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नगर परिषद आखिरी बार करेगी कॉल, अब भी किसी ने टेंडर न लगाया तो सिंगल एजेंसी से समझौता कर पकड़वाए जाएंगे बंदर

Bhiwani News - लगात है कि शहर के लोगों को अभी बंदरों के आंतक से निजात मिलने वाली नहीं है। नगर परिषद अधिकारियों ने पिछले दो साल के...

Feb 18, 2020, 07:35 AM IST
Charkhi dadri News - haryana news city council will call last time if no one has tender yet they will be caught by compromising with single agency

लगात है कि शहर के लोगों को अभी बंदरों के आंतक से निजात मिलने वाली नहीं है। नगर परिषद अधिकारियों ने पिछले दो साल के अंतराल में तीन बार टेंडर कॉल कर चुके हैं, लेकिन कोई भी एजेंसी टेंडर नहीं लगा रही। इस कारण ये नगर परिषद इस सप्ताह चौथी फिर एक टेंडर कॉल करने जा रही है। इस बार भी अगर किसी एजेंसी ने टेंडर नहीं लगाया तो किसी सिंगल एजेंसी के साथ समझाैता कर बंदर पकड़वाए जाएंगे। शहर में फिलहाल 1 हजार के करीब बंदर हैं। वन्य प्राणी विभाग ने 500 बंदरों को पकड़ने की मंजूरी मिली हुई है

एक एजेंसी बीच में भागी तो दूसरी बार टेंडर कॉल रही खाली : नगर परिषद ने करीब डेढ़ वर्ष पूर्व वृंदावन की एक एजेंसी को 500 बंदर पकड़ने का टेंडर दिया था। एजेंसी ने 15 दिन में करीब 150 बंदर पकड़ लिए थे। लेकिन एजेंसी कर्मचारियों ने समय पर रुपये नहीं मिलने के कारण टेंडर अधर में ही छोड़ दिया था और वापस चले गए थे। इसके बाद करीब तीन माह पहले भी नगर परिषद ने बंदर पकड़वाने के लिए टेंडर कॉल की थी। लेकिन एक भी एजेंसी ने टेंडर नहीं भरा। इसलिए टेंडर कॉल रद्द हो गई।

कलेसर फॉरेस्ट में
छोड़े जाएंगे बंदर


वन्य प्राणी विभाग से मंजूरी के बाद बंदर पकड़वाए थे। इन बंदरों को पकड़ने के बाद छोड़ने के लिए कलेसर फॉरेस्ट से भी मंजूरी लेनी पड़ती है। इसलिए वहां से भी मंजूरी मिल चुकी हैं। ठेकेदार को बंदर पकड़ने के बाद कलेसर फॉरेस्ट में छोड़ने होंगे।

इन क्षेत्रों में है बंदरों का अधिक आतंक

पुरानी अनाज मंडी क्षेत्र, गीता भवन कॉलोनी एरिया, काठमंडी क्षेत्र, ढाणी फाटक क्षेत्र, गांधीनगर, प्रेमनगर कॉलोनी, लोहारू रोड बस्ती, एमसी कॉलोनी, गोशाला क्षेत्र, लाधान पाना, पुराना शहर, रविदास बस्ती, कबीर बस्ती, बस स्टैंड क्षेत्र सहित सभी भागों में बंदरों से लोग परेशान हैं।

लोगों को काटने के साथ घरों में करते हैं तोड़फोड़

शहर में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। नगर परिषद ने अपनी टीम गठित कर शहर में सर्वे करवाया था। जिनकी संभावित रिपोर्ट अनुसार शहर में बंदरों की संख्या करीब 500 है। ऐसे में वन्य प्राणी विभाग से 500 बंदर पकड़ने की ही मंजूरी ली गई है। फिलहाल बंदरों का झूंड रहता है जो अकेले इंसान को देखकर उस पर टूट पड़ते हैं। वहीं मकानों में भी घुसकर तोड़फोड़ कर आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।

एक बार टेंडर कॉल करने पर खर्च होता है 12 से 15 हजार रुपये

नगर परिषद बंदर पकड़ने के लिए जब भी टेंडर कॉल करती है तो उसे बाद टेंडर कॉल करने
के लिए 12 से 15 हजार रुपये खर्चा करना
पड़ता है। अभी तक दो साल के दौरान तीन बार टेंडर कॉल किए जा चुके हैं। तीनों ही बार कोई भी एजेंसी बंदर पकड़ने के लिए सामने नहीं आई और नगर परिषद को 40 से 45 हजार रुपये का खर्चा भी हो गया।


घरों में बंदर कुछ इस तरह पहुंचते हैं और कपड़ों को उठाकर भाग जाते हैं।

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