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आजादी से पूर्व थी कलसिया रियासत की राजधानी उपमंडल के मानक पूरे फिर भी तहसील 

एक वर्ष पहले
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2019 के विधानसभा चुनावों की दस्तक के साथ ही यमुनानगर के छछरौली को बिलासपुर व रादौर की तर्ज पर उपमंडल बनाने की लंबे अर्से से चली आ रही मांग अब फिर से उठने लगी है। छछरौली (ब्लॉक)भले ही आज तहसील हो, लेकिन आजादी से पूर्व छछरौली कलसिया रियासत की राजधानी था, लेकिन रियासतें भंग होने के बाद अब यह तहसील बनकर रह गया। हरियाणा के अस्तित्व में आने के बाद कई जिले, मंडल व उपमंडल बने लेकिन छछरौली को उसका पुराना सम्मान आज तक नहीं मिल सका। यह टीस यहां के लोगों में दशकों से बनी है। आजादी के बाद छछरौली नगरपालिका में तब्दील हो गया था, लेकिन सन 2000 में तत्कालीन चौटाला सरकार ने उसे भंग कर दिया और फिर से छछरौली तहसील में तब्दील हो गया। 2005 के विस चुनावों के बाद छछरौली विस क्षेत्र का अस्तित्व भी खत्म कर दिया गया। बाद में इसका ज्यादातर हिस्सा जगाधरी विस क्षेत्र में शामिल हो गया। 2008 में छछरौली तहसील को बिलासपुर उपमंडल के साथ जोड़ा गया है। यहां के लोगों का कहना है कि बिलासपुर उपमंडल पर अत्याधिक बोझ होने के कारण छछरौली की कानूनी व्यवस्था पर बिलासपुर उपमंडल अधिकारी ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते। उन्हें अपने सरकारी कामकाज के लिए कई किलोमीटर का सफर तय कर बिलासपुर उपमंडल जाना पड़ता है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान होता है। यहां के निवासियों का कहना है कि छछरौली को सबडिवीजन बनाया जाए।

छछरौली तहसील में मौजूद वन राजिक कार्यालय
वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं
जरूरत क्यों?
बिलासपुर के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है
छछरौली तहसील करीब 40 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैली है। छछरौली के आखिरी गांव फैजाबाद की दूरी बिलासपुर से 40 किमी है। तीन बड़े गांव खारवन आबादी करीब 7 हजार, डारपुर की आबादी करीब 4 हजार व जाटोवालां जिसकी आबादी करीब 2500 है। यहां के लोगों को अपने सरकारी कामकाज के लिए बिलासपुर जाने के लिए दो-तीन बसों को बदलना पड़ता है। कुछ अन्य गांव मंडौली, गागड़पुर की दूरी भी करीब इतनी ही है। इसके अलावा गांव कलेसर पूर्व में छछरौली से लगभग 35 किमी दूरी पर, नत्थनपुर दक्षिण में लगभग 15 किमी दूर, चिक्कन उत्तर में छछरौली से लगभग 30 किमी दूर, डारपुर उत्तर में छछरोली से लगभग 25 किमी दूर, गाढ़वाली उत्तर में छछरौली से लगभग 30 किमी दूर, मुंडाखेड़ा पश्चिम में 5 किमी दूर छछरौली, कट्टरवाली उत्तर में छछरौली से लगभग 20 किमी दूर, भगवानपुर पश्चिम में छछरौली से 10 किमी दूर, जयरामपुर दक्षिण में छछरौली से लगभग 15 किमी दूर, नवाजपुर दक्षिण में ब्लॉक छछरौली से 25 किमी दूर हैं। इस हिसाब से यहां के बाशिंदों को अपने सरकारी कामकाज के लिए बिलासपुर उपमंडल पहुंचने के लिए करीब 10 से 15 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है।

छछरौली के आखिरी गांव फैजाबाद की दूरी बिलासपुर से 40 किलोमीटर दूर है

इसलिए दावा?
भौगोलिक क्षेत्र- आबादी करीब दो लाख, 125 पंचायतें, 157 गांव
छछरौली यमुनानगर का सबसे पिछड़ा क्षेत्र है। छछरौली की वर्तमान आबादी करीब दो लाख है। छछरौली तहसील में कुल 100 गांव व 78 पंचायतें हैं। छछरौली तहसील करीब 40 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैली है। खिजराबाद इसकी उपतहसील है जिसमें कुल 57 गांव शामिल हैं और 47 पंचायतें, 10 पटवार हैं। यहां 14 औद्योगिक इकाई हैं। करीब 200 अनियमित कॉलोनियां हैं। यहां 14 सरकारी दफ्तर हैं जैसे बीडीपीओ, बीईओ, सीडीपीओ, एसडीओ, तहसील, खजाना व एक पुलिस थाना। यहां एक कन्या विश्वविद्यालय भी है। गांव डारपुर जोकि फॉरेस्ट का बहुत बड़ा क्षेत्र है, यहां पर वन विभाग का बहुत पहले से बना रेस्ट हाउस भी है। डारपुर हिमाचल प्रदेश से सटा गांव होने के कारण यह दोनों प्रदेशों के दर्जनों गांवों की मार्केट का दर्जा लिए हुए है। यहां एक खेल स्टेडियम भी है, लेकिन सही रख-रखाव न होने के चलते कूड़ाघर बनकर रह गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार के पास यहां खुद की 10 एकड़ जमीन भी है जबकि बिलासपुर को उपमंडल बनाने के दौरान सरकार को जमीन का अधिग्रहण करना पड़ा था। भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक छछरौली उपमंडल बनने की लगभग सभी शर्तें पूरी करता है।

