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कस्टम हायरिंग सेंटर खुलने के बावजूद पराली को आग लगाई तो किसान, पंचायत और जिम्मेदार अफसरों पर भी गिरेगी गाज

Sirsa News - जिला में धान की पराली जलाना पूर्णत्या प्रतिबंधित है, ताकि पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सके। लेकिन इसके बावजूद 66...

Oct 14, 2019, 08:36 AM IST
जिला में धान की पराली जलाना पूर्णत्या प्रतिबंधित है, ताकि पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सके। लेकिन इसके बावजूद 66 गांव के 1931 किसानों ने पिछले वर्ष 2900 एकड़ धान की पराली को आग के हवाले कर दिया था। हालांकि संबंधित किसानों को निर्धारित जुर्माना भी लगाया था। उन गांवों में इस बार पराली न जलाई जाए, उसके लिए गांव में कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाने की योजना है। जिससे कृषि यंत्रों की सुविधा सीमित आय वाले लघु सीमांत कृषक भी ले सकेंगे। किसानों को लाभांवित करने की दृष्टि से ऐसी 66 पंचायतें चिन्हित की हैं। जिनमें कस्टम हायरिंग सेंटरों को 6 करोड़ के पराली प्रबंधन कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। उसके बावजूद पराली जलाने का मामला सामने आया, तो किसान, पंचायत व उसके साथ जिम्मेदारी अधिकारी भी दोषी माने जाएंगे।

धान की पराली का प्रबंधन कस्टम हायरिंग सेंटरों का उद्देश्य

कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना होने से सीमित आय वाले लघु सीमांत कृषकों को उन्नत एवं महंगे कृषि उपकरणों की सुविधा गांव में मिल सकेगी। असिस्टेंट एग्रीकल्चर इंजि. जसविंद्र चौहान ने बताया कि योजना में पंचायतों को कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। योजना के तहत पंचायतों से आवेदन मांगे गए हैं। जिले के 66 गांव की पंचायतों व समस्त खंडों में कृषि उपकरणों के कस्टम हायरिंग सेंटरों से कृषकों को कृषि कार्यों के लिए आवश्यकता अनुसार उन्नत कृषि उपकरण किराये पर लेने की सुविधा प्राप्त होगी।

किसान कस्टम हायरिंग सेंटर से ले सकेंगे महंगे कृषि उपकरणों का लाभ।

इन कृषि यंत्रों का ले सकते हैं लाभ

कस्टम हायरिंग सेंटर को कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। जिसमें पेडी स्ट्रा चौपर, मल्चर, सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट, लेजर लेंड लेवलर, रोटरी प्लो, रीपर बाईंडर, स्ट्रा रीपर, डिस्क हैरो, स्ट्रा बेलर, पॉवर टिलर, सबसोयलर, मेज प्लांटर, मल्टी क्रोप सीड ड्रील, डीएस आर मशीन, मल्टी क्रोप थ्रैशर, ट्रेक्टर माउंटिड स्प्रेयर, ट्रेंच क्वाइंटर, रिज प्लांटर, हेरैक, कल्टीवेटर, विड स्लैसर, पावर हैरो, फर्टिलाइजर स्पेडर, फोरेज हारवेस्टर, कॉटन स्टॉक अपरूटर, स्व चलित राइस ट्रांसप्लांटर मशीने शामिल हैं।

इन गांवों के किसानों ने जलाई थी सबसे ज्यादा पराली

इन 66 गांव के किसानों ने खेतों में सबसे ज्यादा फसलों के अवशेष को आग लगाई थी। जहां जिला प्रशासन इस बार पैनी नजर रखेगा। जिसमें बुर्ज कर्मगढ़, नेजाडेला खुर्द, मत्तड़, नागोकी, रोड़ी, देसूजोधा, गोरीवाला, मोढ़ी, केसूपुरा, ममेरा, हारनी खुर्द, मलेकां, मिर्जापुर, ठाेबरिया, प्रतापनगर, कुत्ताबढ़, तलवाड़ा खुर्द, जीवननगर, दड़बा कलां, मोडिया खेड़ा, नरेलखेड़ा, नोरंग, दादू, देसू मल्लेकां, जगमालवाली, मौजदीन, बालासर, धोत्तड़, फिरोजाबाद, भरोखांवाली, ममेरखेड़ा, चकसाहिबा, घोड़वाली, हरिपुरा, धनूर, अभोली, बाहिया, ओटू, करिवाला, केलनियां, नथोर, शहीदांवाली, बाजेकां, नेजाडेला कलां, दड़बी, पनिहारी, फरमाई, झोरड़नाली, सुचान, रसूलपुर, मंगाला, अलिकां, पक्का, सुरतीया, बनी, जगजीत नगर, रानियां, लिवालवाली, वैदवाला, अलीपुर टीटूखेड़ा, जोधकां व शेरपुरा गांव शामिल हैं।

पराली नहीं जलाएंगे किसान


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