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जागरूकता के अभाव में बढ़ रहे बाल विवाह के मामले, पिछले वर्ष आई 59 शिकायतें
जिला में बाल विवाह रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। पिछले 15 माह में आठ नाबालिग बालिका वधू बन चुकी हैं, जबकि 63 नाबालिग की शादी प्रशासन रुकवाने में कामयाब रहा है। पिछले नौ वर्षों में 377 बाल विवाह रुकवाए जा चुके हैं। वर्ष 2017 में बालिका वधू बनने के केवल तीन मामले सामने थे। इन वर्षों में दोबारा बाल विवाह के मामलों में वृद्धि दर्ज हुई।
बाल विवाह संरक्षण विभाग के मुताबिक लोगों में जागरूकता के अभाव से बाल विवाह के मामले ज्यादा बढ़े हैं। हालांकि विभाग की ओर से बाल विवाह रुकवाने के साथ-साथ माता-पिता से भविष्य में बच्चों के बालिग होने तक विवाह नहीं करने का शपथ पत्र भरवाया जाता है। बाल विवाह में भाग लेना या मदद करने वाला भी अपराध की श्रेणी में आता है और उसे भी सजा हो सकती है। सिरसा में ग्रामीण क्षेत्रों से बाल विवाह की शिकायतें सबसे ज्यादा आ रही हैं। वर्ष 2019 में बाल विवाह की 59 शिकायतें प्रशासन के पास आई हैं। जिनमंे 45 शादी रुकवाई हैं और 3 पर केस दर्ज करवाया गया है।
बाल विवाह रोकने की मुहिम में आगे आएं
बाल विवाह की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, सूचना मिलते ही तुरंत पुलिस के सहयोग से मौके पर पहुंचकर शादी रुकवा दी जाती है। नाबालिग के अभिभावकों से लिखित में शपथ पत्र लिया जाता है कि बालिग होने पर ही शादी करवाएंगे। बाल विवाह रुकवाने में जन सहयोग की अहम भूमिका है। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाता है।\\\'\\\' तरुण चुघ, सहायक बाल विवाह निषेध अधिकारी, सिरसा।
जिले में बाल विवाह रुकवाने का डाटा
वर्ष 2011 25
वर्ष 2012 43
वर्ष 2013 51
वर्ष 2014 36
वर्ष 2015 38
वर्ष 2016 29
वर्ष 2017 62
वर्ष 2018 48
वर्ष 2019 45
दो साल कैद की सजा
बाल विवाह कराने वालों के लिए अधिकतम दो साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। जिले में ज्यादातर लोग बाल विवाह संबंधित कानून से जागरूक नहीं हैं। अगर लोगों को इस अपराध की सजा का पता हो तो बाल विवाह के बढ़ते मामलों में कमी आ सकती है।