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ठेका कर्मी अब गली और प्लॉटों से भी उठाएंगे कचरा

एक वर्ष पहले
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करीब 50 हजार की आबादी वाले नगर पालिका के शहर में घर-घर से कचरा उठाने की योजना एक साल की समय अवधि के बाद पूरी हो गई है। अब नगर पालिका ने फैसला लिया कि यह योजना जारी तो रहेगी, लेकिन नए नियमों के साथ। लिहाजा एजेंसी से जुड़े कर्मचारियों को घरों से कचरा लेने के अलावा वार्ड की गलियों में बिखरा कचरा व प्लाॅटों में मौजूद कूड़े को भी समेटना होगा। बता दें कि नगर पालिका ने बीते साल मार्च में 9 लाख 55 हजार रुपए के महीने के बजट से घर-घर कचरा उठाने की जिम्मेदारी एक एजेंसी को दी थी। इसके जरिए शहर के सभी 19 वार्डों के घरों से कचरा लेना था। नगर पालिका की मानें तो योजना बहुत बढ़िया चली। प्रदेश में सबसे कम बजट में घर-घर कूड़ा उठाने का रहा तो वह झज्जर का रहा।

झज्जर का कचरा रोहतक के ट्रीटमेंट प्लांट में जाएगा

झज्जर जिला प्रशासन ने फैसला लिया कि झज्जर शहर से निकाला गया कचरा ऊंटलोदा जमा करने की बजाय इसे रोहतक के सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा। इसकी पहल डीसी ने की है। रोहतक में कचरे का निस्तारण करने के लिए प्लांट लगा है।

नगर पालिका ने निर्णय लिया कि आगे जो भी टेंडर जिस एजेंसी को दिया जाएगा उसमें सफाई संबंधी एक दो चीजें और जोड़ी जाएंगी। एजेंसी को पार्षदों के सुझाई बातों को भी मानना पड़ेगा। ताकि हर समय वार्ड में स्वच्छता दिखाई दे। -अरुण नांदल, सचिव, नगर पालिका झज्जर।

सफाई को लेकर नगर पालिका का फैसला- नए नियमों के साथ जारी रहेगी योजना

झज्जर को मिलेगी कचरा उठाने के लिए नई गाड़ी

स्थानीय निकाय विभाग प्रदेश के अन्य शहरों के अलावा झज्जर को भी कचरा गाड़ी जल्द देने जा रहा है। नई गाड़ी आने के बाद हर समय इस गाड़ी के जरिए शहर की सड़कों से मौजूद कचरा उठाया जा सकेगा। गाड़ी के ईंधन और ड्राइवर खर्च नगर पालिका को देना होगा।

मेंटेनेंस में एक लाख खर्च करने की बजाए नई रेहड़ी खरीदेंगे: नगर पालिका बीते कुछ साल से कचरा उठाने वाली रेहड़ी के मेंटेनेंस के लिए हर साल एक से डेढ़ लाख रुपया खर्च करती है। अब इस मेंटेनेंस की राशि खर्च करने की बजाए नगर पालिका अब अपनी करीब 25 रेड़ियों को कबाड़े में बेचेगी। नई रेहड़ी टेंडर के जरिए खरीदी जाएंगी।

पार्षदों ने घर-घर कचरा लेने की योजना पर उठाई आपत्ति: नगर पालिका ने घर-घर कचरा उठाने की योजना पर बीते साल से कई पार्षदों ने आपत्ति उठाई है। पार्षदों का कहना है कि इस योजना से जुड़ी एजेंसी मनमाफिक कचरा लेती है। गली में अगर कोई कचरा फैला है या वार्ड के प्लॉट में कचरे का ढेर लगा है तो एजेंसी से जुड़े कर्मचारी इस कचरे को नहीं उठाते। बीते दिनों सदन की मीटिंग में भी पार्षद महावीर गुर्जर, घनश्याम गुर्जर और पूर्व पार्षद टेकचंद ने यह बात कही थी कि जब लाखों रुपए नगर पालिका एजेंसी को दे रही है तो मनमाफिक तरीके से कचरा नहीं उठाने दिया जाएगा।


सफाई पर रहेगा फोकस: इसके बाद भी वार्ड पार्षदों की ओर से साल भर में कई तरह की शिकायतें नगर पालिका अधिकारियों और प्रशासन को दी गई। कहा गया कि इस योजना के बाद भी वार्ड में सफाई का बुरा हाल होता है। एक बार कर्मचारी वार्ड में ट्रॉली के जरिए कचरा घरों से लेकर जाता है। इसके बाद भी गलियों में कचरा दिखाई देता है। प्लॉट में बिखरा पड़ा रहता है। एजेंसी कितने कर्मचारी इस योजना में लगा रहा है। कितने ट्रैक्टर उसके पास है। इसका कोई हिसाब किताब नहीं रहता। आरोप लगे कि तब ऐसे में लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी वार्ड कचरे के ढेर में नजर आता है। पार्षदों की आपत्ति को देखते हुए अब जो भी नया टेंडर योजना के जरिए लगाया जाएगा, उसमें वार्ड की सफाई की बात प्रमुखता से रखी जाएगी। नपा इसी माह टेंडर लगाने जा रही है।

शहर के खाली प्लॉट में इस तरह कचरा और गंदगी डाल दी जाती है
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