे।
पांच शवाें के डीएनए सैंपल के लिए भेजे थे: गौरततलब है कि इस वजह से चार अन्य फैक्टरियां जमींदोज हो गईं थी, जबकि इनके सामने स्थित तीन फैक्टरियों में आग लग गई। इनसे कुछ दूरी पर स्थित जूते की फैक्ट्री भी जल कर नष्ट हो गई थी। इस तरह हादसे में सात फैक्टरियों को नुकसान पहुंचा था। बहादुरगढ़, दिल्ली और सोनीपत की 13 दमकल गाड़ियों ने कई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था। व करीब पांच दिनों तक एनडीअारएफ व एसडीअारएफ के साथ साथ स्थानीय पुलिस ने मिलकर सर्च अभियान चलाय था। जिसमें फैक्ट्रियों के मलबे से अाठ श्रमिकों के शव निकले थे। जिनमें से दो शव को टुकड़ों की हालत में थे। बाद में तीन श्रमिकों की पहचान होने पर शव उनके परिजनों को सौंप दिए थे। शवों की ठीक से पहचान नहीं होने पर संख्या पांच मानते हुए सभी का एक साथ अंतिम संस्कार करवा दिया गया था। सभी के डीएनए के सैंपल भेजे गए थे। जिसमें जो भी डीएनए किसी के साथ मैच करेंगे उनकी पहचान मान ली जाएगी व अन्य दो जो गायब हैं दो शवों को उनका मान लिया जाएगा।
अाश्रिताें काे न्याय दिलवाना
न्यायिक जांच का मकसद यही है कि किन खामियों के चलते यह हादसा हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। किस-किस विभाग की क्या जिम्मेदारी थी। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाई या नहीं है। इसके साथ ही जो कामगार इस हादसे में मारे गए और जो घायल हुए हैं, उन सभी के परिवारों को न्याय दिलवाना भी इसका उद्देश्य है।
-तरुण पावरिया, एसडीएम एवं न्यायिक जांच अधिकारी
एमआईई में हुए हादसे की फाइल फोटो।