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मरीज को दाखिल कर इलाज करने की बजाय रेफर करने को ज्यादा तवज्जो देते हैं चिकित्सक

Jind News - सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे मरीजों को चिकित्सकों द्वारा दाखिल करने की बजाय रेफर करने को ज्यादा तवज्जो...

Jan 16, 2020, 07:56 AM IST
Jind News - haryana news doctors prefer to refer the patient by admitting treatment than entering the patient
सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे मरीजों को चिकित्सकों द्वारा दाखिल करने की बजाय रेफर करने को ज्यादा तवज्जो दी जाती है। इस दौरान चिकित्सक मरीज को दाखिल कर किसी भी तरह का कोई जोखिम उठाना नहीं चाहते। मरीज की लड़ाई झगड़े या फिर किसी और कारण से थोड़ी सी भी हालत गंभीर है तो विशेषज्ञ चिकित्सक के परामर्श के बिना ही उसे पीजीआई रेफर किया जाता है। इसका खुलासा सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में पिछले दिनों में आए मरीजों की संख्या की पड़ताल करने से हुआ है।

इमरजेंसी में 1 जनवरी से लेकर 13 जनवरी तक कुल 1322 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इसमें 44 मरीज ही ऐसे रहे जिनको दाखिल किया गया। बाकी मरीजों को इमरजेंसी में ही इलाज के बाद या तो छुट्टी दे दी गई या फिर उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया। इसके अलावा कई मरीजों को इमरजेंसी में उपलब्ध चिकित्सक द्वारा विशेषज्ञ चिकित्सक के उपलब्ध न होने की बात कहकर कहीं दूसरी जगह चेकअप कराने की भी सलाह दी गई। इमरजेंसी में उपलब चिकित्सक मरीज को दाखिल करने को एक प्रकार का जोखिम मानते हैं। इसी कारण अस्पताल में गायनी वार्ड को छोड़कर अन्य वार्डों में बेड खाली रहते हैं।

मरीजों को दाखिल कर कोई जोखिम उठाना नहीं चाहते डाॅक्टर, प्रमाण ये- 13 दिन में पहुंचे 1322 मरीज, 44 को किया दाखिल

बुधवार को इमरजेंसी में पहुंचे 2 केस से जानिए जिनको पीजीआई रेफर किया गया

शहर की दुर्गाकाॅलोनी की रहने वाली महिला तारादेवी लड़ाई-झगड़े में बुधवार सुबह घायल हो गईं थीं। परिजन उन्हें इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। यहां डाॅक्टर ने उनका उपचार किया और फिर पीजीआई रेफर कर दिया। डाॅक्टर ने परिजनों को बताया कि चोट ज्यादा है और उन्हें पीजीआई में चेकअप कराना पड़ेगा। इसके बाद परिजन उन्हें तुरंत ही पीजीआई रोहतक ले गए।

केस-1

ईक्कस गांव के 3 माह के बच्चे युदित को उसके परिजन सुबह 10 बजे इमरजेंसी में लेकर पहुंचे थे। बच्चे को निमोनिया के साथ-साथ सांस लेने में भी दिक्कत थी। करीब 3 घंटे बच्चे को इमरजेंसी में रखा गया। लेकिन इस दौरान कोई आराम नहीं हुआ। इस पर चिकित्सक ने उसे पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। जबकि अस्पताल में कई बाल रोग विशेषज्ञ डाॅक्टर उपलब्ध हैं। दोपहर बाद परिजन बच्चे को सरकारी एंबुलेंस से पीजीआई लेकर चले गए।

केस-2

इमरजेंसी में 1 जनवरी से लेकर 13 जनवरी तक आए मरीज व उनमें से कितने दाखिल किए गए

तारीख मरीज भर्ती किए

1 जनवरी 78 03

2 जनवरी 179 02

3 जनवरी 99 02

4 जनवरी 104 03

5 जनवरी 125 01

6 जनवरी 102 05

7 जनवरी 97 03

तारीख मरीज भर्ती किए

8 जनवरी 80 04

9 जनवरी 75 01

10 जनवरी 62 00

11 जनवरी 105 08

12 जनवरी 120 01

13 जनवरी 96 11

कुल 1322 44

सीधी बात डाॅ. मंजू कादियान, सिविल सर्जन

विशेषज्ञ से मरीज का चेकअप कराने के देंगे निर्देश

Q. इमरजेंसी में जो मरीज आते हैं उनको दाखिल करने की बजाय रेफर को तवज्जो दी जाती है। ऐसा क्यों।

A. ऐसा कुछ नहीं है। इमरजेंसी हो या फिर ओपीडी दाखिल करना या रेफर करना है इसका फैसला डाॅक्टर को लेना होता है। इसके पीछे और कोई मंशा नहीं होती।

Q. अस्पताल में कई रोगों के विशेषज्ञ डाॅक्टर के उपलब्ध होने के बाद भी रेफर होने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा क्यों है।

A. अस्पताल में सबसे जरूरी फिजीशियन का होना है। उनसे संबंधित ही ज्यादा मरीज पहुंचते हैं। इस कारण रेफर मरीजों की संख्या ज्यादा और दाखिल होने वाले मरीजों की संख्या कम है।

Q. अस्पताल में ही मरीजों का इलाज हाे इसके लिए क्या किया जाएगा।

A. डाॅक्टराें को निर्देश दिए जाएंगे कि जिस रोग के अस्पताल में विशेषज्ञ उपलब्ध हैं पहले उनसे मरीज का चेकअप कराया जाए।

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