उन्नति के लिए उत्साह जरूरी : धर्मदेव
जींद| असमर्थ महिला कल्याण समिति की बैठक हुई। प्रधान धर्मदेव विद्यार्थी ने गायत्री यज्ञ के बाद मानव जीवन में उत्साह के महत्व पर कहा कि मानव जीवन फूलों की सेज नहीं, इसमें कांटे भी हैं। दुनिया में एक किनारे की नदी कहीं भी दिखाई नहीं देती।
इस अवसर पर रामनिवास वशिष्ठ ने कहा कि सूखे मुरझाए फूल पर भंवरा तो कहां मक्खी भी बैठना पसंद नहीं करती। इसलिए उन्नति के इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति का दिल कष्ट कठिनाइयों से डरने की बजाय जूझने वाला होना चाहिए। उत्साही पुरुष उन्नति के लिए पहाड़ों में मार्ग बना लेते हैं। भूमि में छिपे सोने को ढूंढ लेते हैं। गहरे समुद्रों से मोती निकाल लेते हैं। पानी के बहाव के विरुद्ध तैर सकते हैं। भयंकर तूफानों के विरुद्ध टकरा सकते हैं। इस मौके पर तेलूराम शर्मा, राजेन्द्र जीतगढ़, धर्मबीर कंडेला, सोमदत्त गालव मौजूद रहे।