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दिव्यांगजनों में भी होती हैं विशेष तरह की योग्यताएं

एक वर्ष पहले
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रेलवे रोड स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में समग्र शिक्षा के तहत जिले के प्रिंसिपल व मुख्याध्यापकों की एक दिवसीय ओरियंटेशन कार्यशाला का आयोजन जिला परियोजना संयोजक सपना जैन की अध्यक्षता व सहायक परियोजना संयोजक अनु कौड़ा की देखरेख में हुआ।

कार्यशाला में नगर निगम की मेयर रेणु बाला गुप्ता ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यशाला में समावेशी शिक्षा के स्वरूप तथा दिव्यांगजन अधिनियम 2016 के प्रावधानों पर चर्चा करते हुए मेयर रेणु बाला गुप्ता ने बताया कि सामान्य व दिव्यांगजनों में भेदभाव करना कानूनी रूप में जुर्म घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों में अपनी प्रतिभा सिद्ध करने की अपार संभावनाएं मौजूद रहती हैं परंतु उनके प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण के रहते उन्हें समान अवसर नहीं मिल पाते और उनकी प्रतिभा दबकर रह जाती है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई भी इंसान सर्वगुण संपन्न नहीं है। हर इंसान में अलग-अलग योग्यता और रूचियां हैं। इसी प्रकार दिव्यांगजनों में भी विशेष तरह की योग्यताएं होती हैं जिनकी पहचान अध्यापक-अभिभावकों तथा उनके साथ रहने वाले इंसानों से विचार-विमर्श करके कर सकता है। मेयर ने कहा कि दिव्यांग बच्चे मन के साफ होते हैं, उन्हें अपनी कमी को छिपाना नहीं आता, जबकि सामान्य बच्चे अपनी कमियों को छुपाकर रखने में निपुण होते हैं तथा सामान्य बच्चों का व्यवहार अलग-अलग परिस्थिति में अलग-अलग व्यवहार होता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने दिव्यांग बच्चों के लिए कई योजनाएं चलाई हुई हैं, उनका पूरा लाभ बच्चों को मिलना चाहिए।

समग्र शिक्षा की जिला परियोजना संयोजक सपना जैन ने कहा कि दिव्यांग बच्चे सामान्य बच्चों के साथ बैठकर पढ़ने के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि 6 से 18 वर्ष तक आयु वाले बच्चे नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार रखते हैं। उन्होंने कहा कि नए अधिनियम के अनुसार दिव्यांगता की 21 श्रेणियों चिन्हित की गईं हैं।

करनाल. रेलवे रोड स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बैठक में उपस्थित समग्र शिक्षा के अंतर्गत जिले के प्रिंसिपल व मुख्याध्यापक।
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