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निगम की सैंपल टेस्टिंग लैब पड़ी बंद, टेस्ट नहीं होने से निर्माण कार्यों की क्वालिटी पर उठे सवाल
निगम को टेस्टिंग के लिए सैंपल बाहर भेजने पड़ते हैं, जिनकी रिपोर्ट लंबित है
नगर निगम में सैंपल टेस्टिंग के लिए बनाई लैब पर पिछले एक साल से ताला लटका हुआ है। न यहां पर कोई सैंपल लाया जाता है और न सैंपल टेस्ट होते हैं। जबकि अक्सर शहर के निर्माण कार्यों की क्वालिटी पर सवाल उठ रहे हैं।
निगम को टेस्टिंग के लिए सैंपल बाहर भेजने पड़ते हैं, जिनकी रिपोर्ट लंबित रहती है। पिछले दिनों रघुनाथ मंदिर रोड के सैंपल मेयर व पार्षद ने खुद भरवाए थे, जिनकी रिपोर्ट देरी से आने के कारण अभी तक सड़क का निर्माण अधर में है, लेकिन निगम ठप पड़ी लैब को चालू करने पर ध्यान नहीं दे रहा है। लैब में स्थापित लाखों की मशीन भी खराब हो रही है। पिछले 10 दिन पहले मॉडल टाउन से तारकोल-बजरी से निर्मित की जाने वाली सड़क के सेंपल सीएम प्रतिनिधि व निगरानी समिति के सदस्याें ने भरवाए थे, लेकिन उसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है।
मौके पर नहीं हो पा रहे सैंपल टेस्ट
शहर के विकास कार्यों में क्वालिटी लाने के लिए सरकार की ओर से सैंपल टेस्टिंग कराने के निर्देश हैं। इसके अलावा थर्ड पार्टी से भी सैंपल टेस्ट कराने होते हैं, लेकिन शहर के विकास कार्यों में थर्ड पार्टी से मौके पर सैंपल टेस्ट करवाने की व्यवस्था नहीं बन पा रही है।
निर्माण की गुणवत्ता पर रखा जाता है ध्यान
शहर के निर्माण कार्यों की क्वालिटी पर विशेष ध्यान रखा जाता है। पिछले माह में रघुनाथ मंदिर रोड का तारकोल बजरी से निर्माण कराया जा रहा था। दुकानदारों ने घटिया सामग्री के निर्माण की शिकायत की तो वे तुरंत माैके पर गई थी। सड़क के सैंपल भरवा कर निर्माण कार्य रुकवा दिया था, लेकिन अब रिपोर्ट में सैंपल तो ठीक निकला पर टेंपरेचर के अनुसार सड़क निर्माण का तरीका ठीक नहीं था।
रेणुबाला गुप्ता, मेयर, नगर निगम।
अधिकारी अपने लेवल पर नहीं जांच पाते
शहर में अधिकतर सड़क का निर्माण कार्य इंटरलॉकिंग टाइलों से ही होने लगा है। इसलिए निगम कार्यालय में टाइलों की चेकिंग के लिए लैब स्थापित की गई थी, ताकि अधिकारी अपने स्तर पर ही निर्माण कार्य की शुरुआत के साथ सैंपल टेस्ट कर उसकी क्वालिटी का पता लगा सकें, लेकिन शहर के निर्माण कार्यों के दौरान ऐसा नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों को अपने स्तर पर निर्माण कार्यों की जांच की जैसे कोई परवाह नहीं है। बाद में सैंपल भेजे जाते हैं, जिनकी जांच संदेह के घेरे में रहती है।
बिल बिना टेस्टिंग के पास नहीं होगा
शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय की ओर से निर्देश आ चुके हैं कि अब कोई भी बिल तब तक पास नहीं होगा, जब तक दो मान्य लैब से सैंपल टेस्टिंग न करा ली जाए और उनकी रिपोर्ट सही न अा जाए। निगम कार्यालय की लैब में इंटरलॉकिंग टाइलों के सैंपल टेस्ट हाेते हैं। इस मशीन में क्या खराबी इसे चेक कराया जाएगा। इसके अलावा ऐसी मशीन 40 एमएलडी एसटीपी में भी लगवा रखी हैं।
रमेश मढाण, चीफ इंजीनियर, नगर निगम, करनाल।