पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

मांगों को लेकर आशा वर्करों ने दिया धरना

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिले की आशा वर्करों ने सरकार के खिलाफ बुधवार धरना दिया। आशा वर्करों ने सिविल अस्पताल के प्रांगण में धरना दिया और कहा कि जब तक मांगे पूरी नहीं हो जाती है धरने से नहीं उठेंगी। धरने की अध्यक्षता पूनम व पूनम छारा ने की। जबकि धरने का संचालन अनिल भागलपुरी ने किया। धरने को सं‍बोधित करते हुए उक्त तीनों नेताओं ने सरकार पर आशा वर्करों के साथ वायदा खिलाफी करने का आरोप लगाया। इनकी मांग थी कि सरकार आशा वर्करों के हित मेें 2018 में जारी किए गए नोटिफिकेशन को हूबहू लागू करे। साल 2018 में स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई उनके संगठन की बातचीत में केवल 4000 रुपए फिक्स किए गए थे, वहीं मिल रहे हैं। जबकि उनकी अन्य मांगें पेंडिंग पड़ी हैं। जिसे जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। संगठन की प्रदेशाध्यक्ष प्रवेश मातनहेल ने कहा कि सरकार आशा वर्करों को रूटीन की एक्टीविटी के 50 प्रतिशत वापस दें। आशा वर्करों को उनके सेंटर पर बैठने का स्थान दें। हाजिरी रजिस्टर के साथ-साथ आशा वर्करों को हर सेंटर पर 5-6 तरह की दवाइयां उपलब्ध कराएं और जब तक आशा वर्कर शारीरिक रूप से फिट है उसे काम पर रखा जाए। आशा वर्करों ने तय किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं कर देती तब तक वह हर रोज दो घंटे धरना देंगी।

मांगों को लेकर सीएमओ दफ्तर के सामने धरना देतीं आशा वर्कर।
खबरें और भी हैं...