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पापमोचनी एकादशी व्रत करने से होता है समस्त पापों का नाश : अवध बिहारी
कॉलेज रोड स्थित श्रीबालाजी मंदिर में वीरवार को कीर्तन हुआ। मंदिर के महंत अवध बिहारी पांडे ने कहा कि चैत्र माह के कृष्णपक्ष में आने वाली एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। इस बार यह एकादशी वीरवार 19 मार्च को है। एकादशी का व्रत करने से समस्त पापों का नाश होता है। व्रती के मोक्ष का द्वार खुलते हैं। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु का षोड्शोपचार पूजन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पाप मोचनी एकादशी के संबंध में भविष्योत्तर पुराण में कहा गया कि इस दिन भगवान विष्णु की षोड्शोपचार पूजा करनी चाहिए। व्रती दशमी तिथि के दिन एक बार सात्विक भोजन करें। एकादशी के दिन सूर्योदय पूर्व उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें। पूजा के बाद एकादशी की कथा का श्रवण या पठन करें। भागवत कथा का पाठ भी करें। इस दिन निराहार रहते हुए रात जागरण करें। भगवान के भजन, मंत्रों का जाप करें। द्वादशी के दिन प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु का पूजन कर ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत खोलें। इस एकादशी के दिन चारोली का फलाहार किया जाता है। उन्होंने बताया कि पापमोचनी एकादशी में एक कथा प्रचलित है, पौराणिक कथा के अनुसार चैत्ररथ नामक एक सुंदर वन में ऋषि च्यवन के पुत्र ऋषि मेधावी तपस्या कर रहे थे। एक दिन वन में मंजुघोषा नामक अप्सरा की नजर ऋषि पर पड़ी तो वह उन पर मोहित हो गई और उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास करने लगी। उसी समय वहां से कामदेव गुजर रहे थे तो अप्सरा की मंशा भांपकर उसकी सहायता करने लगे। कामदेव की मदद से अप्सरा अपने य| में सफल हुई।
ऋषि काम पीड़ित हो गए। काम के वश में ऋषि शिव की तपस्या भूल गए। अप्सरा के साथ रमण करने लगे। कई वर्षों बाद जब उनकी चेतना जागी तो उन्हें भान हुआ कि वह शिव की तपस्या करना भूल गए हैं। उन्हें अप्सरा पर बहुत क्रोध आया। अप्सरा को पिशाचिनी होने का श्राप दे दिया। दुखी अप्सरा ऋषि के पैरों में गिरकर श्राप मुक्ति की विनती करने लगी, अप्सरा की याचना से द्रवित होकर ऋषि मेधावी ने उसे विधि सहित चैत्र कृष्ण एकादशी का व्रत करने के लिए कहा और स्वयं के पापों का नाश करने के लिए ऋषि ने भी इस एकादशी का व्रत किया। जिससे दोनों का पाप नष्ट हुआ। अप्सरा पिशाचिनी श्राप से मुक्त हुई।
मानवता की सेवा के लिए समाज को सत्यधर्म की यात्रा तय करनी पड़ेगी : राजेंद्र
रादौर | भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्ति तीर्थ सिद्धार्थ आश्रम ट्रस्ट की ओर से जयपुर गांव में दो दिवसीय अखंड श्रीदुर्गा चालीसा पाठ वीरवार को संपन्न हुआ। हरियाणा संगठन के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र मेहता ने बताया कि भगवती मानव कल्याण संगठन के सदस्यों, कार्यकर्ताओं द्वारा समाज कल्याण, आत्मकल्याण एवं मानवता की रक्षा के लिए लोगों को नशा मुक्त, मांसाहार मुक्त एवं चरित्रवान जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। धर्मरक्षा, राष्ट्र रक्षा व मानवता की सेवा के लिए समाज को सत्यधर्म की यात्रा तय करनी पड़ेगी। अपने धर्म के साथ दूसरों के धर्म का भी सम्मान करना चाहिए। सभी ने शक्ति जल व प्रसाद ग्रहण किया। मौके पर सतप्रकाश, सुरेश सरपंच, बीरबल, राजेश बुबका, सतीश कंबोज, प्रवेश कुमार, सोहन लाल हिरण छप्पर व दीवान मंधार मौजूद रहे।
रादौर | श्रद्धालुओं को संबोधित करते राजेंद्र मेहता।