मंडियों में लगे गेहूं के स्टॉक को नहीं उठा रहा था एफसीआई, डीसी ने जीएम को फोन किया तो लगने लगी स्पेशल

Yamunanagar News - धान मंडियों में पहुंचनी शुरू हो गई है, जबकि मंडियों में धान फड़ों पर डालने की जगह नहीं है। क्योंकि फड़ों पर पहले से...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 09:11 AM IST
Yamunanagar News - haryana news fci was not picking up the stock of wheat in mandis dc started calling gm when it started getting special
धान मंडियों में पहुंचनी शुरू हो गई है, जबकि मंडियों में धान फड़ों पर डालने की जगह नहीं है। क्योंकि फड़ों पर पहले से गेहूं स्टॉक की गई है। ये हाल तब है जब कई माह से डीएफएससी की ओर से एफसीआई को पत्र लिखे जा रहे हैं। इसके बाद भी एफसीआई के अधिकारियों के सिर पर जूं तक नहीं रेंगी। स्टॉक को कई माह तक उठाना शुरू ही नहीं किया। बार-बार पत्र लिखने के बाद शुरू किया तो इतनी धीमी गति से उठाने लगे कि मंडियों को क्लियर होने में छह माह का समय लग जाएगा। बात जब नहीं बनी तो इस मामले को लेकर अधिकारी डीसी के पास पहुंचे। डीसी के सामने बात रखी कि अगर धान के सीजन से पहले गेहूं नहीं उठी तो हालत खराब होंगे। मंडियों में कोई भी फड़ ऐसा है, जहां पर गेहूं न लगी हो। डीसी ने इस मामले को लेकर एफसीआई के जीएम से बात की। उन्हें कड़े शब्दों में कहा कि उन्हें हर हाल में जल्द से जल्द क्लियर चाहिए। तब जीएम ने डीसी को बताया कि वे अतिरिक्त स्पेशल (ट्रेन) लगाकर यहां से गेहूं को उठवाएंगे, हालांकि तब उन्होंने कहा था कि इस माह में नौ स्पेशल लगनी है, लेकिन डीसी ने उन्हें कहा कि इतने में काम नहीं चलेगा।

करीब 10 लाख कट्टे मंडियों में लगे हैं

विभाग के अनुसार करीब दस लाख कट्टे मंडियों में स्टॉक किए गए हैं। सबसे ज्यादा बिलासपुर, साढौरा, जगाधरी, रादौर मंडी में अभी स्टॉक है। यहां पर खुले में और शेड के नीचे स्टॉक लगा हुआ है। एक स्पेशल (ट्रेन) में 55 हजार कट्टे आते हैं। गेहूं के सीजन में 375515 एमटी गेहूं की खरीद सरकारी एजेंसियों ने की थी। इसमें ज्यादातर गेहूं को मंडियों में ही स्टॉक किया गया है। आढ़तियों का कहना है कि अगर ये ही हालात रहे तो धान डालने की मंडी में जगह नहीं होगी। वे इस बारे में कई बार अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।


सरकार द्वारा खरीदी गई कुछ गेहूं राशन डिपो पर सप्लाई कर दी जाती है, लेकिन ज्यादतर गेहूं यहां से दूसरे राज्यों में सप्लाई होती है। सप्लाई करने की जिम्मेदारी एफसीआई की है। बारिश से पहले एफसीआई के पास दूसरे राज्यों से डिमांड नहीं आई। इससे उठान शुरू नहीं किया गया। इसी बीच बारिश का सीजन शुरू हो गया। कई राज्यों में भारी बारिश के चलते वहां पर इन दिनों सप्लाई करना ठीक नहीं है। इससे देरी पर देरी होती गई और गेहूूं के सीजन के बाद धान का सीजन आ गया, लेकिन मंडियों से गेहूं का स्टॉक क्लियर नहीं हुआ है।


धान की सरकारी खरीद एक अक्टूबर से शुरू हो रही है। हालांकि मंडियों में अभी से धान पहुंचने लगा है। हालांकि अभी इक्का दुक्का किसान ही आ रहा है। लेकिन जैसे जैसे समय बढ़ेगा, मंडी में धान की आवक भी बढ़ेगी। धान का रकबा और पैदावार ज्यादा होने से मंडियों में हर साल हालात ऐसे होते हैं कि पैर रखने तक की जगह नहीं मिल पाती। सड़काें पर धान डालनी पड़ती है। धान के सीजन को देखते हुए 17 सितंबर को डीसी की अध्यक्षता में मीटिंग होगी। इसमें कई विभाग के अधिकारी पहुंचेंगे और मंडियों की व्यवस्था पर रणनीति बनाई जाएगी।

अक्टूबर से पहले स्टॉक हो जाएगा क्लियर


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