गेहूं की बाल से पेंटिंग कर गढ़ शरनाई के अशोक ने बनाई पहचान

Yamunanagar News - अभी तक आपने पेंट-ब्रश लेकर पेंटिंग करते ही कलाकार देखे होंगे, लेकिन पानीपत के गढ़ शरनाई गांव निवासी अशोक कुमार वह...

Feb 15, 2020, 08:56 AM IST

अभी तक आपने पेंट-ब्रश लेकर पेंटिंग करते ही कलाकार देखे होंगे, लेकिन पानीपत के गढ़ शरनाई गांव निवासी अशोक कुमार वह व्यक्ति हैं जो ब्रश का इस्तेमाल अपनी वुड कर्लिंग में नहीं करते। गेहूं की बाल (बालन) से वुड पर शानदार कलाकृति बनाने मे महारथ हासिल है। इसी कला ने इनको कला जगत में विशेष पहचान दिलाई है। दो से डेढ़ माह में एक कलाकृति तैयार होती है। इसकी मार्केट में अच्छी मांग भी है। अशोक बेहतरीन कला के लिए दो बार स्टेट अवाॅर्ड जीत चुके हैं। दाेनों बार इनको 25-25 हजार रुपए नकद पुरस्कार दिया गया। आइफा अवाॅर्ड विजेता भी हैं। अनाज मंडी जगाधरी में राज्य स्तरीय सरस मेले में उन्होंने स्टाॅल लगाया है। यहां सजावटी फूल व फूलदान प्रदर्शित किए हैं। उनके स्टाल पर अच्छी भीड़ रहती है। अशोक कुमार प्रजापत परिवार में शोभाराम के घर जन्मे हैं। बचपन मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाने में बीता। मिट्‌टी के भी आकर्षक सामान तैयार करते रहे हैं।

ये भी है विशेषता| अशाेक कुमार बताते हैं कि पानी में तैरता कछुआ उन्होंने बनाया। ये कला थाइलैंड में सीखी थी। इसके साथ ही दीया तैयार किया जो पानी में बुझता नहीं है। एक बार जला दीया जाए तो कितने भी पानी में डालो नहीं बुझेगा। इसी तरह सुराही ऐसी तैयार की जिसमें पानी डालो कभी गर्म नहीं होता। हमेशा ठंडा रहता है। कितनी भी गर्मी क्यों न हो जाए, पानी ठंडा ही मिलेगा।

इनके भाई भी कला में माहिर| अशोक के अनुसार भाई संदीप, कर्मचंद, धर्मवीर इस कला में निपुण हैं। इनका भाई दिलीप कुमार पुलिस पब्लिक स्कूल में कला अध्यापक हैं। वे भी बच्चों को इस कला को सिखा रहे हैं।

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