भौगोलिक संरचना के मुताबिक उपमंडल की शर्तंे लगभग पूरी करता है छछरौली

157
कुल गांव

2
लाख आबादी

125
पंचायतें

ये प्रशासनिक मानक
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने किसी भी क्षेत्र को उपमंडल का दर्जा दिए जाने के लिए कुछ प्रशासनिक मानक तय कर रखे हैं।

क्षेत्र में एक उप तहसील होनी चाहिए।

क्षेत्र की आबादी करीब दो लाख से ज्यादा होनी चाहिए।

क्षेत्रफल 15 हेक्टेयर होना चाहिए।

क्षेत्र के अधीन कम से कम 40 गांव होने चाहिए।

क्षेत्र में कम से कम 15 पटवार होने चाहिएं।

क्षेत्र की डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर से दूरी कम से कम 10 किमी होनी चाहिए।

अम्बाला डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के एडवोकेट ओपी शर्मा ने बताया कि अम्बाला कैंट और सिटी में महज 7-8 किमी का फासला था फिर कैंट को सब डिवीजन का दर्जा दिया गया।

विस चुनाव की दस्तक के साथ ही छछरौली को बिलासपुर व रादौर की तर्ज पर सब डिवीजन बनाने की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी
छछरौली का किला, जिसमें अब कन्या स्कूल चल रहा है।

इतिहास : राजा रवि शेर सिंह की रियासत थी

छछरौली से जुड़ी खास बात यह है कि देश की आजादी से पूर्व छछरौली कलसिया रियासत की राजधानी थी। सरदार गुरबख्श सिंह ने 1760 ई में यहां अपनी रियासत स्थापित की थी जो 435 वर्ग किलोमीटर में फैली थी। इस रियासत के अधीन 181 गांव थे। डेराबसी रियासत की तहसील थी। उस समय यहां अदालतें, खजाना, म्युनिसिपल दफ्तर आदि किले में ही होता था। रियासत को सरदार सरकार के नाम से जाना जाता था। 1908 में इसके सरदारों को राजा का दर्जा मिला। बाद में इस रियासत को राजा रवि शेर सिंह कलसिया के नाम से जाना जाने लगा। रियासतें भंग होने के बाद छछरौली अपना वजूद खो बैठी।

अभी यमुनानगर में हैं तीन उपमंडल... अक्टूबर 2016 में राज्य सरकार की ओर से 11 उपमंडल घोषित किए गए थे जिनमें यमुनानगर में रादौर व अम्बाला छावनी भी शामिल थे। हैरानी की बात है कि अम्बाला छावनी को तहसील का दर्जा भी साथ ही दिया गया था, जबकि आज से करीब 38 साल में पहले मई 1981 को छछरौली को तहसील का दर्जा दिया गया था। फिलहाल यमुनानगर में तीन सब डिवीजन जगाधरी, रादौर व बिलासपुर हैं। जगाधरी को सबडिवीजन 1966 में हरियाणा गठन के दौरान बना दिया गया था जबकि बिलासपुर को 11 साल पहले अगस्त 2008 में हुड्‌डा सरकार ने उपमंडल का दर्जा दिया था। गत वर्ष में जनवरी 2018 में राज्य सरकार ने कुरुक्षेत्र के लाडवा को उपमंडल का दिया गया था।

2017 में खिजराबाद बनी थी उपतहसील... छछरौली तहसील में कुल 157 गांव थे। सन 2017 में छछरौली तहसील के 59 गांवों को अलग कर खिजराबाद को उपतहसील बना दिया गया जिससे छछरौली तहसील में कुल 98 गांव रह गए, लेकिन गांव डारपुर से खिजराबाद पहुंचने के लिए कोई सीधी बस सर्विस न होने से ग्रामीणों को परेशानी होने लगी। डारपुर से खिजराबाद पहुंचने के लिए ग्रामीणों को बरसात के दिनों में तीन नदियों शहजादवाला, खिलौवाला व जाटोंवाला को पार करना हो ता है। जाटोंवाला गांव के बाशिदों को भी ऐसी ही कई परेशानियां उठानी पड़ रही थीं जिसके बाद नवंबर 2018 में सरकार के नए आदेश के मुताबिक डारपुर व जाटोंवाला को फिर से छछरौली तहसील में शामिल किए जाने से छछरौली के गांवों की संख्या बढ़कर 100 हो गई।

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