सीडीएलयू: खिलाड़ियाें को मिलेगी खेल किट, प्रोसेस शुरू

Sirsa News - चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी और इससे संबंधित कॉलेजाें के उन खिलाड़ियाें के लिए अच्छी खबर है जिन्हें शिक्षा सत्र 2016-17...

Oct 12, 2019, 08:46 AM IST
चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी और इससे संबंधित कॉलेजाें के उन खिलाड़ियाें के लिए अच्छी खबर है जिन्हें शिक्षा सत्र 2016-17 और 2017-18 के दौरान खेल किट, ट्रैक सूट नहीं मिल पाए थे। सीडीएलयू प्रशासन ने खेेल किट और ट्रैक सूट मंगवा लिए हैं। सामान वितरित करने के लिए यूनिवर्सिटी के सभी विभागाें और सभी संबंधित कॉलेजाें के प्रिंसिपल को पत्र भी भेज दिया है।

सीडीएलयू स्पोर्ट्स काउंसिल के सदस्य सचिव डॉ. अशोक शर्मा ने यूनिवर्सिटी कैंपस स्थित सभी विभागाध्यक्षों और संबंधित कॉलेजों के प्रिंसिपल को पत्र भेजकर कहा है कि शिक्षा सत्र 2016-17 और 2017-18 के खिलाड़ी, टीम मैनेजर, कोच अपनी स्पोर्ट्स किट और ट्रैक सूट प्राप्त कर लें। इसके लिए खिलाड़ियों को पहचान पत्र, संबंधित प्रिंसिपल से ऑथोराइजेशन पत्र और पासपोर्ट साइज फोटो लानी होगी।

ऑडिट ने लगाया था ऑब्जेक्शन, क्लीयर होने पर मंगवाया सामान : चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी और संबंधित काॅलेजाें के खिलाड़ियों के लिए खेल किट खरीदने की प्रक्रिया इतनी धीमी चली कि फाइल ऑडिट ब्रांच तक पहुंचते-पहुंचते तीन साल लग गए। पिछले वर्ष अगस्त-सितंबर में ऑडिट ब्रांच के अधिकारियों ने ने यह कहते हुए ऑब्जेक्शन लगा दिया कि जाे विद्यार्थी तीन साल पहले पासआउट हो चुके हैं उन्हें किट क्याें दी जाए? इस पर रजिस्ट्रार ने सीडीएलयू खेल परिषद से स्पष्टीकरण भी तलब किया था। बाद में ऑब्जेक्शन क्लीयर हुआ।

ये है नियम

सीडीएलयू की ओर से हर वर्ष खेल आयोजन होते हैं। साथ ही दूसरी यूनिवर्सिटी में भी सीडीएलयू और इससे संबंधित कॉलेजों के विद्यार्थी भाग लेने जाते हैं। नियम है कि इन खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ियों काे सीडीएलयू प्रशासन स्पोर्ट्स काउंसिल के माध्यम से खेल किट उपलब्ध करवाएगा। किट में खिलाड़ी के खेल से संबंधित ट्रैक सूट सहित अन्य सामान होता है। लेकिन सीडीएलयू प्रशासन तीन साल से खेल किट की खरीद ही नहीं कर पाया।

250 से ज्यादा विद्यार्थियाें का हुआ था नुकसान

खिलाड़ियों को हर वर्ष खेल किट वितरित करनी होती है। लेकिन शिक्षा सत्र 2016-17 आैर 2017-18 के 250 से अधिक विद्यार्थियाें को खेल किट नहीं मिली। हर साल का बजट करीब 8 लाख रुपये का हाेता है। इस हिसाब से तीन वर्ष का 16 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

पत्र लिख दिया : प्रो. सिवाच


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